बिहार बोर्ड 12वी भौतिक विज्ञान परीक्षा 2023 : Most Important Short & Long Question (वायरल प्रश्न परीक्षा से पहले रटलो)
आपको यहां पर इंटरमीडिएट (12th ) बोर्ड परीक्षा के लिए भौतिक विज्ञान - Physics महत्वपूर्ण लघु & दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर के साथ (Shorts & Long Question with Solution) दिये गये है।
रटलो ये प्रश्न,अब आपकी परीक्षा में कुछ ही घंटे बचे है I जिससे भौतिक विज्ञान - Physics के पेपर की तैयारी कर सकते हैं और अच्छे मार्क्स ला सकते है I आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर भौतिक विज्ञान - Physics के महत्वपूर्ण प्रश्न को अच्छी तरह से पढ़ सकते है।
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Most Important Question
1. विद्युत फ्लक्स को परिभाषित करें। इसके SI मात्रक को लिखें।
उत्तर :- किसी विद्युतीय क्षेत्र में किसी सतह के लम्बवत् गुजरने वाली कुल वैधुत बल रेखाओं की संख्या को ही 'वैधुत फ्लक्स' कहते हैं।
इसे (Φ (फाई) द्वारा सूचित किया जाता है।
Φ = [ E•ds
E = विद्युतीय क्षेत्र,
ds = सतह का छोटा क्षेत्रफल
⇒ इसका SI मात्रक N-m-c' होता है।
2. लॉरेंट्ज बल क्या है?
उत्तर :- यदि चुंबकीय क्षेत्र (B vector ) में कोई आवेशित कण (q) की गति । हो तो उस कण पर वैद्युत चुंबकीय बल दोनों कार्य करता है। इन दोनों बलों को सम्मिलित रूप से 'लॉरेंट्ज बल' कहते हैं।
⇒ F = q[E + V × B]
3. शंट क्या है? इसके दो उपयोग लिखें।
उत्तर :- वह युक्ति जो विद्युत परिपथ में विद्युत धारा के संचरण के लिए कम प्रतिरोध का पथ उत्पन्न करता है, शंट कहलाता है।
उपयोग
(i) इसका प्रयोग गैल्वेनोमीटर से एमीटर बनाने में किया जाता है।
(ii) इसका प्रयोग गैल्वेनोमीटर और ऐमीटर को प्रबल विद्युत धारा से सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है।
4. विद्युत-चुंबकीय प्रेरण का लेंज का नियम, ऊर्जा के संरक्षण के सिद्धांत का - पालन करता है। इसकी विवेचना करें।
उत्तर :- जब चुंबक को किसी लुप के नजदीक या लूपं से दूर ले जाया जाता है तो लूप में विद्युत धारा प्रेरित होती है। अतः लेंज का नियम से प्रेरित धारा उत्पन्न होने का कारण यांत्रिक ऊर्जा का विद्युत ऊर्जा में परिवर्तन होना है। एक (यांत्रिक) ऊर्जा का दूसरे (विद्युत) ऊर्जा में परिवर्तन को ही ऊर्जा संरक्षण का सिद्धांत कहते हैं। इस प्रकार विद्युत चुंबकीय प्रेरण का लेंज नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन करता है।
5. विद्युत-चुंबकीय तरंग के दो गुणों को लिखें।
उत्तर :- विद्युत चुंबकीय तरंगों के दो गुण निम्नलिखित हैं
(i) ये तरंगें अनुप्रस्थ होती हैं।
(ii) इन तरंगों के गमन हेतु माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।
6. किसी सतह पर विद्युत फ्लक्स की परिभाषा दें।
उत्तर :- विद्युत फ्लक्स, किसी सतह से विद्युत क्षेत्र के प्रवाह की दर है। अर्थात् विद्युत फ्लक्स किसी सतह से गुजरनेवाली विद्युत क्षेत्र रेखाओं के अनुक्रमानुपाती होती है।
7. वायुमंडल वैद्युत उदासीन नहीं होता है, क्यों ?
उत्तर :- वायुमंडल में मुख्यतः नाइट्रोजन तथा ऑक्सीजन गैस होता है एवं इसके अलावा कार्बन डाईऑक्साइड, जलवाष्प, हाइड्रोकार्बन, सल्फर के यौगिक तथा धूलकण होते हैं। सूर्य की किरणों में यौगिक कण तथा धूल कण होते है। सूर्य की किरणे यौगिक कणों तथा धूलकणों से टकराकर इन्हें आयनीकृत कर देती है। अतः वायुमंडल विद्युत उदासीन नहीं होता है।
8. अतिचालकता से क्या समझते हैं ?
उत्तर :- कुछ ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी प्रतिरोधकता ताप घटाने पर धातु की तरह पहले नियमित रूप से घटती है और एक ताप पर उसकी प्रतिरोधकता एकाएक घटकर शून्य हो जाती है। इस घटना को अतिचालकता कहते हैं और ऐसे पदार्थ को अतिचालक कहा जाता है।
9. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ क्या है? इसके दो गुणों को लिखें।
उत्तर :- चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ-चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ वैसे संतत काल्पनिक बंद वक्र हैं उत्तरी ध्रुव से निकलकर उसके दक्षिणी ध्रुव तक जाते हैं।
गुण:-.
(i) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती है।
(ii) चुम्बकीय क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को निरूपित करती है।
10. आवेश के क्वांटीकरण से क्या समझते हैं ?
उत्तर :- आवेश का क्वांटीकरण - किसी आवेशित वस्तु पर स्थित आवेश हमेशा इलेक्ट्रॉनिक आवेश का पूर्ण गुणज होता है।
अर्थात् किसी वस्तु पर आवेश
Q = ± ne
जहाँ e = इलेक्ट्रॉनिक आवेश = 1.6 x 10-19 कूलॉम । इसे ही आवेश का क्वांटीकरण कहा जाता है।
11. लौह-चुम्बकीय पदार्थ से क्या समझते हैं? इसके गुणों को लिखें।
उत्तर :- लौह-चुम्बकीय पदार्थ-कुछ पदार्थ ऐसे होते हैं जिनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति तो धनात्मक होती है एवं चुम्बकीय क्षेत्र में रखे जाने पर इनमें चुम्बक का गुण सहज ही आ जाता है और वे शक्तिशाली चुम्बक बन जाते हैं। इन पदार्थों को लौह चुम्बकीय पदार्थ कहा जाता है।
उदाहरण:- लोहा, निकेल, कोबाल्ट इत्यादि ।
गुणः
(i) प्रकृति में पाए जाने वाले लौह चुम्बकीय पदार्थ रवेदार ठोस होते
(ii) चुम्बकीय क्षेत्र का आकर्षण बहुत ही प्रबल होता है।
(iii) इनकी आपेक्षिक चुम्बकशीलता एकांक से बहुत अधिक होती है।
(iv) इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति धनात्मक और बहुत बड़ी होती है।
(v) ताप वृद्धि से इनकी चुम्बकीय प्रवृत्ति अनियमित और जटिल रूप से बदलती है।
12. क्यूरी के नियम से क्या समझते हैं?
उत्तर :- ऐसा पाया जाता है कि अनुचुम्बकीय पदार्थों की चुम्बकीय प्रवृत्ति तापमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है
अर्थात्
Xm ∝ 1/T → इसे ही क्यूरी का नियम' कहा जाता है।
13. पराबैंगनी विकिरण के दो गुणों एवं दो उपयोगों को लिखें।
उत्तर :- पराबैंगनी विकिरण के दो गुण एवं दो उपयोग
गुणः
(i) ये किरणे काँच द्वारा अवशोषित हो जाती है।
(ii) वायुमंडल के अणुओं-परमाणुओं को आयनीकृत कर देती है, जिसके कारक आयन मंडल निर्माण होता है।
उपयोग:
(i) अदृश्य लिखावट एवं कीमती पत्थरों की पहचान हेतु इनका उपयोग होता है।
(ii) पदार्थ के संरक्षण में इनका उपयोग होता है।
14. ऑप्टिकल फाइबर क्या है ? इसके दो उपयोगों को लिखें।
उत्तर :- प्रकाशीय फाइबर एक ऐसी युक्ति है, जो प्रकाश ऊर्जा को बिना उसके तीव्रता में हानि के स्थान से दूसरे स्थान तक प्रेरित करता है। यह प्रकाश के पूर्ण आंतरिक परावर्तन सिद्धांत पर आधारित है।
इसका दो उपयोग :
(i) ऑप्टिकल फाइबर का उपयोग चिकित्सीय जाँच में किया जाता है।
(ii) प्रकाश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने में इसका उपयोग किया जाता है।
15. अपवर्तनांक से क्या समझते हैं ?
उत्तर :- अपवर्तनांक एक नियतांक है, जिसके मदद से किसी भी माध्यम के प्रकाशीय व्यवहार की जानकारी प्राप्त होती है। किसी माध्यम का अपवर्तनांक निम्नलिखित दो कारकों पर निर्भर करता है
(i) माध्यम का अपवर्तनांक, माध्यम के घनत्व पर निर्भर करता है।
(ii) किसी भी माध्यम का अपवर्तनांक प्रकाश के तरंगदैर्ध्य पर निर्भर करता है, साथ ही प्रकाश के रंग पर भी निर्भर करता है।
16. प्रकाश विद्युत प्रभाव क्या है ?
उत्तर :- प्रकाश विद्युत प्रभाव → धातु पृष्ठ से प्रकाश के आपतन के कारण इलेक्ट्रॉनों के उत्सर्जन को घटना को प्रकाश विद्युत प्रभाव कहा जाता है। प्रकाश द्वारा उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों को फोटो इलेक्ट्रॉन तथा इनके प्रवाह के कारण उत्पन्न धारा को प्रकाश विद्युत धारा कहा जाता है।
17. विकिरण के क्वांटम सिद्धांत को लिखें।
उत्तर :- विकिरण का क्वांटम सिद्धांत → प्लांक के क्वांटम सिद्धांत के अनुसार “प्रकाश ऊर्जा के छोटे- छोटे बंडलों के रूप में चलता है, जिन्हें फोटॉन (Photon) कहते हैं
तथा प्रत्येक फोटॉन की ऊर्जा E = hv होती है, जहाँ h = प्लांक का नियतांक एवं v = आवृत्ति
यही विकिरण का क्वांटम सिद्धांत है।
18. नाभिकीय बल क्या है? इसके गुणों को लिखें।
उत्तर :- नाभिकीय बल - नाभिक में उपस्थित कणों के बीच प्रबल आकर्षण का नाभिकीय बल कहा जाता है जो उन्हें एक-दूसरे से बाँधे रहता है।
गुण:
(i) नाभिकीय बल आकर्षण बल होते हैं।
(ii) नाभिकीय बल अत्यंत लघु परासी बल होते हैं।
(iii) नाभिकीय बल अवैद्युत तथा अगुरुत्वीय होते हैं।
(iv) नाभिकीय बल अत्यंत प्रबल होते हैं।
19. कैथोड किरणें क्या है? समझावें ।
उत्तर :- कैथोड किरणें कैथोड किरणें बहुत से इलेक्ट्रॉनों के तेजगामी प्रवाह है जो सभी तत्वों में विद्यमान है।
गुणः
(i) ये ऋण आवेशित होते हैं।
(ii) इनके मात्रा तथा आवेश इलेक्ट्रॉन के बराबर है अर्थात् इनका आवेश 1.6 x 10-19 C तथा 9.1 x10-31 kg है।
20. ऐनालॉग और डिजिटल संकेत से क्या समझते हैं ?
उत्तर :- ऐनालॉग संकेत → एक लगातार बदलने वाले संकेत को ऐना-लॉग सकेत कहा जाता है।
जैसे - प्रत्यावर्ती धारा एक ऐनालॉग संकेत है।
डिजिटल संकेत – ऐसा संकेत जिसके दो या दो के गुणज के अंसतत मान ही संभव हो, डिजिटल संकेत कहा जाता है।
जैसे - वर्ग तरंग एक डिजिटल संकेत है।
21. नोट लिखें:-
(a) www
(b) FAX
(c) Chat
(d) E-Commerce (ई-कॉमर्स)
उत्तर :- (a) www—यह वर्ल्ड वाइड वेब का छोटा रूप है। ऐसे कम्प्यूटर जो दूसरे से बाँटने के लिए अपने भीतर कुछ विशिष्ट सूचना संग्रहित करते हैं या स्वयं ही अथवा वेब सेवा प्रदान करने वालों के द्वारा कोई वेबसाइट प्रदान करते हैं।
(b) FAX - अंकीय संचार तंत्र द्वारा किसी प्रलेख अथवा चित्र का किसी दूरस्थ स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक पुनरूत्पादन 'प्रतिचित्रण टेलीग्राफी (Fascimile telegraphy) अथवा फैक्स (FAX) कहलाता है।
(c) Chat - समान रूचि के व्यक्तियों द्वारा टाइप किए हुए संदेशों द्वारा बातचीत को चैट (Chat) करना कहते हैं।
(d) E- कॉमर्स → इलेक्ट्रॉनिक साधनों से क्रेडिट कार्ड का उपयोग करके इंटरनेट के उपयोग द्वारा व्यापार को प्रोन्नत करना, ई-कॉमर्स कहलाता है।
22. संधारित्र से क्या समझते हैं? इसकी धारिता को भी बतावें ।
उत्तर :- संधारित्र-वैसी व्यवस्था जिसमें एक विद्युतरोधी आवेशित चालक के निकट एक भूधृत चालक लाने से, पहले वाले चालक की धारिता कृत्रिम रूप से बढ जाती है. संधारित्र कहते हैं।
० संधारित्र की धारिता किसी संधारित्र की विद्युत धारिता संख्यात्मक रूप से उस आवेश का वह परिमाण है, जिससे संधारित्र के दोनों प्लेटों के बीच एकांक विभवांतर उत्पन्न होता है।
यदि संधारित्र की संग्राहक प्लेट पर 'Q' आवेश देने पर दोनों प्लेटों के बीच v विभवांतर उत्पन्न हो जाता है तो संधारित्र की धारिता (C)= Q/V
23. विद्युत चुम्बकीय प्रेरण क्या है ?
उत्तर :- किसी बंद कुंडली और चुम्बक के बीच आपेक्षिक गति के कारण कुंडली में विद्युत वाहक बल के प्रेरित होने की घटना को विद्युत चुम्बकीय प्रेरण कहा जाता है।
कुंडली में उत्पन्न विद्युत वाहक बल को प्रेरित विद्युत वाहक बल तथा उत्पन्न धारा को प्रेरित धारा कहा जाता है।
24. पृथ्वी के चुम्बकत्व का क्या कारण है ?
उत्तर :- पृथ्वी के चुम्बकत्व के संबंध में कई सिद्धांत प्रतिपादित किए गए हैं। किसी न किसी प्रकार अब यह माना गया है कि पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र का कारण इसके भीतर परिसंचरित विद्युत धाराएँ है। चुम्बकीय क्षेत्र इस प्रकार व्यवहार में लिया जाता है जैसे यह किसी प्रकार की विद्युत धारा से उत्पन्न हो रहा है।
25. विद्युतीय द्विध्रुव आघूर्ण क्या है? इसका SI मात्रक को लिखें।
उत्तर :- विद्युतीय द्विध्रुव के कोई एक आवेश एवं दोनों आवेशों के बीच के दूरी के गुणनफल को द्विध्रुव आघूर्ण कहा जाता है।
अतः द्विध्रुव आघूर्ण (P) = q x 21
विद्युतीय द्विध्रुव आघूर्ण एक सदिश राशि है जिसकी दिशा हमेशा ऋण आवेश से धन आवेश की ओर होती है। इसका S. I. मात्रक कूलम्ब - मीटर होता है।
26. स्वप्रेरण एवं अन्योन्य प्रेरण में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर :- किसी कुंडली से प्रवाहित धारा को परिवर्तित करने पर स्वयं उसी कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल तथा प्रेरित विद्युत धारा को उत्पन्न होने की घटना को स्वप्रेरण कहा जाता है।
जबकि एक कुंडली में धारा के परिवर्तन के कारण दूसरी कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होने की घटना को अन्योन्य प्रेरण कहा जाता है।
27. समझावें कि किरचॉफ का द्वितीय नियम ऊर्जा संरक्षण का नियम है
उत्तर :- क्रिचॉफ का दूसरा नियम ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत पर आधारित है। हम जानते है कि प्रति एकांक आवेश के ऊर्जा से वोल्टेज (विभव) परिभाषित होता है। अतः प्रति एकांक आवेश के ऊर्जा में वृद्धि प्रति एकांक आवेश द्वारा खपत ऊर्जा के बराबर होता है। अर्थात् बंद परिपथ में आरोपित वोल्टेज का मान सभी प्रतिरोधकों के परितः विभवांतर के बराबर होता है एवं साथ ही आरोपित विभवांतर हमेशा खपत वोल्टेज के बराबर होता है।
अतः यह नियम ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत पर आधारित है।
28. स्थायी चुम्बक एवं विद्युत चुम्बक में अंतर स्पष्ट करें।
उत्तर :- स्थायी चुम्बक → जो चुम्बक कमरे के ताप पर अपना चुम्बकत्व दीर्घ काल के लिए बनाए रखते हैं, स्थायी चुम्बक कहलाते हैं। स्थायी चुम्बकों के लिए उपयुक्त लौह चुम्बकीय पदार्थों की धारणशीलता तथा निग्राहिता अधिक होनी चाहिए।
विद्युत चुम्बक → विद्युत चुम्बक ऐसे लौह चुम्बकीय पदार्थों के बनाये जाते हैं जिनकी चुम्बकशीलता अति उच्च चुम्बकीय धारणशीलता तथा निग्राहिता बहुत कम होती है।
नर्म लोहे की क्रोडयुक्त परिनालिका को विद्युत चुम्बक कहा जाता है।
29. चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ क्या है ? इसके दो गुणों को लिखें।
उत्तर :- चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ → चुम्बकीय क्षेत्र में चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ वैसे संतत काल्पनिक बंद वक्र हैं जो चुम्बक के उत्तरी ध्रुव से निकलकर उसके दक्षिणी ध्रुव तक जाते हैं।
गुणः
(i) चुम्बकीय क्षेत्र रेखाएँ एक-दूसरे को कभी नहीं काटती है।
(ii) चुम्बकीय क्षेत्र रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर चुम्बकीय क्षेत्र की दिशा को निरूपित करती है।
30. x किरण के उत्पत्ति को बताएँ एवं इसके गुणों को लिखें।
उत्तर :- तीव्र गति से चलते हुए इलेक्ट्रॉन को अचानक मंदित करने पर एवं परमाणुओं के कक्षीय इलेक्ट्रॉन के संक्रमण के क्रम में ऊर्जा परिवर्तन से 'x' किरण उत्पन्न होता है।
गुणः
(i) 'x' किरण की वेधन क्षमता गामा किरण से कम होती है।
(ii) गैसों को आयनीकृत कर देते हैं।
उपयोग:-
(i) x किरणों द्वारा क्रिस्टलों की और उनके इलेक्ट्रॉनों की कक्षाओं की जानकारी मिलती है।
(ii) इन किरणों का उपयोग चिकित्सीय जाँच में, जासूसी विभाग में किया जाता है।
31. लेसर प्रकाश के गुणों एवं उपयोगों को लिखें।
उत्तर :- लेजर प्रकाश के गुण
(i) लेजर प्रकाश एकवर्णी होता है।
(ii) ये अति कला सम्बंध होता है।
(iii) ये अति दिशात्मक होता है।
उपयोग:
(i) हीरे में छोटे छिद्र करने में,
(ii) चिकित्सा विज्ञान में इत्यादि ।
32. नाभिकीय रिएक्टर क्या है? इसके दो उपयोग दें।
उत्तर :- नाभिकीय रिएक्टर एक यंत्र है जिसमें नाभिकीय विखंडन की नियंत्रित श्रृंखला प्रतिक्रिया के द्वारा ऊर्जा उत्पन्न की जाती है।
उपयोग :
(i) इसके द्वारा अनेक तत्वों के रेडियो आइसोटोप बनाए जाते हैं।
(ii) इसके द्वारा विद्युत शक्ति उत्पन्न की जाती है।
33. विभवमापीको परिभाषित करें।
उत्तर :- विभावमाथी एक ऐसी व्यवस्था है जिसकी सहायता से वार के दोनों सिरों के बीच के विभावतर को मापा जाता है विभावंत की सहायता से दो खेलों के विद्युत वाहक बल की तुलना की जाती है तथा सेतों के आंतरिक प्रतिरोध को ज्ञात किया जाता है
34. धारा का उष्मीय प्रभाव है।
उत्तर :- जब किसी तार से धारा प्रवाहित की जाती है तो तर गर्म हो जाता है पानि कि विद्युतीय उर्जा का रूपांतर उष्मीय उर्जा में होता है। धारा के इस रूप या प्रभाव को धारा का उनी प्रभाव कहा जाता है।
35. अनुगमन वेग क्या है।
उत्तर :- विधुतीय क्षेत्र के प्रभाव के कारण चालक के अंदर उपस्थित इलेक्ट्रॉन विधुतीय क्षेत्र के विपरीत दिशा में एक नियत औसत वेग से गमन करता है। इसे अनुगमन वेग कहा जाता है।
36. ऑस्टैंड के प्रयोग को लिखे।
उत्तर :- ओस्टैंड ने पाया की जब किसी तार से धारा प्रवाहित की जाती है तो तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है और यह चुंबकीय क्षेत्र तब तक रहता है जब तक की तार से धारा प्रवाहित रहती है. धारा के इस प्रभाव को धारा का चुंबकीय प्रभाव कहा जाता है तथा इस प्रयोग को ओस्टैंड का प्रयोग कहा जाता है।
37. चालक की धारिता क्या है।
उत्तर :- जब किसी चालक को आदेश दिया जाता है तो चालक के सह पर विभव का मान बढ़ता है। चालक के सतह पर विभव में हुआ वृद्धि चालक को दिए गए आवेश का समानुपाती होता है। इसे ही की धारिता विद्युत धारिता कहा जाता है।
38. धारा घनत्व को परिभाषित करे।
उत्तर :- प्रति एकांक अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल से प्रवाहित धारा को धारा घनत्व कहा जाता है।
39. किरचॉफ के नियम को लिखें।
उत्तर :- किरचॉफ ने दो नियम दिये थे।
(i) किसी भी बिंदु पर मिलने वाली सभी धाराओं का बीजीय योगशून्य होता है । बिद्र के तरफ आने वाली धारा को धन तथा बि से दूर जाने वाली धारा को ऋणात्मक तो जाती है।
(ii) प्रतिरोध तथा सेतों के सम्मिलित बंद विधुतीय परिपथ में सभी विभावत का बीजीय योग शून्य होता है इसे ही हम का द्वितीय नियम कहते है इसे किरचॉक का नियम भी कहा जाता है।
40. चालक की धारिता को प्रभावित करने वाले कारको को लिखें।
उत्तर :- चालक की धारिता को प्रभावित करने वाले कारक निम्न
(i) चालक के सतह का क्षेत्रफल:- चालक के सतह क्षेत्रफल को बढ़ाने से विभव का मान घटता और चालक का मान बढ़ता है।
(ii) चालक के निकट दूसरे चालक की उपस्थिति किसी आवेशित चालक के सतह पर विभव का मान घटता है तथा चालक की धारिता बढ़ती है।
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