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Question 1
5 / -1
Directions For Questions
निर्देशः एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पाँच प्रश्न दिये गये है। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्पों में से सही विकल्प चुने।
हमारे देश में अनेक जटिल समस्याएँ है जो देश के विकास में अवरोध उत्पन्न करती हैं। जनसंख्या वृद्धि भी देश की इन्हीं जटिल समस्याओं में से एक है। संपूर्ण विश्व में चीन के पश्चात् भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। परंतु जिस गति से हमारे देश की जनसंख्या बढ़ रही है, वो दिन भी दूर नहीं जब हमारे देश की जनसंख्या चीन से भी अधिक हो जाएगी। हमारी जनसंख्या वृद्धि की दर का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् मात्र पाँच दशकों में यह 33 करोड़ से 400 करोड़ के आँकड़े को पार कर गई है। देश में जनसंख्या वृद्धि के अनेकों कारण हैं। इसके अतिरिक्त निर्धनता, अशिक्षा, रूढ़िवादिता तथा संकीर्ण विचार आदि जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। देश मे बाल-विवाह की पंरपरा प्राचीन काल से थी, जिसके फलस्वरूप भी जनसंख्या में वृद्धि हुई थी। शिक्षा का अभाव भी जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण हैं। देश में जनसंख्या वृद्धि की समस्या आज अत्यंत भयावह स्थिति में है जिसके फलस्वरूप देश को अनेक प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। देश में उपलब्ध संसाधनों की तुलना में जनसंख्या अधिक होने का दुष्परिणाम यह है कि स्वतंत्रता के पाँच दशकों बाद भी लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है। इन लोगों को अपनी आम भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। देश में बहुत से बच्चे कुपोषण के शिकार हैं जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि एक स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार रूप देना कितना दुष्कर कार्य है।
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किसका अभाव जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारण माना गया है?
Solution
'शिक्षा' का अभाव जनसंख्या वृद्धि का प्रमुख कारण माना गया है।
गद्यांश में आया हुआ उल्लेख:- देश मे बाल-विवाह की परम्परा प्राचीन काल से थी, जिसके फलस्वरूप भी जनसंख्या में वृद्धि हुई थी। शिक्षा का अभाव भी जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण हैं।
Key Pointsअन्य विकल्प:- भूखमरी - भूख से मरने की अवस्था।
- स्वस्थ - नीरोग, तंदुरुस्त।
- कुपोषण - शरीर के लिए आवश्यक सन्तुलित आहार लम्बे समय तक नहीं मिलना ही कुपोषण है।
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Question 2
5 / -1
Directions For Questions
निर्देशः एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पाँच प्रश्न दिये गये है। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्पों में से सही विकल्प चुने।
हमारे देश में अनेक जटिल समस्याएँ है जो देश के विकास में अवरोध उत्पन्न करती हैं। जनसंख्या वृद्धि भी देश की इन्हीं जटिल समस्याओं में से एक है। संपूर्ण विश्व में चीन के पश्चात् भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। परंतु जिस गति से हमारे देश की जनसंख्या बढ़ रही है, वो दिन भी दूर नहीं जब हमारे देश की जनसंख्या चीन से भी अधिक हो जाएगी। हमारी जनसंख्या वृद्धि की दर का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् मात्र पाँच दशकों में यह 33 करोड़ से 400 करोड़ के आँकड़े को पार कर गई है। देश में जनसंख्या वृद्धि के अनेकों कारण हैं। इसके अतिरिक्त निर्धनता, अशिक्षा, रूढ़िवादिता तथा संकीर्ण विचार आदि जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। देश मे बाल-विवाह की पंरपरा प्राचीन काल से थी, जिसके फलस्वरूप भी जनसंख्या में वृद्धि हुई थी। शिक्षा का अभाव भी जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण हैं। देश में जनसंख्या वृद्धि की समस्या आज अत्यंत भयावह स्थिति में है जिसके फलस्वरूप देश को अनेक प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। देश में उपलब्ध संसाधनों की तुलना में जनसंख्या अधिक होने का दुष्परिणाम यह है कि स्वतंत्रता के पाँच दशकों बाद भी लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है। इन लोगों को अपनी आम भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। देश में बहुत से बच्चे कुपोषण के शिकार हैं जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि एक स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार रूप देना कितना दुष्कर कार्य है।
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उपर्युक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक क्या होगा?
Solution
उपयुक्त गद्यांश में 'जनसंख्या के बारे में विस्तृत रूप से समझाया गया है, अतः
'जनसंख्या वृद्धि : एक जटिल समस्या' उचित शीर्षक है।
Key Pointsअन्य विकल्प:- जनसँख्या वृद्धि: एक लाभ - जनसंख्या होने से देश के काम - काज में मदद होती है।
- जनसंख्या वृद्धि : भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति - इससे भौतिक आवश्यकता का प्रबन्धन हो जाता है।
- जनसँख्या वृद्धि: शिक्षा का अभाव - शिक्षा न मिलने से जनसंख्या नियंत्रण कठिन हो जाता है।
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Question 3
5 / -1
Directions For Questions
निर्देशः एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पाँच प्रश्न दिये गये है। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्पों में से सही विकल्प चुने।
हमारे देश में अनेक जटिल समस्याएँ है जो देश के विकास में अवरोध उत्पन्न करती हैं। जनसंख्या वृद्धि भी देश की इन्हीं जटिल समस्याओं में से एक है। संपूर्ण विश्व में चीन के पश्चात् भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। परंतु जिस गति से हमारे देश की जनसंख्या बढ़ रही है, वो दिन भी दूर नहीं जब हमारे देश की जनसंख्या चीन से भी अधिक हो जाएगी। हमारी जनसंख्या वृद्धि की दर का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् मात्र पाँच दशकों में यह 33 करोड़ से 400 करोड़ के आँकड़े को पार कर गई है। देश में जनसंख्या वृद्धि के अनेकों कारण हैं। इसके अतिरिक्त निर्धनता, अशिक्षा, रूढ़िवादिता तथा संकीर्ण विचार आदि जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। देश मे बाल-विवाह की पंरपरा प्राचीन काल से थी, जिसके फलस्वरूप भी जनसंख्या में वृद्धि हुई थी। शिक्षा का अभाव भी जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण हैं। देश में जनसंख्या वृद्धि की समस्या आज अत्यंत भयावह स्थिति में है जिसके फलस्वरूप देश को अनेक प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। देश में उपलब्ध संसाधनों की तुलना में जनसंख्या अधिक होने का दुष्परिणाम यह है कि स्वतंत्रता के पाँच दशकों बाद भी लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है। इन लोगों को अपनी आम भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। देश में बहुत से बच्चे कुपोषण के शिकार हैं जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि एक स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार रूप देना कितना दुष्कर कार्य है।
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संपूर्ण विश्व में किस देश की सर्वाधिक जनसंख्या है?
Solution
सम्पूर्ण विश्व में
'चीन' देश की सबसे ज्यादा जनसंख्या है।
जनसँख्या का अर्थ - लोगो की जनगणना।
Key Pointsअन्य विकल्प:- जापान - यह तकनीकी में प्रगत देश माना जाता है।
- फ्रांस - यह यूरोप महाद्वीप का एक देश है।
- भारत - यह तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ देश है।
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Question 4
5 / -1
Directions For Questions
निर्देशः एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पाँच प्रश्न दिये गये है। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्पों में से सही विकल्प चुने।
हमारे देश में अनेक जटिल समस्याएँ है जो देश के विकास में अवरोध उत्पन्न करती हैं। जनसंख्या वृद्धि भी देश की इन्हीं जटिल समस्याओं में से एक है। संपूर्ण विश्व में चीन के पश्चात् भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। परंतु जिस गति से हमारे देश की जनसंख्या बढ़ रही है, वो दिन भी दूर नहीं जब हमारे देश की जनसंख्या चीन से भी अधिक हो जाएगी। हमारी जनसंख्या वृद्धि की दर का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् मात्र पाँच दशकों में यह 33 करोड़ से 400 करोड़ के आँकड़े को पार कर गई है। देश में जनसंख्या वृद्धि के अनेकों कारण हैं। इसके अतिरिक्त निर्धनता, अशिक्षा, रूढ़िवादिता तथा संकीर्ण विचार आदि जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। देश मे बाल-विवाह की पंरपरा प्राचीन काल से थी, जिसके फलस्वरूप भी जनसंख्या में वृद्धि हुई थी। शिक्षा का अभाव भी जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण हैं। देश में जनसंख्या वृद्धि की समस्या आज अत्यंत भयावह स्थिति में है जिसके फलस्वरूप देश को अनेक प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। देश में उपलब्ध संसाधनों की तुलना में जनसंख्या अधिक होने का दुष्परिणाम यह है कि स्वतंत्रता के पाँच दशकों बाद भी लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है। इन लोगों को अपनी आम भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। देश में बहुत से बच्चे कुपोषण के शिकार हैं जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि एक स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार रूप देना कितना दुष्कर कार्य है।
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कितनी प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है?
Solution
'40' प्रतिशत जनसँख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही है।
Key Points गद्यांश में आया हुआ उल्लेख:- देश में उपलब्ध संसाधनों की तुलना में जनसंख्या अधिक होने का दुष्परिणाम यह है कि स्वतंत्रता के पाँच दशकों बाद भी लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है।
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Question 5
5 / -1
Directions For Questions
निर्देशः एक गद्यांश दिया गया है। गद्यांश के आधार पाँच प्रश्न दिये गये है। गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें तथा प्रत्येक प्रश्न में चार विकल्पों में से सही विकल्प चुने।
हमारे देश में अनेक जटिल समस्याएँ है जो देश के विकास में अवरोध उत्पन्न करती हैं। जनसंख्या वृद्धि भी देश की इन्हीं जटिल समस्याओं में से एक है। संपूर्ण विश्व में चीन के पश्चात् भारत सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है। परंतु जिस गति से हमारे देश की जनसंख्या बढ़ रही है, वो दिन भी दूर नहीं जब हमारे देश की जनसंख्या चीन से भी अधिक हो जाएगी। हमारी जनसंख्या वृद्धि की दर का इसी से अनुमान लगाया जा सकता है कि स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् मात्र पाँच दशकों में यह 33 करोड़ से 400 करोड़ के आँकड़े को पार कर गई है। देश में जनसंख्या वृद्धि के अनेकों कारण हैं। इसके अतिरिक्त निर्धनता, अशिक्षा, रूढ़िवादिता तथा संकीर्ण विचार आदि जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। देश मे बाल-विवाह की पंरपरा प्राचीन काल से थी, जिसके फलस्वरूप भी जनसंख्या में वृद्धि हुई थी। शिक्षा का अभाव भी जनसंख्या वृद्धि का एक प्रमुख कारण हैं। देश में जनसंख्या वृद्धि की समस्या आज अत्यंत भयावह स्थिति में है जिसके फलस्वरूप देश को अनेक प्रकार की कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है। देश में उपलब्ध संसाधनों की तुलना में जनसंख्या अधिक होने का दुष्परिणाम यह है कि स्वतंत्रता के पाँच दशकों बाद भी लगभग 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे जीवन-यापन कर रही है। इन लोगों को अपनी आम भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है। देश में बहुत से बच्चे कुपोषण के शिकार हैं जिससे अनुमान लगाया जा सकता है कि एक स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार रूप देना कितना दुष्कर कार्य है।
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हमारे देश की जटिल समस्या क्या है, जो देश के विकास में अवरोध उत्पन्न करती है?
Solution
हमारे देश की जटिल समस्या
'जनसँख्या' है, जो देश के विकास में अवरोध उत्पन्न करती है।
Key Pointsअन्य विकल्प:- संघर्ष: टकराव, या स्ट्रगल।
- गरीबी: गरीबी उस समस्या को कहते हैं जिसमें व्यक्ति अपने जीवन की मूलभूत आवश्यकताएँ यथा, रोटी, कपड़ा और मकान को पूरा करने में असमर्थ होता है।
- शिक्षा: विद्या या ज्ञान।
-
Question 6
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पड़ोस में एक महानुभाव रहते हैं, जिनको लोग भगत जी कहते हैं। चूरन बेचते हैं। यह काम करते, जाने उन्हें कितने बरस हो गए हैं। लेकिन किसी एक भी दिन चूरन से उन्होंने छः आने से ज्यादा पैसे नहीं कमाए। चूरन उनका आस-पास सरनाम है और खुद खूब लोकप्रिय हैं। कहीं व्यवसाय का गुर पकड़ लेते और उस पर चलते तो आज खुशहाल क्या, मालामाल होते! क्या कुछ उनके पास न होता ! इधर दस वर्षों से मैं देख रहा हूँ, उनका चूरन हाथों-हाथ बिक जाता है। पर वह न उसे थोक में देते हैं, न व्यापारियों को बेचते हैं। पेशगी ऑर्डर कोई नहीं लेते। बँधे वक्त पर अपनी चूरन की पेटी लेकर घर से बाहर हुए नहीं कि देखते-देखते छः आने की कमाई उनकी हो जाती है। लोग उनका चूरन लेने को उत्सुक जो रहते हैं। चूरन से भी अधिक शायद वह भगत जी के प्रति अपनी सद्भावना का देय देने को उत्सुक रहते हैं। पर छ: आने पूरे हुए नहीं कि भगत जी बाकी चूरन बालकों को मुफ़्त बाँट देते हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई उन्हें पच्चीसवाँ पैसा भी दे सके। कभी चूरन में लापरवाही में नहीं हुई और कभी रोग होता भी मैंने उन्हें नहीं देखा है।
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प्रस्तुत गद्यांश किस पाठ से लिया गया है?
Solution
प्रस्तुत गद्यांश 'बाज़ार दर्शन' पाठ से लिया गया है।
Key Points
- इस पाठ के लेखक जैनेंद्र कुमार हैं।
- इसमें उन्होंने बाजार के आत्यंतिक ग्राहकों को लूटने के उद्देश्य को प्रदर्शित किया है।
- तथा बताया गया है कि किस तरह उपभोक्ता बाजार में जाने के बाद व वस्तुओं को खरीदने के पश्चात स्वयं को ठगा हुआ महसूस करता है।
Additional Informationआत्यंतिक
उद्देश्य
- विशेषण
- संकेत किए जाने योग्य।
- अभिप्रायः योग्य।
- पुल्लिंग
- व्याकरण
-
Question 7
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पड़ोस में एक महानुभाव रहते हैं, जिनको लोग भगत जी कहते हैं। चूरन बेचते हैं। यह काम करते, जाने उन्हें कितने बरस हो गए हैं। लेकिन किसी एक भी दिन चूरन से उन्होंने छः आने से ज्यादा पैसे नहीं कमाए। चूरन उनका आस-पास सरनाम है और खुद खूब लोकप्रिय हैं। कहीं व्यवसाय का गुर पकड़ लेते और उस पर चलते तो आज खुशहाल क्या, मालामाल होते! क्या कुछ उनके पास न होता ! इधर दस वर्षों से मैं देख रहा हूँ, उनका चूरन हाथों-हाथ बिक जाता है। पर वह न उसे थोक में देते हैं, न व्यापारियों को बेचते हैं। पेशगी ऑर्डर कोई नहीं लेते। बँधे वक्त पर अपनी चूरन की पेटी लेकर घर से बाहर हुए नहीं कि देखते-देखते छः आने की कमाई उनकी हो जाती है। लोग उनका चूरन लेने को उत्सुक जो रहते हैं। चूरन से भी अधिक शायद वह भगत जी के प्रति अपनी सद्भावना का देय देने को उत्सुक रहते हैं। पर छ: आने पूरे हुए नहीं कि भगत जी बाकी चूरन बालकों को मुफ़्त बाँट देते हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई उन्हें पच्चीसवाँ पैसा भी दे सके। कभी चूरन में लापरवाही में नहीं हुई और कभी रोग होता भी मैंने उन्हें नहीं देखा है।
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चूरन बेचने वाले का स्वभाव कैसा था?
Solution
चूरन बेचने वाले का स्वभाव 'संतोषी' था।
Key Points
- चूरन बेचने वाले का नाम भगत था तथा उसका रोज का लक्ष्य मात्र छः आना कमाना ही था।
- जैसे ही उसे अपने लक्ष्य की प्राप्ति हो जाती वह बाकी के शेष चूरन को मुफ्त में बच्चों में बाँट देता था।
- यानी वह रोज़ का छः आना प्राप्त करके संतुष्ट था।
- अतः इस वजह से उसका स्वभाव संतोषी था।
Additional Informationसंतोषी
संतुष्ट
- विशेषण
- संतोष किया गया।
- राजी किया गया।
स्वार्थी
स्वार्थी
- विशेषण
- स्वार्थ की सिद्धि चाहनेवाला।
- खुदगरज़।
-
Question 8
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पड़ोस में एक महानुभाव रहते हैं, जिनको लोग भगत जी कहते हैं। चूरन बेचते हैं। यह काम करते, जाने उन्हें कितने बरस हो गए हैं। लेकिन किसी एक भी दिन चूरन से उन्होंने छः आने से ज्यादा पैसे नहीं कमाए। चूरन उनका आस-पास सरनाम है और खुद खूब लोकप्रिय हैं। कहीं व्यवसाय का गुर पकड़ लेते और उस पर चलते तो आज खुशहाल क्या, मालामाल होते! क्या कुछ उनके पास न होता ! इधर दस वर्षों से मैं देख रहा हूँ, उनका चूरन हाथों-हाथ बिक जाता है। पर वह न उसे थोक में देते हैं, न व्यापारियों को बेचते हैं। पेशगी ऑर्डर कोई नहीं लेते। बँधे वक्त पर अपनी चूरन की पेटी लेकर घर से बाहर हुए नहीं कि देखते-देखते छः आने की कमाई उनकी हो जाती है। लोग उनका चूरन लेने को उत्सुक जो रहते हैं। चूरन से भी अधिक शायद वह भगत जी के प्रति अपनी सद्भावना का देय देने को उत्सुक रहते हैं। पर छ: आने पूरे हुए नहीं कि भगत जी बाकी चूरन बालकों को मुफ़्त बाँट देते हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई उन्हें पच्चीसवाँ पैसा भी दे सके। कभी चूरन में लापरवाही में नहीं हुई और कभी रोग होता भी मैंने उन्हें नहीं देखा है।
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चूरन शीघ्र बिक जाने का क्या कारण था?
Solution
चूरन शीघ्र बिक जाने का कारण 'चूरन की गुणवत्ता' है।
Key Points
- अर्थात् चूरन अच्छा होने की वजह से जल्दी बिक जाता था।
- तथा उन्हें कहीं व्यापारियों द्वारा बड़े आर्डर भी पेश किए गए लेकिन उन्होंने स्वीकार नहीं किए।
Additional Informationगुणवत्ता का अर्थ-
- विशिष्टता या गुण संबंधी उत्कृष्टता।
मूल्य का पर्यायवाची शब्द-
- कीमत, दाम, लागता, दर, भाव।
शीघ्र
- अव्यय
- बिना विलंब किए।
- तुरंत, तत्क्षण।
-
Question 9
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पड़ोस में एक महानुभाव रहते हैं, जिनको लोग भगत जी कहते हैं। चूरन बेचते हैं। यह काम करते, जाने उन्हें कितने बरस हो गए हैं। लेकिन किसी एक भी दिन चूरन से उन्होंने छः आने से ज्यादा पैसे नहीं कमाए। चूरन उनका आस-पास सरनाम है और खुद खूब लोकप्रिय हैं। कहीं व्यवसाय का गुर पकड़ लेते और उस पर चलते तो आज खुशहाल क्या, मालामाल होते! क्या कुछ उनके पास न होता ! इधर दस वर्षों से मैं देख रहा हूँ, उनका चूरन हाथों-हाथ बिक जाता है। पर वह न उसे थोक में देते हैं, न व्यापारियों को बेचते हैं। पेशगी ऑर्डर कोई नहीं लेते। बँधे वक्त पर अपनी चूरन की पेटी लेकर घर से बाहर हुए नहीं कि देखते-देखते छः आने की कमाई उनकी हो जाती है। लोग उनका चूरन लेने को उत्सुक जो रहते हैं। चूरन से भी अधिक शायद वह भगत जी के प्रति अपनी सद्भावना का देय देने को उत्सुक रहते हैं। पर छ: आने पूरे हुए नहीं कि भगत जी बाकी चूरन बालकों को मुफ़्त बाँट देते हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई उन्हें पच्चीसवाँ पैसा भी दे सके। कभी चूरन में लापरवाही में नहीं हुई और कभी रोग होता भी मैंने उन्हें नहीं देखा है।
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चूरन खरीदने वालों की उत्सुकता का क्या कारण बताया गया है?
Solution
चूरन खरीदने वालों की उत्सुकता का कारण 'भगत जी के प्रति उनकी सद्भावना' बताया गया है।
Key Points
- अर्थात् लोग भगत जी के प्रति सद्भावना रखते थे जिस वजह से वह उनसे चूरन खरीदने के लिए उत्सुक रहते थे।
- क्योंकि भगत जी छः आना कमाने के बाद शेष सभी चूरन मुफ्त में बच्चों में बांट देते थे।
Additional Informationसद्भावना
- स्त्रीलिंग
- हित की भावना।
- छल–कपट आदि से रहित विचार।
सद्भावना
उत्सुक
-
Question 10
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पड़ोस में एक महानुभाव रहते हैं, जिनको लोग भगत जी कहते हैं। चूरन बेचते हैं। यह काम करते, जाने उन्हें कितने बरस हो गए हैं। लेकिन किसी एक भी दिन चूरन से उन्होंने छः आने से ज्यादा पैसे नहीं कमाए। चूरन उनका आस-पास सरनाम है और खुद खूब लोकप्रिय हैं। कहीं व्यवसाय का गुर पकड़ लेते और उस पर चलते तो आज खुशहाल क्या, मालामाल होते! क्या कुछ उनके पास न होता ! इधर दस वर्षों से मैं देख रहा हूँ, उनका चूरन हाथों-हाथ बिक जाता है। पर वह न उसे थोक में देते हैं, न व्यापारियों को बेचते हैं। पेशगी ऑर्डर कोई नहीं लेते। बँधे वक्त पर अपनी चूरन की पेटी लेकर घर से बाहर हुए नहीं कि देखते-देखते छः आने की कमाई उनकी हो जाती है। लोग उनका चूरन लेने को उत्सुक जो रहते हैं। चूरन से भी अधिक शायद वह भगत जी के प्रति अपनी सद्भावना का देय देने को उत्सुक रहते हैं। पर छ: आने पूरे हुए नहीं कि भगत जी बाकी चूरन बालकों को मुफ़्त बाँट देते हैं। कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई उन्हें पच्चीसवाँ पैसा भी दे सके। कभी चूरन में लापरवाही में नहीं हुई और कभी रोग होता भी मैंने उन्हें नहीं देखा है।
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भगत जी सदैव किस नियम पर डटे रहते थे?
Solution
भगत जी सदैव 'छः आने से अधिक का चूरन न बेचने के नियम' पर डटे रहते थे।
Key Points
- उनका रोज का लक्ष्य है सिर्फ छः आना कमाना ही होता है।
- वह इतने में ही संतुष्ट हो जाते हैं।
Additional Informationनियम
- पुल्लिंग
- विधान के अनुरूप नियंत्रण
- स्थायी कार्यक्रम अनिश्चित व्यवस्था।
आना
- एक रुपये में 16 आने होते है।
- एक आने में 6.25 पैसे होते है।
-
Question 11
5 / -1
Directions For Questions
नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
कथा-साहित्य में जो स्थान कहानी का है, वही रूपक के क्षेत्र में एकांकी का। रामकुमार वर्मा, उपेंद्रनाथ अश्क, भुवनेश्वर आदि ने एकांकी साहित्य की श्री वृद्धि की। रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित एक तोले अफीम की कीमत, दस मिनट, स्वर्ग का कमरा आदि प्रसिद्ध एकांकी हैं। अश्क ने चरवाहे, लक्ष्मी का स्वागत, सूखी डाली, पहेली आदि लिखे। भुवनेश्वर के अधिकांश एकांकी विकृत स्थितियों को लेकर लिखे गए हैंI स्ट्राइक प्रतिभा का विवाह उनके उल्लेखनीय एकांकी हैं। एकांकी विधा की उपयोगिता रेडियो का प्रचार होने के बाद और बढ़ी क्योंकि वहाँ निश्चित समय में ही संवाद और ध्वनि के द्वारा नाटक पूरा कर देना होता है।
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'स्ट्राइक' के एकांकीकार कौन हैं?
Solution
स्ट्राइक के एकांकीकार भुवनेश्वर हैंI
- स्ट्राइक (1938 ई.)- एकांकी में स्त्री और पुरुष वैवाहिक सम्बन्ध को प्रस्तुत किया गया है।
- मुख्यपात्र- श्रीचंद (पति) ,स्त्री (पत्नी), तीन युवक ( एक, दो, तीन)
Key Points
- भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव हिन्दी के प्रसिद्ध एकांकीकार, लेखक एवं कवि थे।
- उन्होंने मध्य वर्ग की विडंबनाओं को कटु सत्य के प्रतिरूप में उकेरा।
- उन्हें आधुनिक एकांकियों के जनक होने का गौरव भी प्राप्त है।
Important Points
| पूरा नाम | भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव |
| जन्म | 20 जून, 1910 |
| जन्म भूमि | शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश |
| कर्म-क्षेत्र | एकांकीकार, कहानीकार, आलोचक, कवि |
| भाषा | हिंदी |
| मृत्यु | 1957 |
| मृत्यु स्थान | लखनऊ, उत्तर प्रदेश |
कुछ प्रमुख रचनाएं- - ताम्बे के कीड़े
- पतित (शैतान)
- प्रतिभा का विवाह
- श्यामा : एक वैवाहिक विडंबना
- कारवां (एकांकी)
- 'ऊसर' के नामहीन चरित्र (एकांकी)
|
Additional Information
अश्क:- - अश्क का पूरा नाम उपेंद्र नाथ अश्क था।
- वह हिंदी और उर्दू के एक प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
- जिनका जन्म पंजाब के जालंधर में 14 दिसंबर 1910 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
- उनकी मृत्यु 19 जनवरी 1996 को हुई।
- उन्होंने हिंदी-उर्दू में अनेक उपन्यास, कहानियाँ, कवितायें आदि की रचना की।
प्रमुख रचनाएं- - गिरती दीवारें
- पिंजरा
- अन्धी गली
- जय-पराजय आदि
जयशंकर प्रसाद:- - महान लेखक और कवि जयशंकर प्रसाद का जन्म – सन् 1889 ई. में हुआ तथा मृत्यु – सन् 1037 ई में हुई।
- बहुमुखी प्रतिभा के धनी जयशंकर प्रसाद का जन्म वाराणसी के एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था।
- बचपन में ही पिता के निधन से पारिवारिक उत्तरदायित्व का बोझ इनके कधों पर आ गया।
प्रमुख रचनाएं- - झरना
- आँसू
- लहर
- कामायनी
- प्रेम पथिक
राम कुमार वर्मा:- - डॉ राम कुमार वर्मा (15 सितम्बर, 1905 - 1990) हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार और हास्य कवि के रूप में जाने जाते हैं।
- उन्हें हिन्दी एकांकी का जनक माना जाता है।
- उन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन 1963 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
- इनके काव्य में 'रहस्यवाद' और 'छायावाद' की झलक है।
मुख्य रचनाएँ- - अंजलि
- अभिशाप
- निशीथ
- जौहर
- चित्तौड़ की चिता आदि।
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Question 12
5 / -1
Directions For Questions
नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
कथा-साहित्य में जो स्थान कहानी का है, वही रूपक के क्षेत्र में एकांकी का। रामकुमार वर्मा, उपेंद्रनाथ अश्क, भुवनेश्वर आदि ने एकांकी साहित्य की श्री वृद्धि की। रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित एक तोले अफीम की कीमत, दस मिनट, स्वर्ग का कमरा आदि प्रसिद्ध एकांकी हैं। अश्क ने चरवाहे, लक्ष्मी का स्वागत, सूखी डाली, पहेली आदि लिखे। भुवनेश्वर के अधिकांश एकांकी विकृत स्थितियों को लेकर लिखे गए हैंI स्ट्राइक प्रतिभा का विवाह उनके उल्लेखनीय एकांकी हैं। एकांकी विधा की उपयोगिता रेडियो का प्रचार होने के बाद और बढ़ी क्योंकि वहाँ निश्चित समय में ही संवाद और ध्वनि के द्वारा नाटक पूरा कर देना होता है।
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निम्नलिखित में कौन सी एकांकी अश्क की नहीं है?
Solution
चरवाहे,लक्ष्मी का स्वागत,पहेली, अन्धी गली, मुखड़ा बदल गया आदि एकांकी अश्क की है।
- प्रतिभा का विवाह,कारवां, स्ट्राइक, ऊसर आदि एकांकी भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव की है।
Key Points
- अश्क का पूरा नाम उपेंद्र नाथ अश्क था।
- वह हिंदी और उर्दू के एक प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
Important Pointsपरिचय:-
| जन्म | 14 दिसम्बर 1910 (जालंधर, पंजाब) |
| मृत्यु | 19 जनवरी 1996 (प्रयागराज) |
| नागरिकता | ब्रिटिश राज, भारत |
| व्यवसाय | लेखक, नाटककार |
| पुरस्कार | संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार |
अन्य रचना:-
| उपन्यास | गिरती दीवारें, शहर में घूमता आईना, गर्म राख, सितारों के खेल, आदि |
| कहानी संग्रह | सत्तर श्रेष्ठ कहानियां, जुदाई की शाम के गीत, काले साहब, पिंजरा आदि |
| नाटक | लौटता हुआ दिन, बड़े खिलाड़ी , जय-पराजय, स्वर्ग की झलक, भँवर, अंजो दीदी। |
Additional Informationभुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव:-
- भुवनेश्वर प्रसाद श्रीवास्तव (1910-1957) हिन्दी के प्रसिद्ध एकांकीकार, लेखक एवं कवि थे।
- उन्होंने मध्य वर्ग की विडंबनाओं को कटु सत्य के प्रतिरूप में उकेरा।
- उन्हें आधुनिक एकांकियों के जनक होने का गौरव भी प्राप्त है।
-
Question 13
5 / -1
Directions For Questions
नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
कथा-साहित्य में जो स्थान कहानी का है, वही रूपक के क्षेत्र में एकांकी का। रामकुमार वर्मा, उपेंद्रनाथ अश्क, भुवनेश्वर आदि ने एकांकी साहित्य की श्री वृद्धि की। रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित एक तोले अफीम की कीमत, दस मिनट, स्वर्ग का कमरा आदि प्रसिद्ध एकांकी हैं। अश्क ने चरवाहे, लक्ष्मी का स्वागत, सूखी डाली, पहेली आदि लिखे। भुवनेश्वर के अधिकांश एकांकी विकृत स्थितियों को लेकर लिखे गए हैंI स्ट्राइक प्रतिभा का विवाह उनके उल्लेखनीय एकांकी हैं। एकांकी विधा की उपयोगिता रेडियो का प्रचार होने के बाद और बढ़ी क्योंकि वहाँ निश्चित समय में ही संवाद और ध्वनि के द्वारा नाटक पूरा कर देना होता है।
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निम्नलिखित में कौन सी एकांकी रामकुमार वर्मा की नहीं है?
Solution
दस मिनट, स्वर्ग का कमरा,एक तोले अफीम की कीमत, सप्त किरण, रजत रश्मि आदि एकांकी रामकुमार वर्मा की है।
- सूखी डाली, अन्धी गली, मुखड़ा बदल गया, चरवाहे आदि श्री उपेन्द्रनाथ 'अश्क' द्वारा रचित एकांकी है।
Key Points
- डॉ राम कुमार वर्मा हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, व्यंग्यकार और हास्य कवि के रूप में जाने जाते हैं।
- इन्हें हिन्दी एकांकी का जनक माना जाता है।
- इन्हें साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में सन 1963 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।
- इनके काव्य में 'रहस्यवाद' और 'छायावाद' की झलक है।
Important Points परिचय:-
| जन्म | 15 सितंबर, 1905 |
| जन्म भूमि | सागर ज़िला, मध्यप्रदेश |
| मृत्यु | 5 अक्टूबर, 1990 |
| पिता | श्री लक्ष्मी प्रसाद वर्मा |
| माता | श्रीमती राजरानी देवी |
| कर्म-क्षेत्र | साहित्य |
| भाषा | हिन्दी |
मुख्य रचनाएँ:- - अंजलि
- अभिशाप
- निशीथ
- जौहर
- चित्तौड़ की चिता आदि।
|
Additional Informationअश्क:-
- अश्क का पूरा नाम उपेंद्र नाथ अश्क था।
- वह हिंदी और उर्दू के एक प्रसिद्ध साहित्यकार थे।
- जिनका जन्म पंजाब के जालंधर में 14 दिसंबर 1910 को एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
- उनकी मृत्यु 19 जनवरी 1996 को हुई।
- उन्होंने हिंदी-उर्दू में अनेक उपन्यास, कहानियाँ, कवितायें आदि की रचना की।
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Question 14
5 / -1
Directions For Questions
नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
कथा-साहित्य में जो स्थान कहानी का है, वही रूपक के क्षेत्र में एकांकी का। रामकुमार वर्मा, उपेंद्रनाथ अश्क, भुवनेश्वर आदि ने एकांकी साहित्य की श्री वृद्धि की। रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित एक तोले अफीम की कीमत, दस मिनट, स्वर्ग का कमरा आदि प्रसिद्ध एकांकी हैं। अश्क ने चरवाहे, लक्ष्मी का स्वागत, सूखी डाली, पहेली आदि लिखे। भुवनेश्वर के अधिकांश एकांकी विकृत स्थितियों को लेकर लिखे गए हैंI स्ट्राइक प्रतिभा का विवाह उनके उल्लेखनीय एकांकी हैं। एकांकी विधा की उपयोगिता रेडियो का प्रचार होने के बाद और बढ़ी क्योंकि वहाँ निश्चित समय में ही संवाद और ध्वनि के द्वारा नाटक पूरा कर देना होता है।
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एकांकी विधा की उपयोगिता किसके बाद बढ़ी?
Solution
एकांकी विधा की उपयोगिता रेडियो बाद बढ़ी।
Key Points
- जब कोई नाटक एक अंक वाला होता है, तो उसे एकांकी कहा जाता है।
Important Points
रेडियो:- - एक प्रसिद्ध विद्युत यंत्र जिसमें बिना तार के सम्बन्ध के बहुत दूर से कही हुई बातें सुनाई देती हैं।
- एक प्रकार की तरंग।
- एक तरह का बेतार इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जिसका उपयोग वार्ता, संगीत, समाचार आदि के प्रसारण के लिए होता है।
इंटरनेट:- - विश्व स्तर पर ऐसा जुड़ा नेटवर्क सिस्टम है।
- जो की TCP/IP प्रोटोकॉल के उपयोग से एक कंप्यूटर से दूसरे कम्प्युटर के बीच विभिन्न प्रकार के मीडिया के माध्यम से सूचनाएँ, जानकारियाँ या डाटा का संचार या आदान-प्रदान के लिए उपयोग किया जाता है,“ इस नेटवर्क में कंप्यूटर सर्वर भी शामिल होते हैं।
समाचार पत्र:- - समाचार पत्र या अख़बार, समाचारो पर आधारित एक प्रकाशन है।
- जिसमें मुख्यत: सामयिक घटनायें, राजनीति, खेल-कूद, व्यक्तित्व, विज्ञापन इत्यादि जानकारियां सस्ते कागज पर छपी होती है।
- समाचार पत्र संचार के साधनो में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
टेलीविजन - दूरदर्शन या टेलीविज़न (संक्षेप मे , टीवी) एक ऐसी दूरसंचार प्रणाली है।
- जिसके द्वारा चलचित्र व ध्वनि को दो स्थानों के बीच प्रसारित व प्राप्त किया जा सके।
- यह शब्द दूरदर्शन सेट, दूरदर्शन कार्यक्रम तथा प्रसारण के लिये भी प्रयुक्त होता है।
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Question 15
5 / -1
Directions For Questions
नीचे दिये गए गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
कथा-साहित्य में जो स्थान कहानी का है, वही रूपक के क्षेत्र में एकांकी का। रामकुमार वर्मा, उपेंद्रनाथ अश्क, भुवनेश्वर आदि ने एकांकी साहित्य की श्री वृद्धि की। रामकुमार वर्मा द्वारा लिखित एक तोले अफीम की कीमत, दस मिनट, स्वर्ग का कमरा आदि प्रसिद्ध एकांकी हैं। अश्क ने चरवाहे, लक्ष्मी का स्वागत, सूखी डाली, पहेली आदि लिखे। भुवनेश्वर के अधिकांश एकांकी विकृत स्थितियों को लेकर लिखे गए हैंI स्ट्राइक प्रतिभा का विवाह उनके उल्लेखनीय एकांकी हैं। एकांकी विधा की उपयोगिता रेडियो का प्रचार होने के बाद और बढ़ी क्योंकि वहाँ निश्चित समय में ही संवाद और ध्वनि के द्वारा नाटक पूरा कर देना होता है।
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कथा साहित्य में जो स्थान कहानी का है, वही रूपक के क्षेत्र में किसका है?
Solution
कथा साहित्य में जो स्थान कहानी का है, वही रूपक के क्षेत्र में एकांकी है।
Key Points
- एक अंक वाले नाटकों को एकांकी कहते हैं।
- अंग्रेजी के 'वन ऐक्ट प्ले' शब्द के लिए हिंदी में 'एकांकी नाटक' और 'एकांकी' दोनों ही शब्दों का समान रूप से व्यवहार होता है।
Important Points
एकांकी:- - एकांकी प्रायः एक ही घटना या जीवन की एक ही संवेदना पर आधारित होती है।
- इसमें चरित्र पूर्ण विकसित होते हैं और इसमें कथा का विकास अत्यधिक तीव्र होता है।
- एकांकी में भाव, प्रभाव, तीव्रता, गत्यात्मकता, संकलन-त्रय की योजना अनिवार्य है।
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Additional Information
नाटक:- - नाटक, काव्य का एक रूप है (दृश्यकाव्य)।
- जो रचना श्रवण द्वारा ही नहीं अपितु दृष्टि द्वारा भी दर्शकों के हृदय में रसानुभूति कराती है उसे नाटक या दृश्य-काव्य कहते हैं।
- नाटक में श्रव्य काव्य से अधिक रमणीयता होती है।
- श्रव्य काव्य होने के कारण यह लोक चेतना से अपेक्षाकृत अधिक घनिष्ठ रूप से संबद्ध है।
- नाट्यशास्त्र में लोक चेतना को नाटक के लेखन और मंचन की मूल प्रेरणा माना गया है।
काव्यनाटक:- - काव्य-नाट्य, नाटक और काव्य की एक मिली-जुली विधा है।
- इसमें काव्य और नाटक दोनों के तत्वों का समन्वय रहता है।
- हिंदी में इस विधा को गीति-काव्य, काव्य-नाटक, दृश्य-काव्य आदि कई नामों से पुकारा जाता है।
रिपोर्ताज:- - रिपोर्ताज गद्य-लेखन की एक विधा है।
- रिपोर्ताज फ्रांसीसी भाषा का शब्द है।
- जिसका आशय हैं सरस एवं भावात्मक अंकन।
- रिपोर्ट अंग्रेजी भाषा का शब्द है।
- रिपोर्ट किसी घटना के यथातथ्य वर्णन को कहते हैं।
रिपोर्ट के रूप में घटनाओं का विवरण, क्रमिक घटना वर्णन से पूर्ण साहित्यिक रचना।
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Question 16
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पैसे की व्यंग्य-शक्ति की सुनिए। वह दारुण है। मैं पैदल चल रहा हूँ कि पास ही धूल उड़ाती निकल गई मोटर। वह क्या निकली मेरे कलेजे को कौंधती एक कठिन व्यंग्य की लीक ही आर-से-पार हो गई। जैसे किसी ने आँखों में उँगली देकर दिखा दिया हो कि देखो, उसका नाम है मोटर और तुम उससे वंचित हो ! यह मुझे अपनी ऐसी विडंबना मालूम होती है कि बस पूछिए नहीं। मैं सोचने को हो आता हूँ कि हाय, ये ही माँ-बाप रह गए थे जिनके यहाँ मैं जन्म लेने को था ! क्यों न मैं मोटरवालों के यहाँ हुआ! उस व्यंग्य में इतनी शक्ति है कि ज़रा में मुझे अपने सगों के प्रति कृतघ्न कर सकती है। लेकिन क्या लोक-वैभव की यह व्यंग्य-शक्ति उस चूरन वाले अकिंचित्कर मनुष्य के आगे चूर-चूर होकर ही नहीं रह जाती? चूर-चूर क्यों, कहो पानी-पानी। तो वह क्या बल है, जो इस तीखे व्यंग्य के आगे अजेय ही नहीं रहता, बल्कि मानो उस व्यंग्य की क्रूरता को ही पिघला देता है?
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प्रस्तुत गद्यांश के लेखक कौन हैं?
Solution
प्रस्तुत गद्यांश के लेखक 'जैनेंद्र कुमार' हैं।
Key Points
- यह गद्यांश बाजार दर्शन नामक पाठ से लिया गया है।
- उपर्युक्त गद्यांश में पैसे की व्यंग्य शक्ति के बारे में बतलाया गया है।
- अर्थात् दूसरों के सुख साधन की वस्तुएँ हमें व्यंग्य करती हुई प्रतीत होती है यदि वह वस्तु हमारे पास नहीं है।
Additional Informationव्यंग्य
- पुल्लिंग
- शब्द की व्यंजना शक्ति द्वारा निकला अर्थ, गूढ़ार्थ।
- ताना।
लेखक
- लेख + अक् (प्रत्यय)
- अर्थ :- लिखने वाला।
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Question 17
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पैसे की व्यंग्य-शक्ति की सुनिए। वह दारुण है। मैं पैदल चल रहा हूँ कि पास ही धूल उड़ाती निकल गई मोटर। वह क्या निकली मेरे कलेजे को कौंधती एक कठिन व्यंग्य की लीक ही आर-से-पार हो गई। जैसे किसी ने आँखों में उँगली देकर दिखा दिया हो कि देखो, उसका नाम है मोटर और तुम उससे वंचित हो ! यह मुझे अपनी ऐसी विडंबना मालूम होती है कि बस पूछिए नहीं। मैं सोचने को हो आता हूँ कि हाय, ये ही माँ-बाप रह गए थे जिनके यहाँ मैं जन्म लेने को था ! क्यों न मैं मोटरवालों के यहाँ हुआ! उस व्यंग्य में इतनी शक्ति है कि ज़रा में मुझे अपने सगों के प्रति कृतघ्न कर सकती है। लेकिन क्या लोक-वैभव की यह व्यंग्य-शक्ति उस चूरन वाले अकिंचित्कर मनुष्य के आगे चूर-चूर होकर ही नहीं रह जाती? चूर-चूर क्यों, कहो पानी-पानी। तो वह क्या बल है, जो इस तीखे व्यंग्य के आगे अजेय ही नहीं रहता, बल्कि मानो उस व्यंग्य की क्रूरता को ही पिघला देता है?
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लेखक के अनुसार वह कौन-सी शक्ति है, जो अपने सगों के प्रति कृतघ्न कर सकती है?
Solution
'पैसे की व्यंग्य शक्ति' अपने सगों के प्रति कृतघ्न कर सकती हैं।
Key Points
- अर्थात् पैसे के द्वारा किया गया व्यंग्य हमें अपनों के प्रति क्षुब्ध की भावना उत्पन्न कर देती है।
- और हम यह सोचने लगते हैं कि हम इनके घर में क्यों पैदा हुए किसी पैसे वाले व्यक्ति की घर में क्यों नहीं?
Additional Informationकृतघ्न
- विशेषण
- किए हुए उपकार को न माननेवाला।
कृतघ्न का विलोम
कृतज्ञ
- विशेषण
- उपकार माननेवाला, एहसानमंद।
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Question 18
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पैसे की व्यंग्य-शक्ति की सुनिए। वह दारुण है। मैं पैदल चल रहा हूँ कि पास ही धूल उड़ाती निकल गई मोटर। वह क्या निकली मेरे कलेजे को कौंधती एक कठिन व्यंग्य की लीक ही आर-से-पार हो गई। जैसे किसी ने आँखों में उँगली देकर दिखा दिया हो कि देखो, उसका नाम है मोटर और तुम उससे वंचित हो ! यह मुझे अपनी ऐसी विडंबना मालूम होती है कि बस पूछिए नहीं। मैं सोचने को हो आता हूँ कि हाय, ये ही माँ-बाप रह गए थे जिनके यहाँ मैं जन्म लेने को था ! क्यों न मैं मोटरवालों के यहाँ हुआ! उस व्यंग्य में इतनी शक्ति है कि ज़रा में मुझे अपने सगों के प्रति कृतघ्न कर सकती है। लेकिन क्या लोक-वैभव की यह व्यंग्य-शक्ति उस चूरन वाले अकिंचित्कर मनुष्य के आगे चूर-चूर होकर ही नहीं रह जाती? चूर-चूर क्यों, कहो पानी-पानी। तो वह क्या बल है, जो इस तीखे व्यंग्य के आगे अजेय ही नहीं रहता, बल्कि मानो उस व्यंग्य की क्रूरता को ही पिघला देता है?
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लेखक के अनुसार धूल उड़ाती हुई मोटर गाड़ी हृदय पर क्या छोड़ जाती है?
Solution
लेखक के अनुसार धूल उड़ती हुई मोटर गाड़ी हृदय पर 'व्यंग्य लीक' छोड़ जाती है।
Key Points
- अर्थात् वह गाड़ी ह्रदय पर व्यंग्य की एक लंबी रेखा की जाती है।
- तथा हमें यह सोचने पर मजबूर कर देती है कि हम इस गाड़ी वाले के घर में पैदा क्यों नहीं हुए?
Additional Informationलीक
- स्त्रीलिंग
- लंबी रेखा।
- सर्प आदि के चलने से बनी रेखा।
अपनत्व
अहंकार का पर्यायवाची शब्द-
- अहंमन्यता, अहंकृति, अभिमान
- दर्प, मद, घमंड, गुमान, ग़रूर।
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Question 19
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पैसे की व्यंग्य-शक्ति की सुनिए। वह दारुण है। मैं पैदल चल रहा हूँ कि पास ही धूल उड़ाती निकल गई मोटर। वह क्या निकली मेरे कलेजे को कौंधती एक कठिन व्यंग्य की लीक ही आर-से-पार हो गई। जैसे किसी ने आँखों में उँगली देकर दिखा दिया हो कि देखो, उसका नाम है मोटर और तुम उससे वंचित हो ! यह मुझे अपनी ऐसी विडंबना मालूम होती है कि बस पूछिए नहीं। मैं सोचने को हो आता हूँ कि हाय, ये ही माँ-बाप रह गए थे जिनके यहाँ मैं जन्म लेने को था ! क्यों न मैं मोटरवालों के यहाँ हुआ! उस व्यंग्य में इतनी शक्ति है कि ज़रा में मुझे अपने सगों के प्रति कृतघ्न कर सकती है। लेकिन क्या लोक-वैभव की यह व्यंग्य-शक्ति उस चूरन वाले अकिंचित्कर मनुष्य के आगे चूर-चूर होकर ही नहीं रह जाती? चूर-चूर क्यों, कहो पानी-पानी। तो वह क्या बल है, जो इस तीखे व्यंग्य के आगे अजेय ही नहीं रहता, बल्कि मानो उस व्यंग्य की क्रूरता को ही पिघला देता है?
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पैसे की व्यंग्य शक्ति किस शक्ति के आगे चूर-चूर हो जाती है?
Solution
पैसे की व्यंग्य शक्ति नैतिक सबलता के आगे चूर चूर हो जाती है।
इसका जीवित उदाहरण चूरन बेचने वाला भगत है।
अर्थात उसका रोज का नियम मात्र छः आना कमाना ही था।
अतः वह नैतिकता का पालन करते हुए रोज अपने छह आने के लक्ष्य की प्राप्ति करता था। और उसे बाजार की कोई भी शक्ति प्रभावित नहीं कर पाती थी और ना ही पैसे की व्यंग्य शक्ति।
Additional Informationसबलता
- स (उपसर्ग) + बल (मूलशब्द) + ता (प्रत्यय)
सबल
नैतिक
- विशेषण
- नीति संबंधी।
- नीति के अनुरूप होनेवाला।
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Question 20
5 / -1
Directions For Questions
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़कर पूछे गए बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए सर्वाधिक उपयुक्त विकल्प का चुनाव कीजिए
पैसे की व्यंग्य-शक्ति की सुनिए। वह दारुण है। मैं पैदल चल रहा हूँ कि पास ही धूल उड़ाती निकल गई मोटर। वह क्या निकली मेरे कलेजे को कौंधती एक कठिन व्यंग्य की लीक ही आर-से-पार हो गई। जैसे किसी ने आँखों में उँगली देकर दिखा दिया हो कि देखो, उसका नाम है मोटर और तुम उससे वंचित हो ! यह मुझे अपनी ऐसी विडंबना मालूम होती है कि बस पूछिए नहीं। मैं सोचने को हो आता हूँ कि हाय, ये ही माँ-बाप रह गए थे जिनके यहाँ मैं जन्म लेने को था ! क्यों न मैं मोटरवालों के यहाँ हुआ! उस व्यंग्य में इतनी शक्ति है कि ज़रा में मुझे अपने सगों के प्रति कृतघ्न कर सकती है। लेकिन क्या लोक-वैभव की यह व्यंग्य-शक्ति उस चूरन वाले अकिंचित्कर मनुष्य के आगे चूर-चूर होकर ही नहीं रह जाती? चूर-चूर क्यों, कहो पानी-पानी। तो वह क्या बल है, जो इस तीखे व्यंग्य के आगे अजेय ही नहीं रहता, बल्कि मानो उस व्यंग्य की क्रूरता को ही पिघला देता है?
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मोटर गाड़ी से वंचित होना लेखक को क्या प्रतीत होता है?
Solution
मोटर गाड़ी से वंचित होने से लेखक को यह प्रतीत होता है कि वह 'निर्धन' है।
Key Points
- लेखक के पास मोटर गाड़ी नहीं है और साथ ही में वे यह भी सोचता है कि वह उस मोटर गाड़ी वाले के घर में पैदा क्यों नहीं हुआ।
- यदि ऐसा होता तो आज उसके पास भी वह मोटर गाड़ी होती।
Additional Informationवंचित
विडंबना
निर्धनता
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Question 21
5 / -1
'दाँत' का पर्यायवाची शब्द बताएं।
Solution
'रदन' दाँत का पर्यायवाची शब्द है। अतः सही उत्तर (विकल्प 1) ‘रदन’ है। अन्य विकल्प इसके सही उत्तर नहीं है।
- 'रदन' दाँत का पर्यायवाची है।
- 'दाँत' के अन्य पर्यायवाची हैं - रद, दशन, दंत, द्विज आदि।
Key Points
शब्द | पर्यायवाची |
दिवा | दिन, दिवस, वासर |
दास | सेवक, अनुचर, चाकर, भृत्य |
पय | क्षीर, अमृत, दुग्ध, दूध |
Additional Information
शब्द | परिभाषा | उदाहरण |
पर्यायवाची | जो विभिन्न शब्द एक ही अर्थ का बोध कराएं, उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते हैं। सामान्य भाषा में इनको समानार्थक शब्द भी कहते हैं। | अक्षर- वर्ण, हर्फ़ आज्ञा- आदेश, हुक्म, निर्देश |
-
Question 22
5 / -1
'राजपुत्र' शब्द में समास है
Solution
'राजपुत्र' शब्द में तत्पुरूष समास है, अन्य विकल्प असंगत है। अत: विकल्प 4 'तत्पुरूष' सही उत्तर होगा।
Key Points
शब्द | समास | समास विग्रह |
राजपुत्र | तत्पुरुष | राजा का पुत्र |
Additional Information
समास - समास उस प्रक्रिया को कहते हैं, जिसमें दो शब्द मिलाकर उनके बीच के संबंधसूचक आदि का लोप करके नया शब्द बनाया जाता है। समास से तात्पर्य 'संक्षिप्तीकरण' से है। समास के माध्यम से कम शब्दों में अधिक अर्थ प्रकट किया जाता है। जैसे - राजा का पुत्र – राजपुत्र, समास के छःप्रकार हैं - |
समास का नाम | परिभाषा | उदाहरण |
तत्पुरुष समास | जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो तथा समास करने के उपरांत विभक्ति (कारक चिन्ह) का लोप हो। | धर्म का ग्रन्थ = धर्मग्रन्थ, तुलसीदास द्वारा कृत = तुलसीदासकृत। |
बहुव्रीहि समास | जिस समास में दोनों पद प्रधान नहीं होते हैं और दोनों पद मिलकर किसी अन्य विशेष अर्थ की ओर संकेत कर रहे होते हैं। | जो महान वीर है = महावीर अर्थात हनुमान, तीन आँखों वाला = त्रिलोचन अर्थात शिव। |
कर्मधारय समास | जिस समास के दोनों शब्दों के बीच विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध हो, पहचान: विग्रह करने पर दोनों पद के मध्य में 'है जो', 'के समान' आदि आते हैं। | कमल के समान नयन = कमलनयन, महान है जो देव = महादेव। |
द्विगु समास | जिस समास में पूर्वपद (पहला पद) संख्यावाचक विशेषण हो। | दो पहरों का समूह = दोपहर, तीनों लोकों का समाहार = त्रिलोक। |
अव्ययीभाव समास | जिस समास में पहला पद प्रधान हो और समस्त शब्द अव्यय का काम करे। | प्रति + दिन = प्रतिदिन, एक + एक = एकाएक |
द्वंद्व समास | द्वन्द्व समास में समस्तपद के दोनों पद प्रधान हों या दोनों पद सामान हों एवं दोंनों पदों को मिलाते समय "और, अथवा, या, एवं" आदि योजक लुप्त हो जाएँ, वह समास द्वंद्व समास कहलाता है। | माता- पिता = माता और पिता, हाँ- न = हाँ या न |
-
Question 23
5 / -1
निम्नलिखित प्रश्न में, चार विकल्पों में से, उस विकल्प का चयन करें जो दिए गए मुहावरे के लिए सही अर्थ वाला विकल्प है।
'गंगा नहाना'
Solution
'अपना कर्तव्य पूरा करके निश्चिन्त होना' सही उत्तर है।
Key Points
- गंगा नहाना मुहावरे का अर्थ है - 'अपना कर्तव्य पूरा करके निश्चिन्त होना'।
- वाक्य प्रयोग – रमेश अपनी बेटी की शादी करके गंगा नहा गए।
अन्य विकल्प -
मुहावरा | अर्थ | वाक्य प्रयोग |
अत्यधिक साहसी होना | गज भर की छाती होना | वाक्य प्रयोग – उसकी गज भर की छाती है तभी तो अकेले ने ही चार-चार आतंकवादियों को मार दिया। |
मुसीबत में फँसना | गला फँसना | वाक्य प्रयोग – अपराध उसने किया हैं और गला मेरा फँसा दिया हैं। |
Additional Information
मुहावरा परिभाषा | उदाहर |
मुहावरा का शाब्दिक अर्थ‘ अभ्यास’ है। मुहावरा शब्द अरबी भाषा का शब्द है। हिन्दी में ऐसे वाक्यांशों को मुहावरा कहा जाता है, जो अपने साधारण अर्थ को छोड़कर विशेष अर्थ को व्यक्त करते हैं। | अंक भरना- स्नेहसेलिपटालेन ा वाक्य-माँ ने स्नेह से अपने पुत्र को अंक में भर लिया। |
-
Question 24
5 / -1
'ज़ोरावर' शब्द का अर्थ है:
Solution
दिए गए विकल्पों में सही उत्तर विकल्प 2 ‘बलवान’ है। अन्य विकल्प इसके अनुचित उत्तर हैं।
Key Points
- दिए गए विकल्पों में से 'ज़ोरावर' शब्द का उचित अर्थ 'बलवान' होगा।
- बलवान के पर्यायवाची शब्द हैं - शक्तिशाली, बलशाली, ताकतवर, पुष्ट, मजबूत, दृढ़।
अन्य विकल्प:
- बल पूर्वक - जोराजोरी
- अत्यधिक उत्साह - जोश-खरोश
- अभिवादन - जोहर
Additional Information
- वर्णों या ध्वनियों के सार्थक वर्ण-समुदाय को 'शब्द' कहते है।
- किसी शब्द से जिस भाव की प्रतीति होती है, वही उस शब्द का अर्थ है।
- किसी शब्द को बोलते ही श्रोता के दिमाग में एक भाव या चित्र उभर आता है, यह भाव या चित्र ही उस शब्द का अर्थ है।
-
Question 25
5 / -1
"कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली" लोकोक्ति अर्थ होगा:
Solution
"कहां राजा भोज, कहां गंगू तेली" लोकोक्ति अर्थ विशिष्ट और सामान्य व्यक्ति की तुलना करना होता है अत: सही विकल्प 1 "विशिष्ट और सामान्य व्यक्ति की तुलना" है |

अधजल गगरी छलकत जाय = (जिसके पास थोड़ा ज्ञान होता हैं, वह उसका प्रदर्शन या आडम्बर करता है।) प्रयोग- रमेश बारहवीं पास करके स्वयं को बहुत बड़ा विद्वान समझ रहा है। ये तो वही बात हुई कि अधजल गगरी छलकत जाय। अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत = (समय निकल जाने के पश्चात् पछताना व्यर्थ होता है) प्रयोग- सारे साल तुम मस्ती मारते रहे, अध्यापकों और अभिभावक की एक न सुनी। अब बैठकर रो रहे हो। ठीक ही कहा गया है- अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेत। अन्धा बाँटे रेवड़ी फिर-फिर अपनों को दे = (अधिकार पाने पर स्वार्थी मनुष्य केवल अपनों को ही लाभ पहुँचाते हैं।) प्रयोग- मालिक आगरा का है, इसलिए उसने आगरावासी को ही नियुक्त कर लिया। ये तो वही बात हुई कि अन्धा बाँटे रेवड़ी फिर-फिर अपनों को दे। अन्धा क्या चाहे दो आँखें = (मनचाही बात हो जाना) प्रयोग- अभी मैं विद्यालय से अवकाश लेने की सोच ही रही थी कि मेघा ने मुझे बताया कि कल विद्यालय में अवकाश है। यह तो वही हुआ- अन्धा क्या चाहे दो आँखें। |
-
Question 26
5 / -1
'अभ्युदय' शब्द में उपसर्ग है:
Solution
- 'अभ्युदय' शब्द में 'अभि' उपसर्ग लगा है। अतः 'अभि' सही विकल्प है, अन्य सभी विकल्प असंगत है।
Key Points
- अभ्युदय शब्द में अभि उपसर्गपूर्वक उदय शब्द का प्रयोग हुआ है।
- उपसर्ग की परिभाषा: जो शब्द किसी शब्द के आगे लगकर उसमे विशेष अर्थ परिवर्तन करते है, उन्हें 'उपसर्ग' कहा जाता है।
- जैसे: उपकार, प्रकार आदि।
| उपसर्ग | अर्थ | शब्द |
| अति | अधिक | अत्यंत, अतिरिक्त, अतिशय। |
| अधि | ऊपर, श्रेष्ठ | अधिकार, अधिपति, अधिनायक। |
| अभि | सामने , चारो ओर | अभियान, अभिषेक, अभिनय, अभिमुख। |
Additional Information
- हिंदी में प्रचलित उपसर्गो को निम्नलिखित तरीके से बाँट सकते है।
- संस्कृत के उपसर्ग (संख्या 22)
- हिंदी के उपसर्ग (संख्या 13)
- उर्दू और फ़ारसी के उपसर्ग (संख्या 19)
-
Question 27
5 / -1
इनमें से 'हाथी' का पर्यायवाची शब्द है?
Solution
दिए गए विकल्पों में 'द्विप' शब्द हाथी का पर्यायवाची शब्द है। अतः विकल्प 4 सही है।
Key Points
- 'हाथी' का पर्यायवाची द्विप है।
- 'हाथी' के अन्य पर्यायवाची शब्द कूम्भा, हस्ती, गज।
अन्य विकल्प:
शब्द | पर्यायवाची |
बकरी | छेरी, छागी, अजा |
बादल | अभ्र, मेघ, धर, जलद, जलधर, वारिधर |
बिजली | तड़ित, सौदामिनी, विद्युत, दामिनी, गाज |
Additional Information
शब्द | परिभाषा | उदाहरण |
पर्यायवाची | एक ही अर्थ में प्रयुक्त होने वाले शब्द जो बनावट में भले ही अलग हों, पर्यायवाची या समानार्थी शब्द कहलाते हैं। | आग-अनल, पावक, दहन। हवा-समीर, अनिल, वायु। |
-
Question 28
5 / -1
'महोत्सव का सही सन्धि विच्छेद क्या है?
Solution
'महोत्सव' शब्द में गुण संधि है। महा + उत्सव इसका संधि विच्छेद होता है, अतः विकल्प 1 ‘महा + उत्सव’ सही उत्तर है।
Key Points
- 'महोत्सव' में गुण संधि है।
- महा + उत्सव = महोत्सव' (आ + उ = ओ), यहाँ 'आ' और 'उ' के मेल से 'ओ' बना है।
- जब संधि करते समय (अ, आ) के साथ (इ, ई) हो तो 'ए' बनता है, जब (अ, आ) के साथ (उ, ऊ) हो तो 'ओ' बनता है, जब (अ, आ) के साथ (ऋ) हो तो 'अर' बनता है तो यह गुण संधि कहलाती है।
अन्य विकल्प-
स्वर संधि के अन्य भेद:
संधि | परिभाषा | उदाहरण |
यण संधि | जब संधि करते समय इ, ई के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ' य ' बन जाता है, जब उ, ऊ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ' व् ' बन जाता है , जब ऋ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो ' र ' बन जाता है। | पितृ + आज्ञा = पित्राज्ञा |
| दीर्घ संधि | जब दो शब्दों की संधि करते समय (अ, आ) के साथ (अ, आ) हो तो 'आ' बनता है, जब (इ, ई) के साथ (इ, ई) हो तो 'ई' बनता है, जब (उ, ऊ) के साथ (उ, ऊ) हो तो 'ऊ' बनता है। | पुस्तक + आलय = पुस्तकालय |
| अयादि संधि | जब संधि करते समय ए , ऐ , ओ , औ के साथ कोई अन्य स्वर हो तो (ए का अय), (ऐ का आय), (ओ का अव), (औ – आव) बन जाता है। यही अयादि संधि कहलाती है। | नै+ अक = नायक |
Additional Information
संधि - दो शब्दों के मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है उसे संधि कहते हैं। संधि के तीन प्रकार हैं - 1. स्वर, 2. व्यंजन और 3. विसर्ग, |
संधि | परिभाषा | उदाहरण |
स्वर | स्वर वर्ण के साथ स्वर वर्ण के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | विद्या + अर्थी = विद्यार्थी महा + ईश = महेश |
व्यंजन | एक व्यंजन से दूसरे व्यंजन या स्वर के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | अहम् + कार = अहंकार उत् + लास = उल्लास |
विसर्ग | विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | दुः + आत्मा =दुरात्मा निः + कपट =निष्कपट |
-
Question 29
5 / -1
देश में (1) / पनपता (2) / घोर (3) / विषय है (4) / भ्रष्टाचार (5) / चिंता का (6) - क्रम संख्या (1) और (2) के बाद वाक्य संरचना का सही क्रम क्या होगा?
Solution
दिए गए विकल्पों में ‘5, 3, 6, 4’ सही विकल्प है। अन्य विकल्प इसके गलत उत्तर होंगे। अत: इसका सही उत्तर विकल्प 3 - ‘5, 3, 6, 4’ होगा।
स्पष्टीकरण:
उपर्युक्त सभी विकल्पों में ‘5, 3, 6, 4’ सही विकल्प है। अन्य विकल्प असंगत उत्तर हैं।
वाक्य का अव्यवस्थित क्रम | वाक्य का व्यवस्थित क्रम |
देश में (1) / पनपता (2) / घोर (3) / विषय है (4) / भ्रष्टाचार (5) / चिंता का (6) / | देश में (1) / पनपता (2) / भ्रष्टाचार (5) / घोर (3) / चिंता का (6) / विषय है (4) / |
-
Question 30
5 / -1
''जैसे नागनाथ वैसे साँपनाथ'' लोकोक्ति का सही अर्थ है-
Solution
दिए गए विकल्पों में सही उत्तर विकल्प 2 ‘सब दुष्ट प्रकृति वाले एक समान हैं’ होगा। अन्य विकल्प इसके अनुचित उत्तर होंगे।
Key Points
- कहावत - जैसे नागनाथ वैसे साँपनाथ, अर्थ- सब दुष्ट प्रकृति वाले एक समान हैं
- वाक्य- महेश को बुलाओ या रमेश को मदद कोई नहीं करेगा क्योंकि जैसे नागनाथ वैसे साँपनाथ।
Additional Information
लोकोक्ति परिभाषा | उदाहरण |
किसी विशेष स्थान पर प्रसिद्ध हो जाने वाले कथन को 'लोकोक्ति' कहते हैं। जब कोई पूरा कथन किसी प्रसंग विशेष में उद्धत किया जाता है तो लोकोक्ति कहलाता है। इसी को कहावत कहते है। | अकेला चना भाद नहीं फोड़ता अर्थात एक व्यक्ति के करने से कोई कठिन काम पूरा नहीं होता वाक्य- उस दिन बात-ही-बात में राम ने कहा, हाँ, मैं अकेला ही कुँआ खोद लूँगा। इन पर सबों ने हँसकर कहा, व्यर्थ बकबक करते हो, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता’। |
-
Question 31
5 / -1
‘गणेश’ शब्द का पर्यायवाची शब्द बताइए।
Solution
सही विकल्प ‘विनायक’ है।
Key Points
- ‘गणेश’ का पर्यायवाची शब्द ‘विनायक’ है।
- ‘निकेतन’ का अर्थ ‘गृह’ है।
- ‘गहना’ का अर्थ ‘आभूषण’ है।
- ‘अम्बर’ का अर्थ ‘आकाश’ है।
विशेष –
शब्द | परिभाषा | उदाहरण |
पर्यायवाची | एक ही अर्थ में प्रयुक्त होने वाले शब्द, जो बनावट में भले ही अलग हों। 'पर्यायवाची-शब्द' को 'समानार्थी-शब्द' भी कहा जाता है| | आग - अनल, पावक, दहन, वह्नि, कृशानु, हुताशन आदि। |
-
Question 32
5 / -1
'जो स्थिर न रह सके' वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द है -
Solution
जो स्थिर न रह सके' वाक्यांश के लिए उपयुक्त शब्द है -अस्थिर
| शब्द | पर्यायवाची |
| अस्थिर | चंचल, चपल, अधीर, अशांत, गतिमान, |
Key Pointsवाक्यांश -दो या दो से ज़्यादा शब्द आपस में मिलकर कोई एक छोटा अर्थ बनाते है। और यहाँ अर्थ वाक्य का अर्थ पूरा करने में सहयोग देता है।
Additional Information
| शब्द | वाक्यांश |
| अडिग | जो डीग न सके। |
| चलायमान | जो चल रहा हो |
-
Question 33
5 / -1
निम्नलिखित प्रश्न में, चार विकल्पों में से उस विकल्प का चयन करें जो सही संधि-विच्छेद वाला विकल्प है।
उल्लास
Solution
सही उत्तर 'उत् + लास' है।
Key Points
- उत् + लास = उल्लास (त् + ल = ल्ल)
- 'उल्लास' शब्द में व्यंजन संधि है।
Additional Information
संधि - दो शब्दों के मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है उसे संधि कहते हैं। संधि के तीन प्रकार हैं - 1. स्वर, 2. व्यंजन और 3. विसर्ग, |
संधि | परिभाषा | उदाहरण |
स्वर | स्वर वर्ण के साथ स्वर वर्ण के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | विद्या + अर्थी = विद्यार्थी महा + ईश = महेश |
व्यंजन | एक व्यंजन से दूसरे व्यंजन या स्वर के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | अहम् + कार = अहंकार उत् + लास = उल्लास |
विसर्ग | विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | दुः + आत्मा =दुरात्मा निः + कपट =निष्कपट |
-
Question 34
5 / -1
आज पूरी दुनिया में आजादी और ________के लिए आंदोलन चल रहे हैं।
Solution
आज पूरी दुनिया में आजादी और लोकतंत्र के लिए आंदोलन चल रहे हैं।
Key Pointsलोकतंत्र:-
- लोक + तंत्र = लोकतंत्र
- 'लोक' (जगह) और 'तंत्र' (शासन)
- इस प्रकार लोकतंत्र का अर्थ है- सभी को एक साथ जोड़ना या सभी को समानअधिकार
- विलोम शब्द- 'राजतंत्र'
Additional Informationगुलामी:-
- गुलाम + ई = गुलामी
- अर्थ: गुलाम होने की अवस्था या भाव, दासता।
- विलोम शब्द- 'आजादी'
राजतंत्र:-
- राज + तंत्र = राजतंत्र
- राज (राजा) और 'तंत्र' (शासन)
- अर्थ: राजा का शासन, राजा द्वारा शासन।
- विलोम शब्द- 'गणतंत्र, प्रजातंत्र'
तानाशाही:-
- ताना + शाही = तानाशाही
- ताना (अनुचित या अशोभनीय व्यवहार)
- शाही (राजा का शासित क्षेत्र)
- अर्थ: मनमाना आचरण या शासन करने की वृत्ति। स्वेच्छाचारी
-
Question 35
5 / -1
'स़रसराहट' शब्द में प्रत्यय हैः
Solution
'स़रसराहट' शब्द में प्रत्यय हैः आहट ।
स़रसर + आहट = स़रसराहट
Key Points
- 'स़रसर' शब्द में 'आहट' प्रत्यय के योग से ''स़रसराहट' शब्द बना है।
- यह ध्वनि का अनुकरणात्मक शब्द है।
- व्याकर्ण की दृष्टि से यह स्त्रीलिंग शब्द है।
- 'आहट' प्रत्यय से बने अन्य शब्द हैं - कड़वाहट, उकसाहट, घरघराहट, सकपकाहट आदि।
Additional Information
- ‘प्रत्यय’ दो शब्दों से बना है– प्रति + अय।
- ‘प्रति’ का अर्थ है ‘साथ में, पर बाद में; जबकि ‘अय’ का अर्थ ‘चलने वाला’ है।
- अत: ‘प्रत्यय’ का अर्थ हुआ, ‘शब्दों के साथ, पर बाद में चलने वाला या लगने वाला, अत: इसका प्रयोग शब्द के अन्त में किया जाता है।
- प्रत्यय किसी भी सार्थक मूल शब्द के पश्चात् जोड़े जाने वाले वे अविकारी शब्दांश हैं, जो शब्द के अन्त में जुड़कर उसके अर्थ में या भाव में परिवर्तन कर देते हैं।
- प्रत्ययों से शब्द का विस्तार होता है।
- प्रत्यय के प्रयोग से संज्ञा, विशेषण, क्रियाविशेषण आदि सैकड़ों शब्दों का निर्माण होता है।
-
Question 36
5 / -1
इनमें से कौन-सा शब्द अर्थ की दृष्टि से ‘अरुण’ से संबद्ध नहीं है?
Solution
दिये गए विकल्पों में सही उत्तर विकल्प 3 ‘अपवाद’ है। अन्य विकल्प इसके अनुचित उत्तर हैं।
Key Points
- ‘अरुण’ के अनेकार्थक शब्द 'गरुड़, तड़का, सिन्दूर' आदि हैं।
- 'अपवाद' के अनेकार्थक शब्द - निन्दा, विरोध, आदेश, आज्ञा आदि हैं।
Additional Information
शब्द | परिभाषा | उदाहरण |
अनेकार्थी शब्द | जिन शब्दों के एक से अधिक अर्थ होते हैं, उन्हें 'अनेकार्थी शब्द' कहते है। | काक- कौआ, लँगड़ा आदमी, अतिधृष्ट। |
-
Question 37
5 / -1
इस प्रश्न में वाक्य के कुछ अंशों के क्रम में उलटफेर कर दिया गया है। वाक्यांशों को P, Q, R, S अंकित किया गया है। वाक्य को तर्कपूर्ण क्रम देने के लिए उचित विकल्प चुनें।
जड़ से (P) पत्ते-पत्ते पर (Q) हरियाली छाई रही (R) उखड़ने के बावजूद, (S)
Solution
दिए गए सभी विकल्पों में ‘PSQR’ उचित एवं तार्किक वाक्य है। अत: इसका सही उत्तर विकल्प 1 ‘PSQR’ होगा। अन्य विकल्प अनुचित हैं।
स्पष्टीकरण:
अनुचित क्रम | उचित क्रम |
जड़ से (P) पत्ते-पत्ते पर (Q) हरियाली छाई रही (R) उखड़ने के बावजूद, (S) | जड़ से (P) उखड़ने के बावजूद, (S) पत्ते-पत्ते पर (Q) हरियाली छाई रही (R) |
-
Question 38
5 / -1
'अनुकूल' शब्द का विलोम-शब्द क्या है?
Solution
उपर्युक्त विकल्पों में से 'अनुकूल' का विलोम शब्द 'प्रतिकूल' है। अन्य विकल्प असंगत हैं। अतः सही विकल्प 'प्रतिकूल' है।
स्पष्टीकरण
'अनुकूल' का अर्थ 'मेल रखने वाला' है।
'प्रतिकूल' का अर्थ 'विरुद्ध पक्ष का अवलंबन करनेवाला' है।
अन्य विकल्प
विकल्प | अर्थ |
सानुकूल | पूरी तरह से अनुकूल। |
अनुकूलन | अपने अनुकूल करना। |
विशेष
शब्द | परिभाषा | उदाहरण |
विलोम/विपरीतार्थक | विपरीत (उल्टा) अर्थ बताने वाले शब्दों को विलोम शब्द कहते हैं। | - रात - दिन
- सुख - दुःख
|
-
Question 39
5 / -1
'जो आँखों के सामने न हो' के लिए उपयुक्त शब्द है।
Solution
दिए गए विकल्पों में विकल्प 2 ‘परोक्ष’ इसका सही उत्तर है। अन्य विकल्प इसके असंगत उत्तर होंगे।
Key Points
- ‘जो आँखों के सामने न हो’ वाक्यांश के लिए एक शब्द ‘परोक्ष’ होगा।
अन्य विकल्प -
शब्द | वाक्यांश |
प्रत्यक्ष | जो आँखों के सामने हो |
विपक्षी | जो विरोधी दल का हो |
Additional Information
वाक्यांश | भाषा को सुंदर, आकर्षक और प्रभावशाली बनाने के लिए अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग किया जाता है तो वह वाक्यांश के लिए एक शब्द कहलाता है। जैसे- जिसे देखकर डर लगे- डरावना |
-
Question 40
5 / -1
'आजीवन' में समास है
Solution
सही उत्तर 'अव्ययीभाव' समास है।
Key Points
- 'आजीवन' में अव्ययीभाव समास है।
- इसका समास विग्रह 'जीवन भर' है। इसका पहला पद अव्यय है।
समास | परिभाषा | उदाहरण |
अव्ययीभाव समास | जिस समास में पहला पद (पूर्वपद) अव्यय तथा प्रधान हो। | जैसे – जन्म से लेकर = आजन्म, मति के अनुसार = यथामति। |
Additional Information
समास | परिभाषा | उदाहरण |
तत्पुरुष समास | जिस समास में उत्तरपद प्रधान हो तथा समास करने के उपरांत विभक्ति (कारक चिन्ह) का लोप हो। | जैसे – धर्म का ग्रन्थ = धर्मग्रन्थ, तुलसीदास द्वारा कृत = तुलसीदासकृत। |
द्वंद्व समास | जिस समास में दोनों पद प्रधान हो तथा विग्रह करने पर उनके बीच ‘तथा’, ‘या’, ‘अथवा’, ‘एवं’ या ‘और’ का प्रयोग होता हो। | जैसे – अन्न और जल = अन्न-जल, अपना और पराया = अपना-पराया। |
कर्मधारय समास | जिस समास के दोनों शब्दों के बीच विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का सम्बन्ध हो। | कमल के समान नयन = कमलनयन, चन्द्र जैसे मुख = चंद्रमुख आदि। |
-
Question 41
5 / -1
'गौण' का विलोम शब्द है
Solution
दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर विकल्प 4 ‘मुख्य’ है। अन्य विकल्प इसके गलत उत्तर हैं।

- दिए गए विकल्पों में से 'गौण' का विलोम शब्द 'मुख्य' होता है।
- गौण विशेषण शब्द है जिसका अर्थ 'अप्रधान' होता है।
- मुख्य विशेषण शब्द है जिसका अर्थ प्रधान होता है।
- अन्य शब्द वर्तनीगत अशुद्ध हैं।
- गुड़ - ईख के रस को पकाकर खूब गाढ़ा करने पर प्राप्त होने वाला कड़ा पदार्थ

शब्द | परिभाषा | उदाहरण |
विलोम/ विपरीतार्थक | 'विलोम' शब्द का अर्थ है-उल्टा या विपरीत। अत: किसी शब्द का उल्टा अर्थ व्यक्त करने वाला शब्द विलोमार्थक या विपरीतार्थक शब्द कहलाते हैं। | राग-द्वेष सामिष-निरामिष व्यष्टि-समष्टि आकाश-पाताल |
-
Question 42
5 / -1
निम्नांकित में से कौन सा वाक्य शुद्ध है?
Solution
उपरोक्त में से शुद्ध वाक्य है- हमारे यहाँ नवयुवक शिक्षा पाते हैं।
- अत: अन्य सभी विकल्प गलत है।
- 'तरुण' का अर्थ- नवयुवक, युवक, युवा, जवान, नौजवान।
Key Pointsवाक्य में अशुद्धियाँ:-
- हमारे यहाँ नवतरुण शिक्षा पाते हैं। (पुनरावृत्ति की अशुद्धियाँ)
- हमारे यहाँ तरुण नवयुवक शिक्षा पाते हैं। (पुनरावृत्ति की अशुद्धियाँ)
- हमारे यहाँ शिक्षा नवतरुण पाते हैं। (पदक्रम/ पुनरावृत्ति संबंधी अशुद्धियाँ)
Additional Informationवाक्य में अशुद्धियाँ हो सकती है:-
- वाक्य सम्प्रेषण की सबसे महत्वपूर्ण और सार्थक इकाई है अत: वाक्यगत अशुद्धियों को शुद्ध रुप में लिखना वाक्य को अधिक सरल बनाता है।
- वाक्य में पदक्रम, पुनरावृत्ति, वर्तनी, शब्द-अर्थ, संज्ञा, सर्वनाम, लिंग, वचन, क्रिया, विशेषण, क्रिया-विशेषण आदि अशुद्धियाँ हो सकती है।
-
Question 43
5 / -1
अर्थ के अनुसार वाक्य के कितने प्रकार हैं?
Solution
अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं,अन्य विकल्प अनुचित है। अतः सही विकल्प आठ है।
Key Points
स्पष्टीकरण:
अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं- विधानवाचक, निषेधवाचक, आज्ञावाचक, विस्मयवाचक, संकेतवाचक, संदेहवाचक, प्रश्नवाचक तथा इच्छावाचक। |
Additional Information
विशेष:
- वाक्य - शब्दों का वह व्यवस्थित रूप जिसमें विचारों का आदान - प्रदान होता है। एक सामान्य वाक्य में कर्ता, कर्म, क्रिया होते हैं।
Important Points
अर्थ के आधार पर वाक्य के आठ भेद हैं-
| वाक्य | परिभाषा | उदाहरण |
| विधानवाचक वाक्य | ऐसे वाक्य जिनसे किसी काम के होने या किसी के अस्तित्व का बोध हो, वह वाक्य विधानवाचक वाक्य कहलाता है। इसे विधिवाचक वाक्य कहते हैं। | ममता ने खाना खा लिया। |
| इच्छावाचक वाक्य | ऐसे वाक्य जिनसे हमें वक्ता की कोई इच्छा, कामना, आकांशा, आशीर्वाद आदि का बोध हो, वह वाक्य इच्छावाचक वाक्य कहलाते हैं। | ईश्वर करे सब कुशल लौटें। |
| आज्ञावाचक वाक्य | ऐसे वाक्य जिनमें आदेश, आज्ञा या अनुमति का पता चले या बोध हो, वे वाक्य आज्ञावाचक वाक्य कहलाते हैं। | वहां जाकर बैठिये। |
| निषेधवाचक वाक्य | जिन वाक्यों से कार्य के निषेध का बोध होता है, वह वाक्य निषेधवाचक वाक्य कहलाते हैं। | मैं घर नहीं जाऊँगा। |
| प्रश्नवाचक वाक्य | जिन वाक्यों में कोई प्रश्न किया जाये या किसी से कोई बात पूछी जाये, उन्हें प्रश्नवाचक वाक्य कहते हैँ। | तुम्हारा क्या नाम है? |
| विस्मयादिबोधक वाक्य | ऐसे वाक्य जिनमे हमें आश्चर्य, शोक, घृणा, अत्यधिक ख़ुशी, स्तब्धता आदि भावों का बोध हो, ऐसे वाक्य विस्मयादिबोधक वाक्य कहलाते हैं। इन वाक्यों में विस्मयादिबोधक चिन्ह (!) लगता है। | ओह ! कितनी ठंडी रात है। |
| संकेतवाचक वाक्य | वे वाक्य जिनसे हमें एक क्रिया का दूसरी क्रिया पर निर्भर होने का बोध हो, ऐसे वाक्य संकेतवाचक वाक्य कहलाते हैं। | अगर तुम परिश्रम करते तो आज सफल हो जाते। |
| संदेहवाचक वाक्य | ऐसे वाक्य जिनसे हमें किसी प्रकार के संदेह या संभावना का बोध होता है, वह वाक्य संदेहवाचक वाक्य कहलाते हैं। | आज बहुत तेज़ बारिश हो सकती है। |
-
Question 44
5 / -1
'मूक' का सही विलोम शब्द क्या होगा?
Solution
इसका सही उत्तर 'वाचाल' है।
Key Points
- 'मूक' का सही विलोम होगा - वाचाल
- 'मूक' का अर्थ - गूंगा
- 'वाचाल' का अर्थ - वाक्पटु
- 'शूक' का अर्थ 'चिकना', शिखा' आदि होता है।
Additional Information
शब्द | परिभाषा | उदाहरण |
विलोम/विपरीतार्थक | विपरीत (उल्टा) अर्थ बताने वाले शब्दों को विलोम शब्द कहते हैं। | रात-दिन धरती-आकाश |
-
Question 45
5 / -1
बादल घिरे और मयूर नाचने लगे! यह कौन-सा वाक्य है?
-
Question 46
5 / -1
दिए गए वाक्य में रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए।
साहित्य जीवन की _______ है।
Solution
सही उत्तर 'अभिव्यक्ति' है।
Key Points
- साहित्य जीवन की _______ है। - रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त शब्द 'अभिव्यक्ति' है।
- अन्य विकल्प 'अतिवृष्टि, अभिवृक्ति, अनावृष्टि' वाक्य को सार्थक नहीं बना रहे हैं।
स्पष्टीकरण-
- अभिव्यक्ति का अर्थ 'प्रकट करना' है और साहित्य जीवन को प्रदर्शित करता है।
- अतः शब्द 'अभिव्यक्ति' रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त है।
अन्य विकल्प-
- अतिवृष्टि- आवश्यकता से अधिक वर्षा
- अभिवृक्ति- अशुद्ध शब्द, सही शब्द अभिवृत्ति होता है
- अनावृष्टि- बिलकुल भी वर्षा न होना
-
Question 47
5 / -1
'जो न जाना गया हो' के लिए एक शब्द होगाः
Solution
दिए गए विकल्पों में सही उत्तर विकल्प 4 ‘अज्ञात’ है। अन्य विकल्प सही उत्तर नहीं हैं।
Key Points
- 'जो न जाना गया हो' इस वाक्यांश के लिए एक शब्द होगा - अज्ञात।
- अज्ञात शब्द का संधि विच्छेद है - अ + ज्ञात।
अन्य विकल्प:
एक शब्द | वाक्यांश |
ज्ञात | जो जाना गया हो |
आशातीत | आशा से परे |
परलोक | दूसरा लोक, स्वर्ग |
Additional Information
- वाक्यांश- भाषा को सुंदर, आकर्षक और प्रभावशाली बनाने के लिए अनेक शब्दों के स्थान पर एक शब्द का प्रयोग किया जाता है तो वह वाक्यांश के लिए एक शब्द कहलाता है।
-
Question 48
5 / -1
"घुटने टेक देना" - मुहावरे का सही अर्थ क्या है?
Solution
"घुटने टेक देना" - मुहावरे का सही अर्थ :-- पराजय स्वीकार कर लेना
- वाक्य प्रयोग : महाराणा की सेना के आगे दूसरी सेना के आगे दो दिन में ही घुटने टेक दिए अर्थात पराजय स्वीकार कर लीं।
Key Points
- मुहावरा: घर घाट एक करना
- अर्थ: कठिन परिश्रम करना
- वाक्य प्रयोग: नौकरी के लिए संजय ने घर घाट एक कर दिया।
- मुहावरा: पीछा छुड़ाना
- अर्थ :जान छुड़ाना
- वाक्य प्रयोग :बड़ी मुश्किल से मैं उससे पीछा छुड़ाकर आया हूँ।
- मुहावरा – डंका बजाना
- अर्थ – प्रभाव जमाना
- वाक्य प्रयोग – आस्ट्रेलिया ने सब देशों की टीमों को हरा कर अपना डंका बजा दिया।
- मुहावरा – चोटी और एड़ी का पसीना एक करना
- अर्थ – खूब परिश्रम करना
- वाक्य प्रयोग – मुकेश ने नौकरी के लिए चोटी और एड़ी का पसीना एक कर दिया हैं।
- मुहावरा – ढिंढोरा पीटना
- अर्थ – घोषणा करना
- वाक्य प्रयोग – केवल ढिंढोरा पीटने से काम नहीं बनता। काम बनाने के लिए लोगों का विश्वास जीतना जरूरी है।
-
Question 49
5 / -1
समय केवल उन्हीं को याद रखता है जो धारा के _____ में बह नहींं जाते।
Solution
सही उत्तर 'प्रवाह' है।
Key Pointsसमय केवल उन्हीं को याद रखता है जो धारा के _____ में बह नहींं जाते। - वाक्य के रिक्त स्थान के लिए उपयुक्त शब्द 'प्रवाह' है।
- प्रवाह का अर्थ- बहाव
- प्रसार का अर्थ- फैलाव
- आरोह का अर्थ- आरोहण
- अवरोह का अर्थ- पतन, उतार
उपर्युक्त शब्दों के अर्थ को ध्यान से देखिये, प्रसार, आरोह, अवरोह अपने अर्थों के अनुसार रिक्त स्थान के लिए अनुपयुक्त हैं।
रिक्त स्थान में 'धारा' के साथ प्रवाह शब्द आएगा।
-
Question 50
5 / -1
'पो + अन' किस स्वर संधि का उदाहरण है?
Solution
इसका सही उत्तर 'अयादि' है।
Key Points
अयादि संधि | संधि करते जब ए के बाद अन्य स्वर आए तो ‘अय’, ऐ के बाद कोई अन्य स्वर आए तो ‘आय’, ओ के बाद कोई अन्य स्वर आए तो ‘अव’, और औ के बाद कोई अन्य स्वर आए तो ‘आव’ हो जाता हैं। ऐसी संधि को अयादी संधि कहा जाता हैं। | पो + अन = पवन (ओ+अ=अव) |
अन्य विकल्प -
प्रकार | परिभाषा | उदाहरण |
गुण संधि | गुण संधि में दो भिन्न स्वरों के मिलने से एक अन्य स्वर बनता हैं। जैसे अ और इ के मिलने से ए बनता हैं। | महा + उत्सव = महोत्सव |
वृद्धि संधि | जब संधि करते समय अ या आ के बाद ए या ऐ आए तो ‘ऐ’, अ या आ के बाद ओ या औ आए तो ‘औ’ हो जाता हैं। | पुत्र + एषणा = पुत्रैषणा |
यण संधि | कुछ स्वरों को संधि करते समय आपस में मिलाने पर य और र में बदल जाते हैं। ऐसी संधि को यण संधि कहा जाता हैं. इस संधि में इ या ई के बाद कोई स्वर आए तो ‘य’ तथा उ या ऊ के बार कोई स्वर आए तो ‘व्’ में परिवर्तित हो जाता हैं। | अति + अधिक = अत्यधिक |
Additional Information
संधि - दो शब्दों के मेल से जो विकार (परिवर्तन) होता है उसे संधि कहते हैं। संधि के तीन प्रकार हैं - 1. स्वर, 2. व्यंजन और 3. विसर्ग, |
संधि | परिभाषा | उदाहरण |
स्वर | स्वर वर्ण के साथ स्वर वर्ण के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | विद्या + अर्थी = विद्यार्थी महा + ईश = महेश |
व्यंजन | एक व्यंजन से दूसरे व्यंजन या स्वर के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | अहम् + कार = अहंकार उत् + लास = उल्लास |
विसर्ग | विसर्ग के साथ स्वर या व्यंजन के मेल से विकार उत्पन्न होता है। | दुः + आत्मा =दुरात्मा निः + कपट =निष्कपट |