बिहार बोर्ड 10वी हिंदी परीक्षा 2023 : Top 100 महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर के साथ; ये प्रश्न हर साल पूछता है रटलो परीक्षा से पहले
बिहार बोर्ड 10वी हिंदी परीक्षा 2023 : Top 100 महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर के साथ; ये प्रश्न हर साल पूछता है रटलो परीक्षा से पहले
यहां बिहार बोर्ड 10वी हिंदी परीक्षा 2023 के लिए Top 100 महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर के साथ दिए गए है
इसमें शिक्षकों द्वारा चयनित शीर्ष 100 महत्वपूर्ण सब्जेक्टिव प्रश्न दिए गए हैं जिनके साथ उत्तर भी शामिल हैं। यह एक गाइड है जो बिहार बोर्ड कक्षा 10 के छात्रों को परीक्षा से पहले उन प्रश्नों को मदद करेगा जो परीक्षा में हर साल पूछे जाते है।
आप नीचे दिए गए महत्वपूर्ण प्रश्न को अच्छी तरह से पढ़ सकते है। अब आपकी परीक्षा में कुछ ही घंटे बचे है, जिससे हिंदी के पेपर की तैयारी कर सकते हैं और अच्छे मार्क्स ला सकते हैं।
VVI Hindi Subjective Question
1. लेखक किस विडंबना की बात करते है ? विडंबना का स्वरुप क्या है ?
उत्तर :- लेखक आधुनिक युग में भी " जातिवाद" के पोषकों की कमी नहीं है जिसे विडंबना कहते हैं। विडंबना का स्वरूप यह है कि आधुनिक सभ्य समाज "कार्य कुशलता” के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानता है। चूंकि जाति प्रथा भी श्रम विभाजन का ही दूसरा रूप है।
2. जातिवाद के पोषक उसके पक्ष में क्या तर्क देते है ?
उत्तर :- जातिवाद के पोषक उसके पक्ष में यह तर्क देते है कि आधुनिक समाज कार्य कुशलता के लिए श्रम विभाजन को आवश्यक मानते है क्योकि श्रम विभाजन, जातिवाद का दुसरा रूप है इसलिए जातिवाद में कोई बुराई नहीं है।
जातिवाद समर्थकों का कहना है की माता-पिता के सामाजिक स्तर के अनुसार ही गर्भधारण के समय से ही मनुष्य का पेशा निर्धारित कर दिया जाता है।
3.जातिप्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है ?
उत्तर :- जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण है क्योंकि भारतीय हिन्दू धर्म की जाति प्रथा व्यक्ति को पारंगत होने के बावजूद ऐसा पेशा चुनने की अनुमति नहीं देती है जो उसका पैतृक पेशा न हो। इस प्रकार पेशा परिवर्तन की अनुमति न देकर जाति प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण बनी हुई है।
4. सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए लेखक ने किन विशेषताओं को आवश्यक माना है ?
उत्तर :- भीमराव अम्बेदकर ने सच्चे लोकतंत्र की स्थापना के लिए निम्न विषेशताओं को आवश्यक माना है ।
i. सच्चे लोकतंत्र के लिए समाज में स्वतंत्रता, भ्रातृत्व भावना की वृद्धि आवश्यक है।
ii. दूध-पानी के मिश्रण की तरह भईचारा होना चाहिए ।
iii. समाज में वहुविध हितों में सबका भाग होना चाहिए ।
iv. सामाजिक जीवन ऐसा होना चाहिए जिसमे अबाध संपर्क के अनेक साधन व अवसर उपलब्ध हो।
5.बाबा साहब भीमराव अम्बेदकर को आधुनिक मनु क्यों कहा जाता है ? विचार करें ।
उत्तर :- भीमराव अंबेदकर भारतीय संविधान के निर्मता के रूप में जाने जाते है। वे एक कुशल वक्ता, पुरा सामाजिक व्यवस्था के घोर विरोधी एक क्रन्तिकारी युग पुरुष थे। जब राष्ट्र स्वतंत्र आ तो स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा के लिए भारतीय संविधान की आवश्यकता महसूस की गयी। हमारे राष्ट्र निर्माताओं ने भारतीय संविधान निर्माण समिति का गठन किया जिसके सर्वमान्य अध्यक्ष के रूप में भीमराव अंबेदकर को मनोनीत किया गया।
भारतीय संविधान के निर्माण में इन्होंने अथक मेहनत की। उसमें मानवीय कल्याणकारी निति-नियमों की स्थापना की। सबल और राष्ट्र के निर्माण के लिए भारतीय संविधान को लोकोपयोगी बनाया। इसी कारण भीमराव अंबेदकर को भारतीय समाज ने ; आधुनिक मनु' के रूप में सम्बोधित किया।
6. सेन साहब के परिवार में बच्चों के पालन-पोषण में किए जा रहे लिंग आधारित भेद-भाव का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए ।
उत्तर :- सेन साहब का परिवार मध्यमवर्गीय सफेदपोशों का परिवार था । सेन साहब अमीर आदमी थे। उनकी पाँच लड़कियाँ थी एवं एक लड़का था । उस परिवार में लड़कियों और लड़का के लिए घर में अलग-अलग नियम तथा शिक्षा थी । अतः हम कह सकते है की सेन साहब के परिवार में लिंग आधारित भेद-भाव थी।
7. खोखा किन मामलों में अपवाद था ?
उत्तर :- खोखा स्वभाव से शैतान था जबकि उसके पांच बहने समझदार सुशील तथा ईमानदार थे। गलती से भी कोई सामान बर्बाद नहीं करती थी। इसके विपरीत खोखा लाड-प्यार में पालनेवाला शरारती, बिगड़ैल लड़का था।
8. काशु और मदन के बीच झगड़े का कारण क्या था ? इस प्रसंग के द्वारा लेखक क्या दिखाना चाहता है ?
उत्तर :- काशू और मदन के बीच झगडे का मूल कारण था की उसके पिता सेन साहब ने मदन को गाड़ी छूने , गंदा करने का इल्जाम लगाकर प्रताड़ित किया था, उसके ड्राइवर ने मदन को धक्का देकर जख्मी किया था। साथ ही सेन साहब ने मदन की माँ और उसके पिता को उलाहना देते हुए प्रताड़ित किया था एवं बेटे को सुधारने की सिख दी थी। इन्ही सब कारणों से मदन का अपमानित प्रताड़ित मन काशू के प्रति द्वेष भाव रखा और लट्टू के खेल में मित्रों के चाहने पर भी खेल में शामिल होने से इन्कार कर दिया । इस प्रसंग के द्वारा लेखक अमानवीय व्यवहार को दर्शाकर बताना चाहता है की समाज में व्यप्त गैर-बराबरी धन- सम्पदा आदमी-आदमी के बीच खाई पैदा करता है।
9.रोज-रोज अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशु की पिटाई करने पर उसे दण्डित करने की बजाय अपनी छाती से क्यों लगा लेता है ?
उत्तर :- रोज-रोज अपने बेटे मदन की पिटाई करने वाला गिरधर मदन द्वारा काशु की पिटाई करने पर दंडित करने के बजाए छाती से लगा लेता है क्योंकि सत्य को वे भी जानते थे। फिर भी अपने बेटे की पिटाई कई बार कर चुके थे इस बार जब उसके बेटे ने अपने बार-बार के अपमान का बदला खुद ही ले लिया तो उसे अपने बेटे पर गर्व हुआ इसीलिए उसे अपने बेटे पर प्यार आया और दंडित करने के बजाय छाती से लगा लेता है।
10. विष के दाँत कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर :- विष के दांत कहानी की शुरुआत अमीरों के अहंकार से हुई है अमीरों के अहंकार को लेखक ने विष के दांत कहा है, अपनी अमीरी के कारण ही सेन साहब हमेशा मदन को अपेक्षा की भाव से देखते हैं और उनके पिता को अपमानित करते हैं तथा उसे दंडित करवाते हैं अपने पुत्र की बुराई को उसके इंजीनियर बनने की संभावना बताते हैं कहानी के अंत में मदन ने अपने अपमान का बदला का काशु के दांत को तोड़ कर लिया है या काशु का दांत तोड़ना उसके अहंकार का वर्णन करता है इसीलिए कहानी का शीर्षक विष के दांत बिल्कुल सार्थक।
11. लेखक की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन कहाँ हो सकते है और क्यों ?
उत्तर :- लेखक मैक्समूलर की दृष्टि में सच्चे भारत के दर्शन भारतीय ग्रामीण जीवन में हो सकते हैं।
भारतीय ग्राम्य संस्कृति में सच्चा भारत निहित है। क्योंकि सच्चाई, प्रेम, करुणा, सहयोग की भावना ग्रामीणों में कूट-कूट कर भरा होता है।
12.लेखक ने वारेन हेस्टिंग्स से संबंधित किस दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना का हवाला दिया है और क्यों ?
उत्तर :- लेखक मैक्समूलर ने वारेन हेस्टिंग्स द्वारा 172 दारिस नामक सोने के सिक्के इस्ट इंडिया कंपनी निदेशक मंडल की सेवा में भेजे जाने पर कम्पनी के मालिक द्वारा उसका महत्त्व नहीं समझना एवं मुद्राओं को गला देना दुर्भाग्यपूर्ण दुर्घटना कहा है। क्योंकि, वह एक धरोहर था, अन्वेषण का विषय था ।
13. धर्मों की दृष्टि से भारत का क्या महत्व है ?
उत्तर :- भारत विविध धर्मों की जन्मभूमि और कर्मभूमि रही है। सनातन या ब्राहमण धर्म की जन्मभूमि भारत ही है। बौद्ध धर्म और जैन धर्म तथा सिख धर्म का प्रादुर्भाव भारत में ही हुआ था। पारसियों के धर्म की शरणस्थली भी भारत ही रहा है।
भारत ही धर्म का वास्तविक उद्गम स्थल रहा है। धर्म का उदभव और उसका प्राकृतिक विकास तथा उसके कई कारणों से प्रत्यक्ष परिचय भारत में ही देखा जा सकता है। इसी कारण भारत को धर्मभूमि या देवभूमि भी कहा जाता है। आज भी यहाँ नित्य नये मत-मतान्तर प्रकट एवं विकसित होते रहते हैं। इस तरह से भारत धार्मिक क्षेत्र में विश्व को आलोकित करनेवाला एक महत्त्वपूर्ण देश है।
14. लेखक वास्तविक इतिहास किसे मानता है और क्यों ?
उत्तर :- लेखक किसी विषय के भूल उद्गम स्रोत तक पहुँचने को उसका वास्तविक इतिहास मानता है।
क्योंकि, वहीं से उस विषय की मौलिकता, उसका विकास तथा उसकी शाखाओं, प्रशाखाओं तथा जीवन-मूल्य ज्ञात होता है तथा उसका अध्ययन फलदायी होता है।
15. मैक्समुलर ने संस्कृत की कौन-सी विशेषताएँ और महत्व बतलाये है ?
उत्तर :- मैक्समूलर के अनुसार संस्कृत की पहली विशेषता इसकी प्राचीनता है। इसके वर्तमान रूप में भी अत्यन्त प्राचीन तत्त्व भलीभाँति सुरक्षित है । संस्कृत की मदद से, ग्रीक - लैटिन, गॉथिक और एंग्लो-सैक्सन जैसी ट्यूटानिक भाषाओं केल्टिक तथा स्लाव भाषाओं में विद्यमान समानता की समस्या को आसानी से हल किया जा सका ।
16. नाख़ून क्यों बढ़ते है ? यह प्रश्न लेखक के आगे कैसे उपस्थित हुआ ?
उत्तर :- नाखून क्यों बढ़ते हैं ? यह प्रश्न एक दिन लेखक की छोटी लड़की ने उनसे पूछ दिया । उस दिन से यह प्रश्न लेखक के सोचने का विषय बन गया ।
17. बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को क्या याद दिलाती है ?
उत्तर :- प्राचीन काल में मनुष्य जंगली था । वह वनमानुष की तरह था । उस समय वह अपने नाखून की सहायता से जीवन की रक्षा करता था। आज नखधर मनुष्य अत्याधुनिक हथियार पर भरोसा करके आगे की ओर चल पड़ा है। पर उसके नाखून अब भी बढ़ रहे हैं । बढ़ते नाखूनों द्वारा प्रकृति मनुष्य को याद दिलाती है कि तुम भीतर वाले अस्त्र से अब भी वंचित नहीं हो। तुम्हारे नाखून को भुलाया नहीं जा सकता ।
वही प्राचीनतम नख एवं दंत पर आश्रित रहने वाला जीव हो । पशु की समानता तुममें अब भी विद्यमान है।
18.लेखक द्वारा नाखूनों को अस्त्र के रूप में देखना कहाँ तक संगत है ?
उत्तर :- कुछ लाख वर्षों पहले मनुष्य जब जंगली थो, उसे नाखून की जरूरत थी । वनमानुष के समान मनुष्य के लिए नाखून अस्त्र था क्योंकि आत्मरक्षा एवं भोजन हेतु नख की महत्ता अधिक थी। उन दिनों प्रतिद्वंदियों को पछाड़ने के लिए नाखून आवश्यक था । असल में वही उसके अस्त्र थे। उस समय उसके पास लोहे या कारतूस वाले अस्त्र नहीं थे, इसलिए नाखून को अस्त्र कहा जाना उपयुक्त है, तर्कसंगत है।
19. मनुष्य बार-बार नाखूनों को क्यों कटता है ?
उत्तर :- मनुष्य बार-बार नाखूनों को इसलिए कटता है की वह बर्वरता और जंगली अवस्था का प्रतिक है।
जो नाखून अस्त्र थे उसे अब सौंदर्य का रूप देने लगा। । इसमें नयापन लाने, इसे सँवारने एवं पशु से भिन्न दिखने हेतु नाखूनों को मनुष्य काट देता है। उससे रक्षा के बदले हानि की अब संभावना ज्यादा बढ़ गयी है।
20. देवनागरी लिपि के अक्षरों में स्थिरता कैसे आयी है ?
उत्तर :- लेखक गुणाकर मुले की लेख 'नागरी लिपि जिस लिपि में छपा है, उसे ही नागरी या देवनागरी लिपि कहते है। करीब दो सदी पहले पहली बार इस लिपि के टाइप बने और इसमें पुस्तकें छपने लगी। इसी कारण इसके अक्षरों में स्थिरता आ गई है।
21. देवनागरी लिपि में कौन-कौन सी भाषाएँ लिखी जाती है ?
उत्तर :- हिंदी तथा इसकी विविध बोलियां देवनागरी लिपि में लिखी जाती है। पडोसी देश नेपाल की नेवारी या नेपाली भाषा भी इसी लिपि में लिखी जाती है। मराठी की लिपि भी देवनागरी ही है। इस प्रकार संस्कृत और प्राकृत भाषाओं की लिपि भी देवनागरी लिपि ही है।
22. नंदी नागरी किसे कहते है ?
उत्तर :- कुछ समय पहले तक दक्षिण भारत में पोथियाँ लिखने के लिए नागरी लिपि का व्यवहार होता था।
नागरी लिपि के आरंभिक लेख हमें दक्षिण भारत में ही मिले है। दक्षिण भारत की यह नागरी लिपि नंदी नागरी कहलाती थी।
23. व्याख्या करे :-
(क) उसकी हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी, जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हों।
उत्तर :- प्रस्तुत गधांश हमारे पाठ्य पुस्तक गोधूलि भाग ॥ के 'बहादुर' नामक शीर्षक पाठ से लिया गया है।
जो लेखक अमरकांत जी के द्वारा रचित है।
प्रस्तुत पंक्ति के माध्यम से लेखक नौकर बहादुर की भावनात्मक सुंदरता को व्यक्त करते है। वे कहते है की वह हसोड़ किस्म का बालक था। उसकी हँसी में इतनी मिठास थी की ऐसा लगता था की उसकी हँसी फूल की पंखुड़ियों के सामान बिखर रही हो, और अपनी और आकर्षित कर रहा हो।
24. नागरी को देवनागरी क्यों कहते है ? लेखक इस संबंध में क्या बताता है ?
उत्तर :- नागरी नाम की उत्पत्ति तथा इसके अर्थ के बारे में विद्वानों में बड़ा मतभेद है । एक मत अनुसार गुजरात के नागर ब्राह्मणों ने पहले नागरी लिपि का इस्तेमाल किया। इसलिए इसका नाम नागरी पड़ा। एक दूसरे मत के अनुसार बाकी नगर सिर्फ नगर है, परन्तु काशी देवनगरी है। इसलिए काशी में प्रयुक्त लिपि का नाम देवनागरी पड़ा।
25. गुर्जर प्रतिहार कौन थे ?
उत्तर :- विद्वानों का विचार है कि गुर्जर-प्रतिहार बाहर से भारत आए थे। ईसा की आठवीं सदी के पूवार्द्ध में अवंती प्रदेश में इन्होंने अपना शासन स्थापित किया और बाद में कन्नौज पर भी अधिकार कर लिया था । मिहिरभोज, महेन्द्रपाल आदि प्रख्यात प्रतिहार शासक हुए।
26.अपने शब्दों में पहली बार दिखें बहादुर का वर्णन कीजिए ।
उत्तर :- पहली बार दिखे बहादुर का वर्णन करते हुए अमरकांत जी कहते है की ठिगना, चकइठ शरीर, गोरा रंग और चपटा मुहँ, सफ़ेद नेकर, आधी बाह की ही सफ़ेद कमीज और भूरे रंग का जूता पहने गले में स्काउटों की तरह रुमाल बांधे लगभग 12-13 वर्ष के उम्र का लड़का था।
27. बहादुर अपने घर से क्यों भाग गया था ?
उत्तर :- लेखक अमरकांत जी के कथनानुसार बहादुर नेपाल की तराई में स्थित एक ग्रामीण बालक था। जिसके पिता की मृत्यु एक युद्ध में हो गया था अतः घर का सारा बोझ उसकी माँ पर आ गई थी। एक दिन बहादुर को भैंस चराने जंगल भेजती है लेकिन बहादुर अपने खेल में मस्त हो जाता है। परिणामस्वरूप भैंस, एक किसान के फसल को चर जाती है। किसान भैंस की पिटाई करता है। भैंस की पिटाई देखकर बहादुर की माँ भैंस से दुगनी पितयादुर को कर देती है। इससे गुस्सा होकर बहादुर घर छोड़ कर भाग जाता है।
28. बहादुर के नाम से 'दिल' शब्द क्यों उड़ा दिया गया ?
उत्तर :- लेखक अमरकांत जी के कथनानुसार बहादुर का नाम दिल बहादुर उसकी माँ के द्वारा रखा गया था , जो मातृत्व प्रेम का सूचक था। लेकिन अब बहादुर निर्मला जी के यहाँ नौकर बन कर आया था। जहाँ मातृत्व प्रेम का कोई स्थान नहीं होता है। नौकर और मालिक के बीच तो केवल स्वार्थ का संबंध होता है। अतः इसके नाम से दिल को हटाकर बहादुर कहा जाने लगा।
29. बहादुर के आने से लेखक के घर और परिवार के सदस्यों पर कैसा प्रभाव पड़ा ?
उत्तर :- लेखक अमरकांत जी के कथनानुसार जब उनके परिवार में बहादुर नामक नौकर आ जाता है तो उनके परिवार के सारे सदस्य बिलकुल आराम मतलबी हो जाते है। रात में सवेरे सो जाना और सवेरे देर से जागना उनकी दिनचर्या बन जाती है। छोटे से छोटे काम भी बहादुर को ही करने के लिए कहते है।
30. बहादुर के चले जाने पर सबको पछतावा क्यों होता है ?
उत्तर :- लेखक अमरकांत जी के यहाँ काम करने वाला बहादुर नामक नौकर ईमानदार एवं कर्तव्य निष्ठा था। जो आज के समय में बहुत ही मुश्किल से मिलते है। अपनी ईमानदारी का प्रमाण देते हुए वह भागने पर कुछ चुरा के ले जाने के बजाय अपना भी छोड़ कर चला जाता है। इसलिए लेखक के सम्पूर्ण परिवार पश्चात रूपी सागर में दुब जाते है।
31. निर्मला को बहादुर के चले जाने पर किस बात का अफ़सोस हुआ ?
उत्तर :- लेखक की पत्नी को बहादुर के घर छोड़ कर चले जाने पर खास तौर पर इस बात की अफ़सोस होती है की यदि वो कुछ चुराकर ले जाता तो कुछ बात थी, लेकिन वह तो अपना भी सब कुछ छोड़कर चला गया।
32. परंपरा का ज्ञान किनके लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है और क्यों ?
उत्तर :- लेखक रामविलास शर्मा जी की दृष्टि में परम्परा का ज्ञान खास कर उन लोगों के लिए ज्यादा आवश्यक है साहित्य में युग परिवर्तन करना चाहते है तथा लकीर के फ़क़ीर नहीं है, रूढ़ियाँ तोड़कर क्रांतिकारी साहित्य रचना साहहते है।
33.बहुजातीय राष्ट्र की हैसियत से कोई भी देश भारत का मुकाबला क्यों नही कर सकता ?
उत्तर :- लेखक रामविलास शर्मा जी की दृष्टि में बहुजातीय राष्ट्र की हैसियत से कोई भी देश भारत का मुकाबला इसलिए नहीं कर सकता क्योकि यहाँ राष्ट्रीयता एक जाती द्वारा दूसरी जातियों पर राजनितिक प्रभुत्व कायम कर के स्थापित नहीं हुई है। बल्कि यह तो मुख्यतः संस्कृति और इतिहास का देन है।
34. लखनऊ और रामपुर से बिरजू महाराज का क्या संबंध है ?
उत्तर :- लखनऊ में बिरजू महाराज का जन्म हुआ था। और रामपुर में उनका लालन-पालन तथा नृत्य कला की शिक्षा प्रारम्भ किये थे। अतः लखनऊ बिरजू महाराज का जन्म स्थल तथा रामपुर उनका कर्म स्थल से संबंध था।
35. नृत्य की शिक्षा के लिए पहले बिरजू महाराज किस संस्था से जुड़े और वहाँ किनके संपर्क में आए ?
उत्तर :- बिरजू महाराज नृत्य की शिक्षा के लिए पहले दिल्ली में स्थित हिंदुस्तानी डांस म्यूजिक नामक स्कुल में जुड़े और वहां निर्मला जी जोशी के संपर्क में आए।
36. बिरजू महाराज के गुरु कौन थे ? उनका संक्षिप्त परिचय दें |
उत्तर :- बिरजू महाराज के गुरु उनके स्वंय के पिताजी थे। जिन्होंने 500 नजराना लेकर उन्हें कन्दा बांधा था। और स्पष्ट शब्दों में कहा था की यह 500 रुपया तुम लोगो पर मैं खर्च नहीं करूँगा। क्योकि यह पैसा केवल मेरा है।
37. बिरजू महाराज ने नृत्य की शिक्षा किसे और कब देनी शुरू की ?
उत्तर :- बिरजू महाराज नृत्य की शिक्षा सीता राम वागले नामक एक अमीर घर के लड़के को देना शुरू किये। जब उनके पिताजी की मृत्यु हो गई।
38. बिरजू महाराज कौन-कौन से वाध्य बजाते थे ?
उत्तर :- बिरजू महराज जब रियाज करते-करते थक जाते थे तो कभी-कभी सितार, गिटार, हार्मोनियम, बांसुरी, सरोद तो कभी तबला बजा लिया करते थे।
39. बिरजू महाराज की अपने शागिर्द के बारे में क्या राय है ?
उत्तर :- - बिरजू महाराज अपने अधीनस्थ नृत्य सिखने वाले शागिर्दों के बारे में कहते है की शाश्वती,वैदोनिक ,फिलिप,मैक्लीन टॉक जैसे शिष्य थे। जिन पर कुछ उम्मीद थी की नृत्य के क्षेत्र में अपना नाम रौशन करेंगे। इसके अलावा तीरथ प्रताप, प्रदीप कृष्ण मोहन राम मोहन आदि ऐसे शागिर्द थे जिन्हे थोड़ा सा काम मिल गया,कुछ तालियां बटोर ली। इतने में वे संतुष्ट हो जाते थे। यहाँ तक की मेरा बेटा भी इसी तरह का है।
40. पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज क्या फर्क पाते है ?
उत्तर :- पुराने और आज के नर्तकों के बीच बिरजू महाराज सबसे बड़ा फर्क यह मानते है की पहले के कलाकार केवल अपने नाच पर ध्यान देता था न की रंग मंच की बनावट, वाद्ययंत्रों के महत्व विशेष्य ध्यान देते थे। आज के कलाकार ठीक विपरीत अपने नाच पर कम, विशेष रूप से रंग मंच की वनावट की ,चांदनी लगे है या नहीं, कृत्रिम हवा की व्यवस्था है की नहीं इसके अलावा अच्छे वाद्ययंत्रों की व्यवस्था है या नहीं। इस पर विशेष ध्यान देते है। यही आज के और पहले के कलाकारों में सबसे बड़ा फर्क है।
41. आविन्यों क्या है और वह कहाँ अवस्थित है ?
उत्तर :- आविन्यों दक्षिण फ्रांस में रोम नदी के किनारे बसा एक पुराना शहर है। जो फ़्रांस और यूरोप का एक अत्यंत प्रसिद्ध लोकप्रिय रंग समारोह स्थल है।
42. हर बरस आविन्यों में कब और कैसा समारोह हुआ करता है ?
उत्तर :- हर वर्ष आविन्यों में गर्मी के दिनों में फ्रांस और यूरोप का प्रसिद्ध और लोकप्रिय रंग समारोह होता है।
43.ला शत्रुज क्या है और वह कहाँ अवस्थित है ? आजकल उसका क्या उपयोग होता है ?
उत्तर :- ला शत्रुज एक ईसाई मठ है, जो रोन नदी के दूसरे और आविन्यों का एक और हिस्सा है जिसे विलनत कहा जाता है। वहाँ कार्थसियन सम्प्रदाय का ईसाई मठ अवस्थित है। आजकल इसका प्रयोग रंगमंच और लेखन से जुड़ा हुआ है। यहाँ रंगकर्मी संगीतकार अभिनेता नाटककार आदि अपने रचनात्मक कार्य के लिए आते है।
44. लेखक आविन्यों क्या साथ लेकर गए थे और वहाँ कितने दिनों तक रहे ? लेखक की उपलब्धि क्या रही?
उत्तर :- लेखक अशोक वाजपेयी आविन्यों जाने के क्रम में अपने साथ हिंदी का एक टाइप राइटर, 3-4 पुस्तके और कुछ संगीत के टेप्स ले गए थे। और उस उन्नीस दिनों में 35 कवितायें और 27 गद्य रचनाएँ लिखने की उपलब्धि प्राप्त किये थे।
45. 'प्रतिक्षा करते ही पत्थर' शीर्षक कविता में कवि क्यों और कैसे पत्थर का मानवीकरण करता है ?
उत्तर :- लेखक अशोक वाजपेयी अपने प्रसिद्ध कविता 'प्रतीक्षा करते है पत्थर' में सुनसान एवं निविद स्थान पर वर्षों-वर्ष से पड़े हुए पत्थरों के जीवन को मानवीकृत करते हुए कहते है की जिस तरह मनुष्य अपनी किसी अभिलाषा के पूर्ति के लिए विभिन्न प्रकार के विषम परिस्थितियों से लड़ते हुए प्रतिक्षारह रहते है। उसी तरह से पत्थर भी किसी अज्ञात कामना लिए वर्षों वर्ष से प्रतीक्षाद्ध है।
46. आविन्यों के प्रति लेखक कैसे अपना सम्मान प्रदर्शित करते है ?
उत्तर :- लेखक अशोक वाजपेयी अपने उन्नीस दिन के प्रयास में जो 35 कविताएँ और 27 गद्य रचनाएँ लिख पाने की उपलब्धि प्राप्त किए उसके लिए कृतज्ञता अथवा सम्मान प्रदर्शित करते हुए कहते है की ला शत्रुज में जो पाया उसके लिए मेरे मन में गहरी कृतज्ञता है और जो मैंने गवाया उसकी गहरी पीड़ा ।
47.झोले में मछलियाँ लेकर बच्चे दौड़ते हुए पतली गली में क्यों घुस गए ?
उत्तर :- बच्चे झोले में मछलियाँ लेकर दौड़ते हुए पतली गली में इसलिए घुस गए, क्योकि तीनों मछलीयों में से एक मछली को कुएँ में डालने की योजना उनके मन में थी। इसीलिए मछली मर न जाएं इसीलिए जल्दी घर पहुंचने के लिए पतली गली में घुस गया।
48. मछली को छूते हुए संतु क्यों हिचक रहा था ?
उत्तर :- चुकी सन्तु अभी कम उम्र का एक बालक है, वह मछली को छूने से डरता है उसे लगता है की मछली इसे कही काट न ले । अतः नरेन के बार-बार कहने के बाबजूद भी संतु मछली को छूने से हिचक रहा है ।
49. घर में मछली कौन खाता था और वह कैसे बनायीं जाती थी ?
उत्तर :- घर में मछली केवल पिताजी तथा नौकर भगु खाते है । अतः जब भी मछली घर में लायी जाती है । भगु उसे पाटे पर रखकर कटता है, अच्छी तरह धोता है फिर उसे मसाले में लपेट कर अंगीठी जलाकर भुनता है और फिर खाया जाता है ।
50. पिताजी किससे नाराज थे और क्यों ?
उत्तर :- पिताजी संतु,नरेन तथा दीदी पर नाराज थे,क्योंकि पिताजी बहुत ही रूचि के साथ मछली खाते थे। अतः जब-जब भी मछली घर लाये जाते थे तब तब इन तीनों बच्चों का व्यवहार मछली के रक्षा के प्रति उजागर होता था। इससे पिताजी नराज हो जाते थे।
51. मछली और दीदी में क्या समानता दिखलाई पड़ी ? स्पस्ट करें ।
उत्तर :- लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के अनुसार मछली और दीदी में सबसे बड़ी समानता यह है की जिस प्रकार मछली परोपकारी होती है स्वंय मरकर दूसरों का आहार बनती है उसी तरह दीदी के ह्रदय में भी समस्त जीवो के लिए अशीम प्यार है। किसी को भी दुखी देखना नहीं चाहती है तभी तो जब भी मछलीघर लाई जाती है उस पर होने वाले अत्याचारी कल्पना कर सिसक सिसक कर रोने लगती है।
52. डुमराँव की महत्ता किस कारण से है ?
उत्तर :- डुमराँव की महत्ता इसलिए है की सहनाई बजाने के लिए रीड का प्रयोग होता है। रीड एक प्रकार के घास जिसे नरकट कहते है। इसी से रीड बनाई जाती है। जो डुमराँव के आस-पास के नदियों के कछारों में पैटी है। इसलिए शहनाई के लिए डुमराँव का अत्यधिक महत्व है।
53.मुहर्रम पर्व से बिस्मिल्ला खां के जुडाव का परिचय पाठ के आधार पर दें ।
उत्तर :- लेखक यतीन्द्र मिश्र के अनुसार मुहर्रम पर्व से बिस्मिल्ला खां का जुड़ाव इस प्रकार है की इन दिनों उनके खनदान का कोई व्यक्ति न तो शहनाई बजाता है ना ही किसी संगीत के कार्यक्रम में सिरकत करता। आठमी तारीख का खास महत्व होती है। इस दिन खां साहब खड़े होकर शहनाई बजाते व दालमंडी में फातमान के करीब 8 किलोमीटर की दुरी तक पैदे रोते हुए बजाते है। और इस तरह एक बड़े कलाकार का सहज मानवीय रूप चित्रित हो उठता है।
54. गांधीजी बढियाँ शिक्षा किसे कहते है ?
उत्तर :- महात्मा गाँधी जी के दृष्टि में अहिंसक प्रतिरोध तथा जिसमें विरोध भी हिंसा रहित किया जाता है, वही सबसे बढ़िया शिक्षा कहलाता है जो अक्षर ज्ञान की शिक्षा के बाद नहीं पहले होनी चाहिए।
55. शिक्षा का अभिप्राय गांधीजी क्या मानते है ?
उत्तर :- गाँधी जी की दृष्टि में शिक्षा का अभिप्राय यह है की बच्चे और मनुष्य के शरीर बुद्धि और आत्मा के सभी उत्तम गुणों को प्रकट किया जाए। क्योकि पढ़ना-लिखना न तो शिक्षा का अंत है और न ही आदि ।
56. शिक्षा का ध्येय गांधीजी क्या मानते थे और क्यों ?
उत्तर :- गाँधी जी की दृष्टि में शिक्षा का ध्येय चरित्र निर्माण जिसमें साहस, बल, सदाचार और बड़े लक्ष्य के लिए काम करने में आत्मोत्सर्ग की शक्ति का विकास करना होगा। जो साक्षरता से ज्यादा महत्वपूर्ण है। सच कहा जाए तो किताबी ज्ञान इस बड़े लक्ष्य का एक साधन मात्र है।
57. दूसरी संस्कृति से पहले अपनी संस्कृति की गहरी समझ क्यों जरुरी है ?
उत्तर :- गाँधी जी की दृष्टि में दूसरी संस्कृति से पहले अपनी संस्कृति की गहरी समझ इस लिए जरुरी है क्योकि कोई दूसरी संस्कृति में इतने रत्न भण्डार नहीं है जितनी अपनी संस्कृति में। मेरा धर्म यह आग्रह करता है की स्वंय अपनी संस्कृति को हृदयांकित करके उसके अनुसार आचरण किया जाए क्योकि वैसा न किया गया तो उसका परिणाम सामाजिक आत्महत्या होगी। और वहाँ दूसरी संस्कृति को तुच्छ समझने या उसके उपेक्षा करने का निषेध करता है।
58. कवि किसके बिना जगत में यह जन्म व्यर्थ मानता है ?
उत्तर :- कवि राम-नाम के बिना जगत में यह जन्म व्यर्थ मानता है। राम नाम के बिना व्यतीत होने वाला जीवन केवल विष का भोग करना है।
59. वाणी कब विष के समान हो जाती है ?
उत्तर :- कवि गुरुनानक कहते है की जीवन में राम का नाम नहीं लेने से वाणी विष के समान हो जाती है।
60. कवि की दृष्टि में ब्रह्म का निवास कहाँ है ?
उत्तर :- गुरुनानक कहते है कि ब्रहम का निवास तो मानव शरीर ही है जिसके ह्रदय से प्रभु का वास हो है। परंतु ब्रहम का निवास उस मनुष्य में हो सकता है जो काम, क्रोध, लौकिक, सुख-कामना, लोभ, माया, मोह, भय, अभिमान से परे हो ।
61. कवि ने माली - मालिन किन्हें और क्यों कहा है ?
उत्तर :-कवि ने माली - मालिन कृष्ण और राधा को कहा है। क्योंकि, कवि राधा-कृष्ण के प्रेममय युगल को प्रेम-भरे नेत्र से देखा है । यहाँ प्रेम को वाटिका मानते हैं और उस प्रेम-वाटिका के माली - मालिन कृष्ण-राधा को मानते हैं।
62. कृष्ण को चोर क्यों कहा गया है ?
उत्तर :- कृष्ण का व्यक्तित्व आकर्षक है, सूरत मोहिनी है भला ऐसे रूप को देखकर किसका मन आपने वश में रह सकता है। जो भी उन्हें देखता है आपना सुख-दुख खो देता है। ऐसा लगता है जैसे अपना ही दिल अपने वश में न हो अर्थात किसी ने चुरा लिया है, इसी अर्थ में कृष्ण को चोर कहा गया है।
63. कवि प्रेममार्ग को 'अति सूधो' क्यों कहता है ?
उत्तर :- कवि ने प्रेममार्ग को 'अति सूधो' इसलिए कहा क्योंकि यह सीधा है इस पर चलने के लिए किसी चतुराई या छल की आवश्यकता नहीं है। इस मार्ग की विशेषता यह है कि इस मार्ग पर वही चल सकता है, जिसका हृदय निर्मल, कपट और छल से रहित हो। प्रेम जीवन का ऐसा पावन मार्ग है जिसपर चलनेवाला पथिक कभी-भी नहीं थकता है।
64.कवि कहाँ अपने आसुँओं को पहुँचाना चाहता है और क्यों ?
उत्तर :- कवि आँसू के माध्यम से विरह विकल आत्मा द्वारा प्रेमिका के अंतर्मन को छू लेना चाहता है। आँख में आँसू दृष्टिगत नहीं होता है। किन्तु अश्रुधारा निरंतर बहती हैं कवि अपने आँसू को उन सज्जनों के आँगन में पहुँचाना चाहता है जहाँ प्रेम की वर्षा होती है। प्रेम की वर्षा अपने लिए नहीं औरों के लिए होती है।
65. परहित के लिए ही देह कौन धारण करता है ? सपष्ट कीजिए ।
उत्तर :- दूसरों के लिए शरीर धारण करने वाले सतत् अपना जीवन समर्पित करने के लिए उद्धत रहते हैं। बादल अपने लिए नहीं संसार के लिए अवतरित होता है। जन कल्याण ही उसका प्रमुख कार्य है। जल से परिपूर्ण रहने पर भी बादल अपने में अग्नि समाविष्ट किए रहता है।
66. कवि को भारत में भारतीयता क्यों नही दिखाई पड़ती ?
उत्तर :- कवि को भारत में स्पष्ट दिखाई पड़ता है कि यहाँ के लोग विदेशी रंग में रंगे हैं। खान-पान, बोल- चाल, हाट-बाजार अंग्रेजियत ही अंग्रेजियत है। यहाँ के लोग अपनी सभ्यता-संस्कृति को निम्न दृष्टि से देखते है। अतः कवि कहते हैं कि भारत में भारतीयता दिखाई नहीं पड़ती है।
67. कवि समाज के किस वर्ग की आलोचना करता है और क्यों ?
उत्तर :- कवि समाज के प्रतिनिधि वर्ग की आलोचना करता है। प्रतिनिधित्व करने वाले लोग स्वार्थ की पूर्ति करने में अपनी सभ्यता-संस्कृति आदि को भी गिरवी रखने में हिचकते नहीं है। यहाँ व्यवस्था के नाम पे लोगों को ठगते है।
68. कवि ने 'डफाली' किसे कहा है और क्यों ?
उत्तर :- कवि ने डफाली दास वृति की चाह रखनेवाले को कहा है। सभी धर्म के लोगों ने नौकरी की खोज में अपना मान-सम्मान समर्पित कर दिया है। नौकर बनकर स्वामी की ठकुरसुहाती करना ही उनके लिए उत्तम धन है। झूठी प्रशंसा उनके जीवन का अभिन्न अंग बन गया है। या, विदेशी रीति-नीति, खान-पान, वेशभूषा, भाषा-शैली को अपनाने वाले को डफाली कहा है । पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति को अपनाने वाले तथा अपनी सभ्यता-संस्कृति को हेय दृष्टि से देखने वाले को इफालो कहा है।
69 नेताओं के बारे में कवि की क्या राय है ?
उत्तर :- देश के जनप्रतिनिधि अपने स्वार्थ की पूर्ति में लगे हुए है। उन्हें अपने धोती सँभालने में ही समय व्यतीत हो जाता है। वे देश की अर्थवयवस्था को सुधार देंगे, बेरोजगारी को दूर कर देंगे, भ्रष्टाचार को मिटा देंगे अदि ऐसी कोरी कल्पना में लगे रहते है। उन्हें अपनी कुर्सी की चिंता रहती है जनता या देश की नहीं । देश की स्थीति सुधरे या नहीं अपनी स्थिति उन्हें जरूर सुधर जानी चाहिए।
70. कविता के प्रथम अनुच्छेद में कवि भारतमाता का कैसा चित्र प्रस्तुत करता है ?
उत्तर :- कवि प्रथम अनुच्छेद में भारतमाता के रूपों का सजीवात्मक रूप प्रदर्शित किया है। गाँवों में बसने वाली भारतमाता आज धूल-धूसरित शस्य - श्यामला न रहकर उदासीन बन गई है। उसका आँचल मैला हो गया है। गंगा-यमुना के निर्मल जल प्रदूषित हो गए है। इसकी मिट्टी पहले जैसे नहीं रहे। आज यह उदास हो गई है।
71.भारतमाता अपने ही घर में प्रवासिनी क्यों बनी हुई है ?
उत्तर :- भारत को अंग्रेजों ने गुलामी की जंजीर में जकड़ रखा था। परतंत्रता की बेड़ी में जकड़ी, काल के कुचक्र में फंसी विवश, भारतमाता चुपचाप अपने पुत्रों पर किये गये अत्याचार को देख रही थी। इसलिए कवि ने परतंत्रता को दर्शाते हए मुखरित किया है कि भारतमाता अपने ही घर में प्रवासिनी बनी है।
72. कविता में कवि भारतवासियों का कैसा चित्र खींचता है ?
उत्तर :- प्रस्तुत कविता में कवि ने भारतवासियों की विक्षुब्धता, उदासी, दीनता आदि का सजीवात्मक चित्रण किया गया है। सोने की चिड़ियां कहलाने वाली भारत माता की संतान नग्न, अर्द्धनग्न और भूखी है। सामंतवादियों के द्वारा शोषित है। अशिक्षा, निर्धनता आदि के कारण किसी तरह जीवन ढोने के लिए भारतवासी विवश है।
73. कवि जनता के स्वप्न का किस तरह चित्र खींचता है ?
उत्तर :- भारत की जनता सदियों से, युगो युगो से राजा के अधीनस्थ रही है लेकिन कवि ने कहा है कि चिरकाल से अंधकार में रह रही जनता राजतंत्र को उखाड़ फेंकने के सपने देख रहे हैं । राजतंत्र समाप्त होगा और जनतंत्र कायम होगा, अभिषेक राजा नहीं बल्कि प्रजा का होगा।
74. कवि की दृष्टि में आज के देवता कौन है और वे कहाँ मिलेंगे ?
उत्तर :- कवी की दृष्टि में आज के देवता कठोर परिश्रम करने वाले कृषक और मजदुर है। वे पत्थर तोड़ते हुए या खेत-खलियानों में काम करते हुए मिलेंगे। जिसे आज का देवता कहा है। भारत की आत्मा गाँवों में बसती है।
75. हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में क्या है ?
उत्तर :- हिरोशिमा में मनुष्य की साखी के रूप में अमेरिका द्वारा गिराया गया परमाणु बम है। झुलसे पत्थरो एवं सीमेंट से निर्मित टूटी-फूटी सड़को पर बनी छायाएँ दुर्दान्त मानवीय विभीषिका की कहानी कहती है। वर्षों बीत जाने के बाद भी हिरोशिमा वासी इस त्रासदी का दंश झेलने के लिए विवश है।
76. कवि को वृक्ष बुढा चौकीदार क्यों लगता था ?
उत्तर :- कवि को बूढ़ा वृक्ष चौकीदार इसलिए लगता था क्योकि बूढ़े चौकीदार में फुर्तीलापन और चमक-दमक समाप्त हो जाते है। वह हर क्षण चौकीदार की तरह घर के सामने बड़ा पुराना वृक्ष उसके घर, गावं, वातावरण आदि का रखवाली करता था। यही कारण है कि कवि को वह बूढ़ा वृक्ष चौकीदार सा लगता था ।
77. कवि गरीब बस्तियों का क्यों उल्लेख करता है ?
उत्तर :- गरीब या अमीर होना ईश्वर की कृपा पर निर्भर करता है। ईश्वर ने जिसे अमीर बनाया है, वह उसके सौभाग्य का फल है। उसी प्रकार गरीब होना भी निश्चित है। गरीब अपना जीवनयापन अजीबोगरीब त्वेतरीकों से करता है। अत्याचारियों के विरोध के बदले देवी का जागरण पूर्ण उत्साह के साथ करते है, लेकिन अपने पर अत्याचार ढाने वालों के जुल्म का प्रतीकार नहीं करते है। कवि ने गरीब बस्तियों का उल्लेख कर, यह स्पष्ट करना चाहा है कि अज्ञानता के अंधकार में डूबा व्यक्ति अपने अधिकार से अनजान होता है। इसी से वह शोषण का शिकार होता है और हर जुल्म को ईश्वर का विधान मानकर सहन करता रहता है।
78. कवि किन आत्याचारियों का और क्यों जिक्र करता है ?
उत्तर :- कवि यहाँ उन अत्याचारियों का जिक्र करता है जो अपने सामर्थ्य के नाम पर हजारों अत्याचारों को पैदा करते है। आज अत्याचारियों के पास सभी मूल सुविधाएँ है। वे असहायों को सताने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाते है। शोषित और कमजोर वर्ग के लोग किसी तरह जीवन जीने के लिए विवश है।
79. खालिस बेचैनी किसकी है ? बेचैनी का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर :- खालिस बेचैनी खरगोश की है । 'क' सीखकर 'ख' सीखने के तरफ पर अग्रसर होता हआ साधक की जिज्ञासा बढ़ती है और वह आगे बढ़ने को बेचैन हो जाता है । बेचैनी का अभिप्राय है आगे बढ़ने की लालसा, जिज्ञासा एवं कर्म में उत्साह |
80. बेटे के लिए 'ड़' क्या है और क्यों ?
उत्तर :- बेटे के लिए 'ड़ उसके माँ का गोद है। 'ड़' अक्षर ज्ञान उसे कठिन लगता है, उसका मन उब जाता है। वह माँ की गोद में बैठना चाहता है। 'ड़' को बच्चा माँ समझता है और बिंदु को माँ के गोद में बैठा हुआ बेटा समझती है।
81.बेटे के आँसू कब आते है और क्यों ?
उत्तर :- बेटे माँ की गोद में बैठना चाहता है। 'ड़' अक्षर सिखने में विफलता आ जाती है, बार-बार कोशिश करने पर भी सफलता हाथ नहीं लगती है। 'ड़' अक्षर ज्ञान की विफलता पर ही बेटे को आँसू आ जाते है।
82. कवि किस तरह के बंगाल में एक दिन लौटकर आने की बात करता है ?
उत्तर :- कवि धान से लहलहाते खेत, बहती हुई नदी के किनारे एक दिन लौटकर आने की बात कहता है। कवि अलग-अलग योनियों में जन्म लेकर भी बंगाल की धरती पार ही आना चाहता है।
83. कवि अपने को जलपात्र और मदिरा क्यों कहता है ?
उत्तर :- कवि भली-भाँति जानते है की भक्त और भगवान दोनों एक-दूसरे के पूरक है। मदिरापान करनेवाला जलपात्र अपने साथ अवश्य रखता है। जलपात्र के बिना मदिरापान कैसे किया जा सकता है, ठीक उसी प्रकार भगवान की गुणगाथा भक्त के बिना कैसे गायी जायेगी । इसी कारण कवि अपने को जलपात्र और मदिरा कहता है।
84. रंगप्पा कौन था ? और वह मंगमा से क्या चाहता था ?
उत्तर :- रंगप्पा गाँव का लंपट और जुआड़ी था । वह मंगग्मा से धन चाहता था । इतना ही नहीं वह मंग के अनाथ समझकर उसकी इजत भी लूटना चाहत था ।
85. मंगम्मा का अपनी 'बहू के साथ किस बात को लेकर विवाद था?
उत्तर :- मंगम्मा का अपनी बहू के साथ अधिकार को लेकर विवाद था। मंगम्मा अपने बेटे पोते और बहू पर भी अपना अधिकार बनाये रखना चाहती थी। जिसे उसकी बहू मानने को तैयार नहीं थी और यही विवाद का कारण था ।
86. मंगम्मा का चरित्र चित्रण कीजिए |
उत्तर :- मंगम्मा गाँव की सीधी-साधी नारियों का प्रतिनिधित्व करती है। आज गाँव - शहर सभी जगह मंगम्मा का प्रतिमूर्ति मिलती है। वह अपमान और कष्ट सहकर भी प्रतिष्ठा से रहना चाहती है। वह बेटे-बहू और पोते पर अपना स्वत्व सर्वदा बनाये रखना चाहती है। इस प्रकार वह एक भारतीय नारी है जो सम्मान के साथ जीना चाहती है।
87. लक्ष्मी के व्यक्तित्व पर विचार करें।
उत्तर :- लक्ष्मी इस कहानी का प्रमुख पात्र है। उसके व्यक्तित्व में कूट-कूटकर दृढ़ता और साहस भरा है। गाँव में मात्र एक वीघा उसकी भू-खंड है, पर पूर्व अनुभव के आधार पर न उसने घर छोड़ी और न गाँव | अच्युत को भी समाज रक्षा में लगा दिया। उसके हृदय में मातृत्व की जलधार बहती है। अच्युत के लिए तो उस विलम्व किया ही मूछों से जागने पर एक मुर्दे बच्चे को छाती में भींच लेती है। इस प्रकार लक्ष्मी के व्यक्तित्व में नारी सुलभ मातृत्व के साथ-साथ दृढ़ता और साहस का अच्छा मिश्रण है।
88.लक्ष्मी कौन थी ? उसकी पारिवारिक परिस्थिति का चित्र प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर :- लक्ष्मी एक दीन महिला थी जिसके पति कलकत्ता में रहकर नौकरी करता था। वह जो पैसा भेजता था, उससे बच्चों के साथ लक्ष्मी का भरण-पोषण संभव नहीं था। उसके पास मात्र एक बीघा भूखंड था। प्रकृति के प्रकोप के कारण उसमें हल चलवाने के पैसे भी बेकार जाते थे । अतः तहसीलदार के यहाँ काम - काज करके वह जीविका चलाती थी। उसका बड़ा बेटा अच्युत दो बेटियाँ तथा एक नन्हा मुन्ना और अपने स्वयं का भरण-पोषण की सारी जिम्मेवारी उसी पर थी । अतः उसका पारिवारिक स्थिति दयनीय थी ।
89. पाप्पाति कौन थी और वह शहर क्यों लायी गयी थी ?
उत्तर :- पाप्पाति वल्लि अम्माल की पुत्री थी और गाँव के प्राइमरी हेल्थ सेन्टर के डॉक्टर के कथनानुसार मदुरै शहर के बड़े अस्पताल में चिकित्सा के लिए लायी गयी थी।
90. वल्लि अम्माल का चरित्र-चित्रण करें।
उत्तर :- वल्लि अम्माल इस कहानी की प्रधान पात्र है। वह पूर्ण अशिक्षित और वातावरण से अपरिचित भी है। देहाती वातावरण में रहने के कारण मुखर भी नहीं थी। वह पुराने देहात की, पुराने रिवाज में पली ना थी। उसे अस्पताल का दौड़ और दवाओं का गंध भी असहय था । उसे गाँव के अधकचरे झोला छाप वैद्य, डॉक्टरों, ओझाओं और देवी-देवताओं पर विश्वास था। वह शहरी वातावरण से अनभिज्ञ अशिक्षित और डरपोक प्राचीन भारतीय नारी थी।
91. सीता अपने ही घर में क्यों घुटन महसूस करती है ?
उत्तर :- सीता विधवा होने के बाद बेटे और बहुओं से उपेक्षित हो गई है। बात-बात पर उसे मात्र दो रोटियों के लिए ताने सुनने पड़ते हैं। इससे वह सर्वदा अपमानित महसूस करती है । उसे लगता है कि धरती आकाश सिमटकर बहत छोटा हो गया है। इसलिए सीता अपने ही घर में घुटन महसूस करती है।
92. सीता का चरित्र चित्रण करें ।
उत्तर :- सीता एक विधवा पर सहिष्णु महिला थी। वह बहुओं की विषाक्त बातों का कभी उत्तर नहीं देती। वह अपने हृदय को पत्थर कर अपने ही घर में विराना बनकर रह रही थी। बेटों ने उसे एक-एक महीने पाली पर रखा तो वह कुछ नहीं बोली पर जब उसे 50 रु० प्रतिमाह देने की बात बेटों ने बिना उससे राय लिए । ही तय कर की तो उसका स्वाभिमान जगा और वह घर से निकल पड़ी। इस प्रकार सीता सुख-दु:ख में समरस रहनेवाली, शान्त प्रकृति की स्वाभिमानिनी और दृढ़ निश्चय प्रकृति की महिला है।
93. 'कंचन माटी जानै' की व्याख्या करें।
उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति हमारी पाठ्य पुस्तक हिंदी साहित्य के “जो नर दुःख में दुख नहिं मानै' शीर्षक से उद्धृत है। प्रस्तुत गद्यांश में निर्गुण निराकार ईश्वर के उपासक गुरुनानक सुख-दुख में एकसमान उदासीन रहते हुए लोभ और मोह से दूर रहने की सलाह देते हैं। प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति में कवि ब्रह्म को पाने के लिए सुख-दुःखं से परे होना परमावश्यक बताते हैं। वे कहते हैं कि ब्रह्म को वही प्राप्त कर सकता है जा लोक- मोह, ईर्ष्या-द्वेष; काम-क्रोध से परे हो । जो व्यक्ति सोना को अर्थात् धन का मिट्टी के समान समझकर परब्रह्म की सच्चे हृदय से उपासना करता है वह ब्रह्ममय हो जाता है। जो प्राणी सांसारिक विषयों में आसक्ति नहीं रखता है। उस प्राणा, ब्रह्म निवास करता है।
94. “ मन पावन चितचोर, पलक ओट नहिं करि सकौं की व्याख्या करें।
उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति कृष्णभक्त कवि रसखान द्वारा रचित हिंदी पाठ्य पुस्तक के 'प्रेम- अयनि श्रीराधिका' पाठ से उद्धृत है। इसमें कवि ने कृष्ण की मनोहर छवि के प्रति अपने हृदय की रीझ को व्यक्त किया है। प्रस्तुत पंक्ति में कवि कहते हैं कि नन्दकिशोर में जिस दिन से चित्त लग गया है उन्हें छोड़कर कहीं नहीं भटकता । कृष्ण को अपना प्रीतम बताते हुए कहते हैं कि मन को पवित्र करने वाले चित्तचोर को आठों पहर देखते रहने की कामना समाप्त नहीं होती । कृष्ण मन को हरने वाले हैं। चित्त को चुराने वाले हैं। उनकी मोहनी मूरत अपलक देखते रहने की आकांक्षा कवि व्यक्त करते हैं।
95. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव सौंदर्य स्पष्ट करे :
“धूप में वारिश में; गर्मी में सर्दी में
हमेशा चौकन्ना; अपनी खाकी वर्दी में”
उत्तर :- कवि ने इन पंक्तियों में एक बूढ़ा वृक्ष को युगों-युगों का प्रहरी मानते हुए सभ्यता-संस्कृति की रक्षा हेतु मानव को जगाने का प्रयास किया है। कवि की कल्पना ने वृक्ष को अभिभावक, चौकीदार, पहरुआ के रूप में चित्रित कर मानवीयता प्रदान किया है। इसमें वृक्ष की चेतनता, कर्तव्यनिष्ठता एवं आत्मीयता दर्शाई गई है।
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