Bihar Board 10th Metric Hindi Exam 2025 : हिन्दी VVI महत्वपूर्ण ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव प्रश्न उत्तर के साथ
Bihar Board Metric Hindi Viral Question 2025: बिहार बोर्ड 10वीं हिन्दी परीक्षा 2025 (BSEB Metric Viral Question 2025) के लिए सबसे महत्वपूर्ण और वायरल प्रश्न यहां दिए गए हैं। इस आर्टिकल में हम आपको सभी प्रमुख ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव प्रश्न प्रदान कर रहे हैं, जो आगामी परीक्षा में पूछे जा सकते हैं।
इन प्रश्नों को अच्छे से तैयार करके आप अपनी परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त कर सकते हैं। सभी छात्रों से अनुरोध है कि इस आर्टिकल को ध्यानपूर्वक पढ़ें और आगामी परीक्षा के लिए अपनी तैयारी को और बेहतर बनाएं।
Bihar Board Class 10th Hindi Most Important Question 2025
आप नीचे दिए गए हिन्दी के Most VVI Question (BSEB Metric Important Question 2025) के महत्वपूर्ण प्रश्न को अच्छी तरह से पढ़ सकते है। अब आपकी परीक्षा में कुछ ही घंटे बचे है, जिससे हिन्दी के पेपर की तैयारी कर सकते हैं और अच्छे मार्क्स ला सकते हैं।
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Bihar Board Class 10th Hindi Most Important Objective Question 2025
1. श्रम विभाजन और जाति प्रथा’ के लेखक कौन हैं ?
(a) डॉ० राममनोहर लोहिया
(b) बाबासाहब भीमराव अम्बेदकर
(c) महात्मा गाँधी
(d) डॉ० सम्पूर्णानंद
(a) कहानी
(b) भाषण
(c) निबंध
(d) साक्षात्कार
3. लेखक किस विडंबना की बात करते हैं? विडंबना का स्वरूप क्या है?
(a) आधुनिक युग में जातिवाद का पोषण होना
(b) जातिवाद के प्रति समाज का उदासीनता
(c) जातिवाद का समर्थन करने वाले व्यक्तियों की कमी
(d) जातिवाद का प्राचीन प्रथा के रूप में प्रस्तुत होना
Answer :- (a) आधुनिक युग में जातिवाद का पोषण होना
4. जाति भारतीय समाज में श्रम-विभाजन का स्वाभाविक रूप क्यों नहीं कही जा सकती?
(a) जाति प्रथा मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है
(b) जाति प्रथा में केवल कुछ पेशे होते हैं
(c) जाति प्रथा समाज की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करती
(d) जाति प्रथा अत्यधिक जटिल है
Answer :- (a) जाति प्रथा मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है
5. विष के दांत’ शीर्षक कहानी के कहानीकार कौन हैं ?
(a) मोहन राकेश
(b) कमलेश्वर
(c) प्रेमचंद
(d) नलिन विलोचन शर्मा
Answer :- (d) नलिन विलोचन शर्मा
6. विष के दाँत कैसी कहानी है ?
(a) सामाजिक
(b) ऐतिहासिक
(c) धार्मिक
(d) मनोवैज्ञानिक
Answer :- (d) मनोवैज्ञानिक
7. ‘विष के दाँत’ कहानी किस वर्ग के अंतर्विरोधों को उजागर करती हैं?
(a) निम्न वर्ग का
(b) उच्च वर्ग का
(c) मध्यम वर्ग को
(d) व्यापारी वर्ग का
8. भारत से हम क्या सीखें’ के रचनाकार कौन हैं ?
(a) विवेकानंद
(b) मैक्समूलर
(c) रवींद्रनाथ ठाकुर
(d) दयानंद सरस्वती
Answer :- (b) मैक्समूलर
9. भारत से हम क्या सीखें पाठ में नए सिकंदर’ विशेषण किसके लिए प्रयुक्त हुआ है ?
(a) भारत के वीरों के लिए
(b) यूरोप के वीरों के लिए
(c) युवा अँगरेज अधिकारियों के लिए
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Answer :- (c) युवा अँगरेज अधिकारियों के लिए
10. सर विलियम जोन ने भारत की यात्रा कब की थी ?
(a) 1957 ई. में
(b) 1750 ई में
(c) 1790 ई. में
(d) 1783 ई. में
Answer :- (d) 1783 ई. में
11. ‘देवताओं का राजा’ से किन्हें सम्बोधित किया जाता है ?
(a) महादेव
(b) विष्णु
(c) इन्द्र
(d) ब्रह्मा
Answer :- (c) इन्द्र
12. कौन मनुष्य का आदर्श नहीं बन सकती ?
(a) शेर
(b) बदरियाँ
(c) भालू
(d) हाथी
Answer :- (b) बदरियाँ
13. नाखून क्यों बढ़ते हैं के निबंधकार कौन हैं?
(a) गुलाब राय
(b) शांति प्रिय द्विवेदी
(c) प्रतापनारायण मिश्र
(d) अचर्य हजारी प्रसाद द्विवेद
14. किस देश के लोग बड़े-बड़े नख पसंद करते थे ?
(a) गौड़ देश
(b) कैकय
(c) वाहीक
(d) गांधार
Answer :- (a) गौड़ देश
15. कौन छोटे नखों को पसंद करते थे ?
(a) दाक्षिणात्य
(b) पौर्वात्य
(c) मालव
(d) मध्यदेशीय
Answer :- (a) दाक्षिणात्य
16. नागरी लिपि के आरंभिक लेख हमें कहाँ से मिलते हैं?
(a) पूर्वी भारत
(b) पश्चिमी भारत
(c) दक्षिणी भारत
(d) उत्तरी भारत
17. उत्तर भारत से नागरी लिपि के लेख कब से मिलने लगते है ?
(a) आठवीं सदी
(b) छठी सदी
(c) नौंवी सदी
(d) चौथी सदी
Answer :- (a) आठवीं सदी
18. पहले दक्षिण भारत की नागरी लिपि क्या कहलाती थी?
(a) नंदिनागरी
(b) कोंकणी
(c) ब्राह्मी
(d) सिद्धम
19. ‘मौत का नगर’ किस लेखक की कहानी-संग्रह है ?
(a) अनामिका
(b) महादेवी वर्मा
(c) डॉ० रामविलास शर्मा
(d) अमरकान्त
Answer :- (d) अमरकान्त
20. ‘परम्परा का मूल्यांकन’ पाठ के रचनाकार हैं-
(A) यतीन्द्र मिश्र
(B) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(C) रामविलास शर्मा
(D) गुणाकर मूले
Answer :- (C) रामविलास शर्मा
21. ‘जित-जित मैं निरखत हूँ’ किस विधा की रचना है ?
(A) व्यक्ति चित्र
(B) निबंध
(C) आत्मकथा
(D) साक्षात्कार
Answer :- (D) साक्षात्कार
22. दिल्ली में हिन्दुस्तानी डान्स म्यूजिक स्कूल किनका था ?
(A) निर्मलाजी का
(B) विमलाजी का
(C) श्यामाजी का
(D) प्रतिभाजी का
Answer :- (A) निर्मलाजी का
23. ‘एक पतंग अनंत में’ किनकी रचना है ?
(A) गुणाकर मूले
(B) यतीन्द्र मिश्र
(C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(D) अशोक वाजपेयी
Answer :- (D) अशोक वाजपेयी
24. ‘पेड़ पर कमरा’ किनकी रचना है ?
(A) वीरने डंगवाल
(B) रामविलास शर्मा
(C) रामचन्द्र शुक्ल
(D) विनोद कुमार शुक्ल
Answer :- (D) विनोद कुमार शुक्ल
25. ‘नौकर की कमीज’ किस विधा की रचना है ?
(A) निबंध
(B) कहानी
(C) नाटक
(D) उपन्यास
Answer :- (D) उपन्यास
26. बालाजी मंदिर काशी में किस घाट पर अवस्थित है ?
(A) अस्सी घाट
(B) पंचगंगा घाट
(C) हरिश्चन्द्र घाट
(D) दशाश्वमेघ घाट
Answer :- (B) पंचगंगा घाट
27. बिस्मिल्ला खाँ को किस चीज का बुखार था ?
(A) शहनाई बजाने का
(B) ढोल बजाने का
(C) गाना गाने का
(D) फिल्म देखने का
Answer :- (A) शहनाई बजाने का
28. गाँधीजी को ‘महात्मा’ की उपाधि किसने दी ?
(A) भीमराव अंबेडकर
(B) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
(C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(D) जवाहर लाल नेहरू
Answer :- (B) रवीन्द्रनाथ ठाकुर
29. महात्मा गाँधी का जन्म स्थान है-
(A) पोरबंदर
(B) सूरत
(C) साबरमती
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer :- (A) पोरबंदर
30. महात्मा गाँधी की रचना है-
(A) शिक्षा में हेरफेर
(B) शिक्षा और संस्कृति
(C) गेहूँ और गुलाब
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer :- (B) शिक्षा और संस्कृति
31. दस्तकारी का अर्थ है-
(A) यंत्र पर आधारित
(B) कौशल
(C) हस्त कोशल
(D) दस्तक देनेवाला
Answer :- (C) हस्त कोशल
32. ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ किसकी रचना है ?
(A) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की
(B) डॉ. सम्पूर्णानन्द की
(C) महर्षि अरविन्द की
(D) महात्मा गाँधी की
Answer :- (D) महात्मा गाँधी की
33. रीति मुक्त काव्यधारा के सिरमौर कवि किन्हें माना जाता है?
(A) प्रेमधन
(B) घनानंद
(C) रसखान
(D) कबीर
Answer :- (B) घनानंद
34. ‘डफाली’ का अर्थ क्या है?
(A) गानेवाला
(B) भाषाविद्
(C) बाजा बजानेवाला
(D) नर्तक
Answer :- (C) बाजा बजानेवाला
35. सुमित्रानंदन पंत ने ‘मिट्टी की प्रतिमा उदासिनी’ किसे कहा है ?
(A) मूर्ति
(B) माता
(C) विमाता
(D) भारतमाता
Answer :- (D) भारतमाता
36. ‘दिनकर’ ने अपनी पढ़ाई कहाँ तक की?
(A) इंटरमिडियट
(B) बी० ए० ऑनर्स
(C) एम० ए० ऑनर्स
(D) पी-एच. डी.
Answer :- (B) बी० ए० ऑनर्स
37. ‘चिंता’ अज्ञेय की किस प्रकार की रचना है?
(A) काव्य
(B) कहानी
(C) निबंध
(D) नाटक
Answer :- (A) काव्य
38. कुँवर नारायण ने बूढ़ा चौकीदार किसे कहा है ?
(A) पहाड़
(B) व्यक्ति
(C) वृक्ष
(D) सेनिक
Answer :- (C) वृक्ष
39. ‘झगड़ा-फसाद’ कौन-सा समास है?
(A) दिगु
(B) अव्ययीभाव
(C) द्वन्द्व
(D) तत्पुरुष
Answer :- (C) द्वन्द्व
40. ‘गलत पते की चिट्ठी’ किनकी रचना है?
(A) वीरेन डंगवाल की
(B) यतीन्द्र मिश्र की
(C) अज्ञेय की
(D) अनामिका की
Answer :- (D) अनामिका की
41. ‘लौटकर आऊँगा फिर’ कविता को हिन्दी में रूपान्तर कीन किये हैं?
(A) अज्ञेय
(B) प्रयाग शुक्ल
(C) यतीन्द्र मिश्र
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer :- (B) प्रयाग शुक्ल
42. ‘प्रभु के पादुका’ की संज्ञा किसे दी गई है ?
(A) खड़ाऊँ को
(B) पद-चिह्न को
(C) दास को
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer :- (C) दास को
43. ‘दही वाली मंगम्मा’ कहानी का कहानीकार कौन है ?
(A) श्री निवास
(B) सातकौड़ी होता
(C) ईश्वर
(D) सुजाता
Answer :- (A) श्री निवास
44. ‘ढहते विश्वास’ कहानी का कहानीकार कौन है ?
(A) श्री निवास
(B) साँवर दइया
(C) सातकौड़ी होता
(D) सुजाता
Answer :- (C) सातकौड़ी होता
45. ‘माँ’ कहानी का कहानीकार कौन है?
(A) सुजाता
(B) ईश्वर पेटलीकर
(C) साँवर दइया
(D) लक्ष्मी
Answer :- (B) ईश्वर पेटलीकर
46. ‘नगर’ कहानी का कहानीकार कौन हैं ?
(A) सुजाता
(B) श्री निवास
(C) सातकौड़ी होता
(D) साँवर दइया
Answer :- (A) सुजाता
47. ‘धरती कब तक घूमेगी’ कहानी में किसकी प्रधानता दी गई है ?
(A) नारी
(B) पुरुष
(C) बच्चों
(D) कोई नही
Answer : – (A) नारी
48. जिस वर्ण के उच्चारण में थोड़ा श्रम लगाना पड़ता है और जिससे ‘हकार’ की ध्वनि नहीं निकलती है, उसे कहते हैं-
(A) अल्पप्राण
(B) अक्षर
(C) स्वर
(D) बलाघात
Answer : – (A) अल्पप्राण
49. किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, भाव आदि के नामों को बोध कराने वाले शब्दों को कहते हैं –
(A) संज्ञा
(B) सर्वनाम
(C) क्रिया
(D) विशेषण
Answer : – (A) संज्ञा
50. शब्द के जिस रूप से एक वस्तु या एक व्यक्ति का बोध हो उसे कहते हैं ?
(A) एकवचन
(B) बहुवचन
(C) द्विवचन
(D) कोई नहीं
Answer : – (A) एकवचन
51. होली आ गई। रेखांकित शब्द का लिंग बताइए।
(A) पुल्लिंग
(B) स्त्रीलिंग
(C) (A) और (B) दोनों
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer : – (B) स्त्रीलिंग
52. किस वाक्य में संयुक्त क्रिया का प्रयोग हुआ है ?
(A) मैं पढ़ लिया करता हूँ
(B) गोपेश्वर कल पत्र का जवाब देगा
(C) दीदी आज आएगी
(D) वह प्रतिदिन पढ़ता है
Answer : – (A) मैं पढ़ लिया करता हूँ
53. ‘राम द्वारा आम खाया जाता है।’ कौन वाच्य है ?
(A) कर्तृवाच्य
(B) कर्मवाच्य
(C) भाववाच्य
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer : – (B) कर्मवाच्य
54. वह आये तो मैं जाऊँ। कौन-सा भविष्य काल है ?
(A) सामान्य भविष्यत्
(B) संभाव्य भविष्यत्
(C) हेतुहेतुमद भविष्यत्
(D) इनमें से कोई नहीं
Answer : – (C) हेतुहेतुमद भविष्यत्
55. “राम ने रावण को मारा।’ इस वाक्य में कौन दो कारकों के चिह्न लगे हैं ?
(A) कर्ता और अपादान के
(B) कर्ता और कर्म के
(C) करण और सम्बन्ध के
(D) कर्म और सम्प्रदान के
Answer : – (B) कर्ता और कर्म के
56. काश! आज वर्षा होती? काश ! कौन-सा निपात है ?
(A) बलप्रदायी निपात
(B) तुलनाबोधक निपात
(C) बलप्रदायक निपात
(D) विस्मयादिबोधक निपात
Answer : – (D) विस्मयादिबोधक निपात
57. ‘विद्यार्थी’ का संधि-विच्छेद क्या है ?
(A) विद्याः + अर्थी
(B) विद्या + अर्थि
(C) विद्या + अर्थी
(D) वीद्या + अर्थी
Answer : – (C) विद्या + अर्थी
58. रेलयात्रा’ में कौन-सा समास है ?
(A) अव्ययीभाव समास
(B) द्विगु समास
(C) तत्पुरुष समास
(D) द्वन्द्व समास
Answer : – (C) तत्पुरुष समास
59. “महादेव” का पर्याय है
(A) विप्र
(B) त्रिनेत्र
(C) विद्युत
(D) गिरि
60. ‘नरक’ का विलोम शब्द है-
(A) अंधकार
(B) स्वर्ग
(C) शीतल
(D) अनागत
Answer : – (A) अंधकार
61. “करोड़’ का श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द क्या है ?
(A) कली
(B) क्रोड
(C) कर्म
(D) कपट
Answer : – (B) क्रोड
62. ‘बरखास्त’ में कौन-सा उपसर्ग है ?
(A) दुस्
(B) बर
(C) परि
(D) प्रति
Answer : – (B) बर
63. ‘तीरंदाज’ में कौन-सा प्रत्यय है ?
(A) घूम
(B) नि
(C) मान
(D) अंदाज
Answer : – (D) अंदाज
64. नीचे लिखे शब्दों में कौन-सा शब्द शुद्ध है ?
(A) आशीष
(B) आशिष
(C) आशीष
(D) असिष
Answer : – (A) आशीष
65. नीचे लिखे शब्दों में कौन-सा शब्द शुद्ध है ?
(A) अजोध्या
(B) अयोध्या
(C) अयोध्या
(D) औयध्या
Answer : – (C) अयोध्या
66. निम्नांकित में कौन तत्सम शब्द है ?
(A) आदमी
(B) सर्प
(C) चिड़िया
(D) भाखा
Answer : – (B) सर्प
67. निम्नांकित में कौन तद्भव शब्द है ?
(A) उल्लू
(B) परात
(C) हिम
(D) भूतल
Answer : – (A) उल्लू
68. ‘बैठकर पढ़ो’ अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार बताएँ
(A) विधि वाचक वाक्य
(B) निषेधवाचक वाक्य
(C) आज्ञावाचक वाक्य
(D) प्रश्नवाचक वाक्य
Answer : – (C) आज्ञावाचक वाक्य
69. “जो जानने की इच्छा रखता हो’ निम्ननांकित में कौन एक शब्द है ?
(A) जिज्ञासु
(B) अद्वितीय
(C) निशाचर
(D) गगनचुंबी
Answer : – (A) जिज्ञासु
70. ‘बहुत परिश्रम करना’ के लिए किस मुहावरे का प्रयोग होता है ?
(A) आग-बबूला होना
(B) आकाश-पाताल एक करना
(C) आकाश को छूना
(D) आग में घी डालना
Answer : – (B) आकाश-पाताल एक करना
लघु उत्तरीय प्रश्न :-
1. जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण कैसे बनी हुई है ?
उतर :- जाति प्रथा भारत में बेरोजगारी का एक प्रमुख और प्रत्यक्ष कारण है क्योंकि भारतीय समाज में श्रम विभाजन का आधार जाति है चाहे श्रमिक कार्य कुशल हो या नहीं उस कार्य में रुचि रखता हो या नहीं इस प्रकार हम कह सकते हैं कि जब श्रमिकों कार्य करने में न दिल लगे ना दिमाग तो कोई कार्य कुशलता पूर्वक कैसे प्राप्त कर सकता है यही कारण है कि भारत में जतिप्रथा बेरोजगारी का प्रत्यक्ष और प्रमुख कारण बना हुआ है ।
2. विष के दाँत शीर्षक कहानी का नायक कौन है ? तर्कपूर्ण उत्तर दें ।
उतर :- विष के ‘दाँत’ कहानी में मदन ऐसा पात्र है जो अहंकारी के अहंकार को नहीं सहन करता है बल्कि उसका स्वाभिमान जाग्रत होता है और वह ‘खोखा’ जैसे बालक को ठोकर देकर वर्षों से दबे अपने पिता की आँखें भी खोल देता है। सम्पूर्ण कहानी में मदन की क्रांतिकारी भूमिका है। अतः इसका नायक मदन है।
3. लेखक वास्तविक इतिहास किसे मानता है और क्यों ?
उत्तर:- लेखक किसी विषय के भूल उद्गम-स्रोत तक पहुँचने को उसका वास्तविक इतिहास मानता है। क्योंकि, वहीं से उस विषय की मौलिकता, उसका विकास तथा उसकी शाखाओं, प्रशाखाओं तथा जीवन-मूल्य ज्ञात होता है तथा उसका अध्ययन फलदायी होता है।
4. लेखक ने नया सिकंदर किसे कहा है? ऐसा कहना क्या उचित है ? लेखक का अभिप्राय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर :- लेखक ने नया सिकंदर भारत को समझन, जानन एवं सम्पूण लाभ प्राप्त करने हेतु भारत आनेवाले नवागंतुक अन्वेषकों, पर्यटकों एवं अधिकारियों को कहा है। उसी प्रकार आज भी भारतीयता को निकट से जानने के नवीन स्वप्नदशी को आज का सिकंदर कहना अतिशयोक्ति नहीं है, यह उचित है।
5. मनुष्य बार-बार नाखूनों को क्यों काटता है ?
उत्तर :- मनुष्य निरंतर सभ्य हीने के लिए प्रयासरत रहा है। प्रारंभिक काल में मानव एवं पशु एकसमान थे। नाखून अस्त्र थे। लेकिन जैसे-जैसे मानवीय विकास की धारा अग्रसर होती गई मनुष्य पशु से भिन्न होता गया। उसके अस्त्र-शस्त्र, — आहार-विहार, सभ्यता-संस्कृति में निरंतर नवीनता आती गयी । वह पुरानी जीवन-शैली को परिवर्तित करता गया । जो नाखून अस्त्र थे उसे अब सौंदर्य का रूप देने लगा। । इसमें नयापन लाने, इसे सँवारने एवं पशु से भिन्न दिखने हेतु नाखूनों को मनुष्य काट देता है।
6. नागरी को देवनागरी क्यों कहते हैं ? लेखक इस संबंध में क्या जानकारी देता है ?
उत्तर :- नागरी नाम की उत्पत्ति तथा इसके अर्थ के बारे में विद्वानों में बड़ामतभेद है । एक मत के अनुसार गुजरात के नागर ब्राह्मणों ने पहले-पहल नागरी लिपि का इस्तेमाल किया। इसलिए इसका नाम नागरी पड़ा। एक दूसरे मत के अनुसार बाकी नगर सिर्फ नगर है, परन्तु काशी देवनगरी है। इसलिए काशी में प्रयुक्त लिपि का नाम देवनागरी पड़ा।
7. ‘यदि मैं न मारता, तो शायद वह न जाता’ की व्याख्या कीजिए।
उत्तर :- प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य के सशक्त कथाकार अमरकांत के द्वारा रचित ‘बहादुर’ नामक शीर्षक से उद्धृत है। यहाँ बहादुर के भागने पर लेखक के पश्चात्ताप में एक अजीब सी लघुता का अनुभव कराया गया है।
– इस गद्यांश से पता चलता है, कि बहादुर को भगाने में लेखक की भूमिका भी कार्य कर रही है। घर के सभी सदस्य बहादुर को तिरस्कृत और प्रताड़ित कर रहे थे। केवल लेखक ही उससे प्यार और ममता का भाव रखते थे। बहादुर लेखक की सहानुभूति के आधार पर ही अभी तक उस घर में उपस्थित था। लेकिन जब एक दिन लेखक ने भी उसकी मारपीट की तो वह अंत:करण से कराह उठा और बर्दाश्त करने की क्षमता नष्ट हो गयी जिससे घर से भाग गया।
8. उसकी हँसी बड़ी कोमल और मीठी थी, जैसे फूल की पंखुड़ियाँ बिखर गई हों। व्याख्या कीजिए।
उत्तर :- प्रस्तुत गद्यांश हिन्दी साहित्य के प्रमुख कथाकार अमरकांत द्वारा लिखित ‘बहादुर’ शीर्षक से अवतरित है। प्रस्तुत अंश में कथा के प्रमुख नायक बहादुर की स्वाभाविक, निश्छल और निष्कपट हँसी का वर्णन किया गया है।
प्रस्तुत व्याख्यांश में लेखक दफ्तर से आने के बाद परिवार के सदस्यों से घर के अनुभव सुनते, बाद में बहादुर की बारी आती। बहादुर कोई बहुत-सी मामूली घटना का रिपोर्ट देता। रिपोर्ट देते समय वह बिल्कुल निडर, नि:संकोच और स्वाभाविक हो जाता। उसे लगता कि मैं साहब को बहुत मजेदार बात सुना रहा हूँ। बात सुनाते समय अंदर ही अंदर इतना आनंदित होता कि वह हँसने लगता । उसकी हँसी इतनी कोमल और मीठी होती थी जैसे फूल की पंखुडियाँ बिखर गई हों।
9. परंपरा का ज्ञान किनके लिए सबसे ज्यादा आवश्यक है और क्यों ?
उत्तर :- जो लोग साहित्य में युग-परिवर्तन करना चाहते हैं, क्रांतिकारी साहित्य रचना चाहते हैं, उनके लिए साहित्य की परंपरा का ज्ञान आवश्यक है। क्योंकि साहित्य की परंपरा से प्रगतिशील आलोचना का ज्ञान होता है जिससे साहित्य की धारा को मोड़कर नए प्रगतिशील साहित्य का निर्माण किया जा सकता है।
10. नदी और कविता में लेखक क्या समानता पाता है ?
उत्तर :- जिस प्रकार नदी सदियों से हमारे साथ रही है उसी प्रकार कविता भी मानव की जीवन-संगिनी रही है। नदी में विभिन्न जगहों से जल आकर मिलते हैं और वह प्रवाहित होकर सागर में समाहित होते रहते हैं। हर दिन सागर में समाहित होने के बावजूद उसमें जल का टोटा नहीं पड़ता । कविता में भी विभिन्न विडम्बनाएँ, शब्द भंगिमा, जीवन छवियाँ और प्रतीतियाँ आकर मिलती और तदाकार होती रहती हैं। जैसे नदी जल-रिक्त नहीं होती, वैसे ही कविता शब्द-रिक्त नहीं होती । इस प्रकार नदी और कविता में लेखक अनेक समानता पाता है।
11. पिताजी किससे नाराज थे और क्यों ?
उत्तर :- पिताजी नरेन से नाराज थे । क्योंकि, बच्चों मछलियों के चलते स्वयं परेशान रहे साथ ही भग्गू को भी परेशान किया । बच्चे मछली को पालना चाहते थे, कोमल बालमन मछली को कटते देख विह्वल हो उठा और बच्चा एक मछली को लेकर भाग गया। पीछे-पीछे भग्गू को भागना पड़ा । छीना-झपटी की स्थिति आई । पिताजी इन हरकतों के कारण नाराज हुए।
12. संतू के विरोध का क्या अभिप्राय है ?
उत्तर :- संतू मानवीय गुणों को उजागर करता है। मानव में सेवा, परमार्थ, ममता जैसे गुण विद्यमान होते हैं। परन्तु आज मानव अपने आदर्श को भूलकर, इन गुणों को त्यागकर, स्वार्थ में अंधा होकर विवश और लाचार की मदद में नहीं बल्कि शोषण में लिप्त है। मूक मछलियों को निर्ममता पूर्वक काटते देख संतू उसकी रक्षा को आतुर हो उठता है और उसे बचाने हेतु झपट कर भग्गू के सामने से मछली को. लेकर भाग जाता है। इस विरोध का मतलब है कि आज नि:स्वार्थ भाव से बेबस, लाचार, शोषित, पीड़ित जनों की रक्षा, उत्थान एवं कल्याण के लिए अग्रसर होना परमावश्यक है। ममत्व में धैर्य टूट जाता है। सभी प्राणी में अपनी परछाईं दिखनी चाहिए।
13. ‘अगर बाल्टी भरी होती तो पछली उछल कर नीचे आ जाती’ की सप्रसंग व्याख्या कीजिए।
उत्तर :- प्रस्तुत पंक्ति विनोद कुमार शुक्ल के ‘मछली’ शीर्ष की है । प्रस्तुत पंक्ति में बच्चों का मछली की रक्षा के लिए सजगता परिलक्षित होता है। बच्चे की हार्दिक इच्छा थी कि हम मछली को मरने नहीं देंगे बल्कि जीवित अवस्था में रहने के लिए कआँ में डाल देंगे । इसके लिए पिताजी से एक मछली माँगने का इंतजार कर रहे थे। जबतक पिताजी नहीं आ जाते तब तक कुआँ में डालना नहीं था। इसलिए उसे बाल्टी में रखना अनिवार्य था । उन्हें डर था कि बाल्टी भरी होगी तो मछलियाँ बाहर जमीन पर कूद जायेंगी। इसलिए भरी बाल्टी आधा कर के उसमें मछलियों को रखा गया ।
14. पठित पाठ के आधार पर बिस्मिल्ला खाँ के बचपन का वर्णन करें।
उत्तर :- अमीरुद्दीन यानी उस्ताद बिस्मिल्ला खाँ चार साल की उम्र में ही नाना की शहनाई को सुनते और शहनाई को ढूँढते थे। उन्हें अपने मामा का सान्निध्य भी बचपन में शहनाईवादन की कौशल विकास में लाभान्वित किया । 14 साल की उम्र में वे बालाजी के मंदिर में रियाज़ करने के क्रम में संगीत साधनारत हुए और आगे चलकर महान कलाकार हुए।
15. दूसरी संस्कृति से पहले अपनी संस्कृति की गहरी समझ क्यों जरूरी है ?
उत्तर :- दूसरी संस्कृतियों की समझ और कद्र स्वयं अपनी संस्कृति की कद्र होने और उसे हजम कर लेने के बाद होनी चाहिए, पहले हरगिज नहीं। कोई संस्कृति इतने रत्न-भण्डार से भरी हुई नहीं है जितनी हमारी अपनी संस्कृति है। सर्वप्रथम हमें अपनी संस्कृति को जानकर उसमें निहित बातों को अपनाना होगा। इससे चरित्र-निर्माण होगा जो संसार के अन्य संस्कृति से कुछ सीखने की क्षमता प्रदान करेगा।
16. ‘यहाँ एक तैं दसरौ औंक नहीं की व्याख्या करें।
उत्तर :- प्रस्तुत पक्ति हिन्दी साहित्य की पाठय-पस्तक के कवि घनानंद द्वारा राचत आत सूधी सनेह को मारग है” पाठ से उद्धत है। इसके माध्यम से कवि प्रमा आर प्रयों का एकाकार करते हुए कहते हैं कि प्रेम में दो का पह अलग-अलग नहीं रहती, बल्कि दोनों मिलकर एक रूप में स्थित हो जाते हैं। प्रेमी निश्छल भाव से सर्वस्व समर्पण की भावना रखता है और तुलनात्मक अपक्षा नही करता है। मात्र देता है, बदले में कुछ लेने की आशा नहीं करता है।
प्रस्तुत पंक्ति में कवि घनानंद अपनी प्रेमिका सुजान को संबोधित करत हक ह सुजान, सुनो ! यहाँ अर्थात् मेरे प्रेम में तुम्हारे सिवा कोई दसरा चिह्न नहीं है। मेरे हृदय में मात्र तुम्हारा ही चित्र अंकित है।
17. व्याख्या करें:
“सदियों की ठंढी-बुझी राख सुगबुगा उठी,
मिट्टी सोने का ताज पहन इठलाती है;
दो राह, समय के रथ का घर्घर-नाद सुनो,
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।”
उत्तर :- प्रस्तुत पद्यांश में जनतंत्र की स्थापना की बात कही गयी है। साथ ही, जनता की शक्ति का बोध कराया गया है। कवि रामधारी सिंह दिनकर ने ओजस्वी भाव में जनता की महत्ता का बोध कराते हुए उसकी सहनशीलता, धैर्य की बात बड़े ही सहज रूप में कहा है। साथ ही, भारत की जनता को अपना अधिकार प्राप्त करने, जनतंत्र स्थापित करने, राजसिंहासन पर आरूढ़ होने की प्रेरणा का भाव कवि ने जागृत करने का सफल प्रयास किया है। इस पद्यांश में जनता की शक्ति का व्यापक चित्रण किया गया है जो ओज का भाव जगाता है।
18. आशय स्पष्ट कीजिए :
“मैं तुम्हारा वेश हूँ, तुम्हारी वृत्ति हूँ
मुझे खोकर तुम अपना अर्थ खो बैठोगे ?”
उत्तर :- प्रस्तत पद्यांश में कवि ने भक्त को भगवान की अस्मिता माना है। भगवान का वास्तविक स्वरूप भक्त में है। भक्त भगवान का सबकुछ है। भगवान का रूप, वेश, रंग, कार्य सब भक्त में निहित है। भक्त के माध्यम से ही भगवान को जाना जा सकता है, उनके अस्तित्व की अनुभूति की जा सकती है। कवि कहता है कि हे भगवन, मेरा अस्तित्व ही तुम्हारी पहचान है। मैं नहीं रहूँगा तो तुम्हारी पहचान भी नहीं होगी, अर्थात् भक्त से अलग रहकर, भक्त को खोकर भगवान भी अपना अर्थ, अपना मतलब, अपनी पहचान खो देंगे। भक्त के बिना भगवान की कल्पना नहीं ही की जा सकती।
19. व्याख्या करें–
“खेत हैं जहाँ धान के, बहती नदी
के किनारे फिर आऊँगा लौट कर
एक दिन – बंगाल में;”
उत्तर :- प्रस्तुत व्याख्येय पंक्तियाँ हमारी हिन्दी पाठ्य-पुस्तक के ‘लौटकर आऊँगा फिर’ शीर्षक से उद्धत हैं। इस अंश से पता चलता है कि कवि अगले जन्म में भी अपनी मातृभूमि बंगाल में ही जन्म लेना चाहता है।
प्रस्तुत पद्यांश में कवि की मातृभूमि के प्रति प्रेम दिखाई पड़ता है। कवि ने बंगाल के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ वहाँ के खेतों में उगने वाली धान की फसलों का मनोहर चित्र खींचा है। कवि’ कहता है कि जिस बंगाल के खेतों में लहलहाती हुई धान की फसलें हैं वहाँ मैं फिर लौटकर आना चाहता हूँ। जहाँ कल-कल करती हुई नदी की धारा अनायास ही लोगों को आकर्षित कर लेती है वहाँ ही मैं जन्म लेना चाहता हूँ। यहाँ स्पष्ट है कि कवि अपनी भावना को स्वछंद स्वरूप प्रदान करता है।
20. व्याख्या करें –
“बनकर शायद हंस मैं किसी किशोरी का;
धुंधरू लाल पैरों में;
तैरता रहूँगा बस दिन-दिन भर पानी में
गंध जहाँ होगी ही भरी, घास की।”
उत्तर :- प्रस्तुत अवतरण बांग्ला माहित्य के प्रख्यात कवि जीवनानंद दास द्वारा रचित “लौटकर आऊँगा फिर” कविता । से उद्धृत है। इस अंश में कवि बंगाल की भूमि पर बार-बार जन्म लेने की उत्कट इच्छा को अभिव्यक्त करता है।
यहाँ कवि बंगाल में एक दिन लौटकर आने की बात कहता है। वह अगले जन्म में भी अपनी मातृभूमि बंगाल में ही जन्म लेने का विचार प्रकट करता है। वह
हंस. किशोरी और घुघरू की बिम्ब-शैली में अपने-आपको उपस्थित करना कहता है कि जहाँ की किशोरियाँ पैरों में घुघरू बाँधकर हंस के समान मधा में अपनी नाच से लोगों को आकर्षित करती हैं, वही स्वरूप मैं भी धारण करना चाहता हूँ। यहाँ तक कि बंगाल की नदियों में तैरने के एक अलग आनंद की अनभति मिलती है। यहाँ की क्यारियों में उगने वाली घास की गंध कितनी मनमोहक होती है यह तो बंगप्रांतीय ही समझ सकते हैं । इस प्रकार, कवि पर्ण अपनत्व की भावना में प्रवाहित होकर हार्दिक इच्छा को प्रकट किया गया है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न :-
1. श्रम विभाजन और जाति-प्रथा’ पाठ का सारांश लिखें।
उत्तर :- आज के युग में भी जाति-प्रथा की वकालत सबसे बड़ी बिडंबना है। ये लोग तर्क देते हैं कि जाति-प्रथा श्रम-विभाजन का ही एक रूप है। ऐसे लोग भूल जाते हैं कि श्रम-विभाजन श्रमिक-विभाजन नहीं है। श्रम-विभाजन निस्संदेह आधुनिक युग की आवश्यकता है, श्रमिक-विभाजन नहीं। जाति-प्रथा श्रमिकों का अस्वाभाविक विभाजन और इनमें ऊँच-नीच का भेद करती है।
वस्तुत: जाति-प्रथा को श्रम-विभाजन नहीं माना जा सकता क्योंकि श्रम-विभाजन मनुष्य की रूचि पर होता है, जबकि जाति-प्रथा मनुष्य पर जन्मना पेशा थोप देती है। मनुष्य की रूचि-अरूचि इसमें कोई मायने नहीं रखती। ऐसी हालत में व्यक्ति अपना काम टालू ढंग से करता है, न कुशलता आती है न श्रेष्ठ उत्पादन होता है। चूँकि व्यवसाय में, ऊँच-नीच होता रहता है, अतः जरूरी है पेशा बदलने का विकल्प। चूँकि जाति-प्रथा में पेशा बदलने की गुंजाइश नहीं है,
इसलिए यह प्रथा गरीबी और उत्पीडन तथा बेरोजगारी को जन्म देती है। भारत की गरीबी और बेरोजगारी के मुल में जाति-प्रथा ही है। अतः स्पष्ट है कि हमारा समाज आदर्श समाज नहीं है। आदर्श समाज में । बहविध हितों में सबका भाग होता है। इसमें अवाध संपर्क के अनेक साधन एवं अवसर उपलब्ध होते हैं। लोग दूध-पानी की तरह हिले-मिले रहते हैं। इसी का नाम लोकतंत्र है। लोकतंत्र मूल रूप से सामूहिक जीवन-चर्या और सम्मिलित अनुभवों के आदान प्रदान का नाम है
2. विष के दाँत’ कहानी का सारांश लिखें।
उत्तर :- सेन साहब को अपनी कार पर बडा नाज था । घर में कोई ऐसा न था जो गाड़ी तक बिना इजाजत फटके । पाँचों लड़कियाँ माता-पिता का कहना। अक्षरशः पालन करतीं। किन्तु बुढ़ापे में उत्पन्न खोखा पर घर का कोई नियम लागू। न होता था । अतः गाड़ी को खतरा था तो इसी खोखा अर्थात् काश से। सेन साहब अपने लाडले को इंजीनियर बनाना चाहते थे। ये बड़ी शान से मित्रों से अपने बेटे की काबलियत की चर्चा करते थे। एक दिन मित्रों की गप्प-गो और काश के गुण-गान से उठे ही थे कि बाहर गुल-गपाड़ा सुना। निकले तो देखा कि गिरधारी की पत्नी से शोफर उलझ रहा है और उसका बेटा मुदन शोफर पर झपट रहा है। शोफर ने कहा कि मदन गाडी छ रहा था और मना करने पर उथम मचा रहा है। सेन साहब ने मदन क स को चेतावनी दी और अपने किरानी गिरधर को बुलाकर डाँटा-अपने बेटे को संभालो। घर आकर गिरधारी ने मदन को खूब पीटा।। दूसरे दिन बगल वाली गली में मदन दोस्तों के साथ लट्टू खेल रहा था। काशू भी खेलने को मचल गया। किन्तु मदन ने लट्टू देने से इनकार कर दिया काशू की।आदत तो बिगड़ी थी। बस, आदतवश हाथ चला दिया। मदन भी पिल पड़ा और मार मार कर काश के दाँत तोड दिए ।देर रात मदन घर आया तो सुना कि सेन साहब ने उसके पिता को नौकरी में हुआ दिया है और आउट हाउस से भी जाने का हुक्म दिया है। मदन के पैर से लोटा। लुढ़क गया। आवाज सुनकर उसके माता-पिता निकल आए। मदन मार खाने को तैयार हो गया। गिरधारी उसकी ओर तेजी से बढ़ा किन्तु सहसा उसका चेहरा बदल गया। उसने सदन को गोद में उठा लिया-‘शावास बेटा एक मैं हैं और एक तू है जो खोखा के दो-दो दाँत तोड़ डाले।’ इस प्रकार हम देखते हैं कि कहानीकार ने ‘विष के दाँत’ उच्च वर्ग के सेन साहब की महत्त्वाकांक्षा, सफेदपोशी के भीतर लड़के-लड़कियों में विभेद भावना, नौकरी-पेशा वाले गिरधारी की हीन-भावना और उसके बीच अन्याय का प्रतिकार करनेवाली बहादुरी ओर साहस के प्रति प्यार और श्रद्धा को प्रस्तुत करते हुए प्यार-दुलार के परिणामों को बुखबी दर्शाया है।
3. सेन साहब, मदन, काशू और गिरधर का चरित्र-चित्रण करे।
उत्तर :- प्रस्तुत कहानी में लेखक ने अमीरों की तथाकथित मर्यादा पर करारा व्यंग्य किया है । महल और झोपड़ी की लड़ाई में महल की खिल्ली उडाना हो इस कहानी में कहानीकार का मुख्य संदेश है। सेन साहब प्रदर्शन, प्रिय अमीर आदमी हैं । वे गरीबों का शोषण करके उन्हें प्रताड़ित करके अपनी प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले बाह्याडम्बर से युक्त धनी आदमी के रूप में दिखाये गये हैं। खोखा महल में रहकर लाड़-प्यार से बिगड़ा हुआ बड़े बाप की औलाद के रूप में चित्रित है। वह अहंकारी बालक है ।वह देश का प्रतीक है। मदन अमीरों की प्रदर्शन-प्रियता और गरीबों पर उनके अत्याचार के विरुद्ध एक चेतावनी है, सशक्त विद्रोह है। गिरधर अत्याचार, शोषण एवं अन्याय को सहनेवाला लाचार एवं विवश इनसान है। लेकिन अंतर्मन से वह अत्याचार का समर्थन नहीं करता है, बल्कि उसका प्रतिकार करने की इच्छा रखता है। वैसे तो कहानी में कई पात्र आये हैं. मि सेन, खोखा. गिरधरलाल आदि मगर सभी पात्रों में यह मदन का ही चरित्र है जो सवाधिक प्रभावशाली है । मदन का चरित्र उसके व्यक्तित्व को हँक लेता है। मदन के चरित्र की विशेषता है. निर्भीकता । वह दुलियों के दिल की चिनगारी है।
4. ‘कमबख्त नाखून बढ़ते हैं तो बढ़े, मनुष्य उन्हें बढ़ने नहीं देगा’ की व्याख्या करें।
उत्तर :- प्रस्तुत व्याख्येय पंक्ति हिंदी पाठ्य-पुस्तक के ललित निबंध ‘नाखून क्यों बढ़ते हैं’ पाठ से ली गई है । इस पंक्ति के माध्यम से निबंधकार हजारी प्रसाद द्विवेदी ने नाखून बढ़ाना पाश्विक प्रवृत्ति और काटना मानवीय प्रवृत्ति का अत्यन्त लाक्षणिक और स्वाभाविक रूप में वर्णन किया है। निबंधकार यहाँ मनोवैज्ञानिक रूप का अंश भी प्रस्तुत करते हैं। यह स्पष्ट है कि मनुष्य वर्तमान परिवेश में बौद्धिकता का महानतम स्वरूप है। सभ्यता और संस्कृति के सोपान पर हमेशा अग्रसर है। दिनों-दिन पाशविक प्रवृत्ति को समाप्त करने में अपनी ईमानदारी का परिचय दे रहा है । इस आधार पर लेखक को विश्वास है कि यदि नाखून बढ़ते हैं तो मनुष्य उन्हें निश्चित रूप से बढ़ने नहीं देगा । अर्थात् पाशविक प्रवृत्ति का लक्षण ज्यों ही दिखाई पड़ता है मनुष्य उसे काट देता है। यह आशावादी विचारधारा लेखक को एक सुसंस्कृत और सभ्य समाज स्थापित होने में सहायक होता है।
5. ‘राम नाम बिनु बिस्थे जगि जनमा’ और ‘जो नर दुख में दुख नहि मानै।” कविता का सारांश लिखें।
उत्तर :- पाठयपुस्तक में गुरुनानक के दो पद संगृहित हैं : ‘राम नाम बिन बिरथे जगि जनमा’ और ‘जो नर दुख में दुख नहिं माने।” प्रथम पद में गुरु नानक ने बाहरी वेश-भूषा , पूजा-पाठ और कर्मकांड के स्थान पर निश्छल-निर्मल हृदय से राम नाम के कीर्तन। पर जोर दिया है। गुरु नानक ऐसा मानते हैं कि राम नाम कीर्तन से ही व्यक्ति को स्थायी शांति मिल सकती है और उसके सारे सांसारिक दु:ख-दर्द मिट सकते हैं। दूसरे पद में गुरु नानक ने कहा है कि सुख-दु:ख, हर्ष-विषाद आदि में एक सम्मान उदासीन रहते हुए हमें अपने मानसिक दुर्गुणों से ऊपर उठकर अंत:करण को विश् शुद्ध और निर्मल रखना चाहिए, क्योंकि इसी स्थिति में गोविंद से एकाकार होने की संभावना रहती है। गुरु नानक कहते हैं कि राम नाम के बिना इस संसार में जन्म होना व्यर्थ है। राम नाम के बिना हम विष खाते हैं और विष ही बोलते हैं। अर्थात, राम नाम के बिना हमारा खाना जहर के समान होता है और हमारी वाणी जरह के समान होती है। पुर तक पढ़ने, शास्त्रों पर चर्चा करने और संध्याकालीन उपासना करने से हमें मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती। राम के बिना हम विभिन्न जंजालों में उलझकर मर जाते हैं। जीवन में स्थायी शांति धार्मिक बाह्याडंबरों और तीर्थाटन करने से नहीं प्राप्त होती, राम नाम के जपने से ही प्राप्त होती है। भवसागर पार करने का सबसे सुगम मार्ग है राम नाम का जप करना। गुरु नानक कहते हैं कि जो नर दु:ख में दु:ख नहीं मानता, सुख-दु:ख में जो उदासीन रहता है प्रीति और भय जिसके लिए एक समान है, सोना और मिट्टी में जो द नहीं करता; हर्ष और शोक जिसके लिए पृथक्-पृथक् नहीं हैं, वह नर गुरु की कृपा प्राप्त करता है और उसे ही प्रभु के सान्निध्य का सुख मिलता है।
6. ‘प्रेम-अयनि श्री राधिका, करील के कुंजन ऊपर वारौं’ कविता का सारांश लिखें।
उत्तर :- पाठयपुस्तक में ‘प्रेम-अयनि श्री राधिका’ शीर्षक के अंतर्गत चार दोहे संकलित हैं तथा ‘करील के कुंजन ऊपर वारौं’ शीर्षक कविता के अंतर्गत एक सवैया संकलित है। रसखान कवि कहते हैं कि श्री राधिका प्रेम की खान हैं और श्रीकृष्ण का सारा व्यक्तित्व प्रेम के रंग में सराबोर है। प्रेम रूपी वाटिका (प्रेमोद्यान) के ये दोनों मालिन-माली हैं। प्रेमिका राधा की आँखें जबसे श्रीकृष्ण की आँखों से मिली हैं, तब से वे कृष्ण मिलन के लिए बेचैन रहने लगी हैं। धनुष पर खींचे गए बाण के समान उनकी आँखें बड़ी कोशिश के बाद उनके वश में होती हैं, पर कृष्ण दर्शन की विवशता में उनकी आँखें स्थायी रूप से उनके वश में नहीं रह पातीं; वे धनुष से छूटे तीर की तरह श्रीकृष्ण की आकर्षक छवि की ओर बड़ी तेजी से चल पड़ती हैं। नंद किशोर श्रीकृष्ण ने राधा का मन रूपी माणिक्य चुरा लिया है। मन-माणिक्य के चोरी चले जाने से राधा फेर में पड़ गई हैं। ‘बेमन’ होने के कारण (मन के अभाव में) राधा का जीना मुश्किल हो गया है। जिस दिन से राधा (गोपिका) की आँखें प्रियतम कृष्ण से लगी है, उस दिन से ‘चितचोर’ कृष्ण को वह क्षण-भर के लिए भी अपनी आँखों से दूर करना नहीं चाहती। पाठयपुस्तक में संकलित रसखान के सवैये में कवि की श्रीकृष्ण और ब्रज के. प्रति अनन्य भक्ति अभिव्यक्त हुई है। कवि के लिए श्रीकृष्ण की छोटी लाठी (लकुटी) और कंबली (कमरिया) इतनी महत्त्वपूर्ण है कि तीनों लोकों का राज्य भी उनके सामने तुच्छ है। कवि कहता है कि मुझे यदि तीनों लोकों का राज्य भी प्राप्त हो जाए तो मैं कृष्ण की लाठी और कंबली की महत्ता के समक्ष उसे तुच्छ समझूँगा और उसका त्याग कर दूंगा। मुझे तो नंद की गाएँ चराते समय अपार सुख मिलता है। उसके आगे तो आठों सिद्धियों और नवों निधियों का सुख भी कुछ नहीं है। रसखान कवि के भीतर ब्रज के वन, बाग और तड़ाग को देखने की लालसा तीव्र हो उठी है। वे कहते हैं कि सोने-चाँदी के करोड़ों महल भी ब्रज के करील कुंजों की समता नहीं कर सकते। मुझे यदि कोई सोने-चाँदी के करोड़ों महल दे तब भी मैं उन्हें अस्वीकार कर दूंगा और ब्रज के करील-कुंजों के वैभव से प्राप्त आनंदानुभूति को अपने जीवन की महत्त्वपूर्ण पूँजी मानूँगा।
7. ‘कवयित्री अनामिका की ‘अक्षर-ज्ञान’ शीर्षक कविता का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :- अबोध बालक हिंदी वर्णमाला के अक्षर पाटी पर (स्लेट पर) साधने चला है। वह ‘क’ लिखता है, पर उसका ‘क’ निर्धारित स्थान की सीमा का उल्लंघन कर जाता है, वह चौखटे में नहीं अँटता। उसे बताया गया है कि ‘क’ से कबूतर होता है। उसका ध्यान ‘क’ लिखते समय कबूतर पर होता है, उसका ‘क’ रेखा के इधर-उधर फुदक जाता है। ‘ख’ के साथ भी यही होता है। वह जानता है-‘ख’ से खरहा होता है। ‘ख’ लिखते समय उसका ध्यान ‘ख’ से ज्यादा खरहा पर होता है। परिणामस्वरूप उसका ‘ख’ रेखा से उतर जाता है। वह अबोध बालक ‘ग’ भी ठीक से नहीं लिख पाता। उसका ‘ग’ टूटे हुए गमले-सा इधर-उधर बिखर जाता है। घड़ा जैसे लुढ़कता है ठीक उसी तरह उस बालक का ‘घ’ भी लुढ़कता हुआ-सा दिखता है। रेखाओं के बीच वह ‘घ’ सही-सही नहीं बैठा पाता। ‘ङ’ लिखते समय तो वह बहुत परेशान हो जाता है। वह ‘ङ’ को दो हिस्सों में बाँटता है-‘ड’ और ‘ड’ के बगल में लगनेवाला बिंदु (.)। ‘ड’ उसे माँ की तरह दिखाई पड़ता है और बगल का बिंदु (.) माँ की गोद में बैठे हए बेटे की तरह। माँ और बेटे को एक साथ साधने में अपने को असमर्थ पाता है। वह ‘ङ’ लिखने की कोशिश करता है, पर हर बार वह असफल हो जाता है। अपनी विफलता के कारण उसके आँखों में आँसू आ जाते हैं। बालक के उन सजह-निश्छल आँसू की बूंदों पर कवयित्री टिप्पणी करती है कि “पहली विफलता पर छलके ये आँस ही/हैं शायद प्रथमाक्षर/सृष्टि की विकास-कथा के।” सृष्टि की विकास-कथा विफलता पर छलके हुए आँसू के प्रथमाक्षर से ही लिखी गई है शायद !
8. दिनकर रचित ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता का सारांश लिखें।
उत्तर :- ‘जनतंत्र का जन्म’ शीर्षक कविता आधुनिक भारत में जनतंत्र के उदय की जयघोष है। समय का रथ सिंहासन की ओर बढ़ता आ रहा है। वह सिंहासनासीन अधिनायक से कहता है कि अब तुम सिंहासन का मोह त्याग दो। इसपर केवल जनता का अधिकार है। उसी जनता का इस सिंहासन पर अधिकार है जो युगों से पद-दलित रही है और जिसने अपने शोषण के विरुद्ध कभी आवाज नहीं उठाई है। वह जनता अब कोई दुधमुंही बच्ची नहीं रही जिसे खिलौनों से बहलाया जा सकें। जनता कोपाकुल होकर जब अपनी भृकुटि चढ़ाती है तो भूचाल आ जाता है। बड़े-बड़े बवंडर उठने लगते हैं। उनके हुँकारों में महलों को उखाड़ फेंकने की ताकत है, उनकी साँसों में ताज को हवा में उड़ा देने का बल है। जनता की राह को रोकने की क्षमता किसी में भी नहीं है। वह अपने साथ काल लिए चलती है। काल पर भी उसका शासन चलता है। सुनो, वह जनता युगों के शोषण के अंधकार को चीरती हुई बड़े वेग के साथ सिंहासन की तरफ आ रही है। संसार का सबसे बड़ा जनतंत्र सिंहासन के पास खड़ा है। उसका हृदय से अभिषेक करो। अब तुम्हारा समय नहीं रहा। अब प्रजा का समय है।
देवता, मंदिरों, राजप्रासादों और तहखानों में निवास नहीं करते। वास्तविक देवता तो खेतों में, खलिहानों में हल चलाते मिलेंगे; कहीं सड़कों पर गिट्टी तोड़ते और फावड़े चलाते मिलेंगे। अब उन्हीं किसानों और मजदूरों की बारी है। अब वे ही राज सिंहासन पर आरूढ़ होंगे। सिंहासन खाली कर देने में तुम्हें कोई आना-कानी नहीं करनी चाहिए।
9. ‘एक वृक्ष की हत्या’ का सारांश अपने शब्दों में लिखें।
उत्तर :- कवि जब कभी बाहर से आता था तब अपने घर के दरवाजे पर खड़े बढे वृक्ष को देखकर उसे एक आनंदपूर्ण संतोष मिलता था। पर आज जब वह बाहर : से घर आया तब उसे अपने घर के दरवाजे पर नहीं देखकर उसे बड़ा दुःख हुआ। उसे एक रिक्तता और खालीपन का अहसास हुआ। वह बूढ़ा वृक्ष उसके घर के दरवाजे पर हमेशा चौकस-चौकन्ना रहता था। वह वृक्ष उसके घर का पहरेदार था जैसे। पर, वह बूढ़ा चौकीदार वृक्ष किसी के स्वार्थ की बलि चढ़ गया। उसे काट डाला गया। उसकी हत्या हो गई। कवि को पहले से ही आशंका थी कि किसी की निगाहें उस बूढ़े वृक्ष पर लगी हुई हैं, वह अवश्य ही बूढे वृक्ष की हत्या कर देगा और सचमुच, हुआ भी वही। वृक्ष की हत्या कर कवि अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करता हुआ कहता कि हमारी असावधानी के चलते ही ऐसा होता है कि कोई प्राणिजगत की रक्षा करनेवाले को ही अपने स्वार्थ के लिए मार डाला है। वृक्ष की हत्या के बाद कवि को आशंका होती है कि कहीं लुटेरे उसके घर को, शहर को और देश को ही लूट न लें। सब जगह लूट मची है। कवि ‘लूट’ के प्रति सावधान रहने की बात करता है। वह वृक्ष । की हत्या को पर्यावरण की हत्या का एक अंग मानता है। वह पर्यावरण की चिंताओं से ग्रस्त हो जाता है। वह आत्मसजग होकर घोषणा करता है कि हमें नदियों को नाला होने से, हवा को धुंआ होने से (विषाक्त होने से) और खाद्य पदार्थ को जहर होने से (कीटनाशक दवाओं के छिड़काव और रासायनिक खादों के प्रयोग से खाद्य पदार्थों के जहर होने से) बचाना है। जंगलों के काटने से मरुस्थलों का लगातार विस्तार हो रहा है और भौतिकता के प्रति विशेष आग्रह के कारण सभ्य कहलानेवाला आदमी निरंतर असभ्य होता जा रहा है। कवि इस चिंता से ग्रस्त है। कवि इन तमाम आशंकाओं के बीच अपने कर्मठ होने का परिचय देते हुए कहता है कि हमें इन सारी अव्यवस्थाओं को दूर करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए। हमें हर कीमत पर अपने घर, नगर, देश, नदियों, हवा, खाद्य-पदार्थ, जंगल तथा मानव की सुरक्षा करनी है। . तुरंत काटे गए एक वृक्ष के बहाने पर्यावरण, मनुष्य और सभ्यता के विनाश की ‘अंतर्व्यथा को यह कविता अभिव्यक्त करती है।
10. कवि रेनर मारिया रिल्के रचित कविता ‘मेरे बिना तुम प्रभु’ का सारांश अपने शब्दों में प्रस्तुत करें।
उत्तर :- भक्त कवि रिल्के अपने प्रभु से करता है-प्रभु, जब मेरा अस्तित्व ही नहीं रहेगा, तब तुम क्या करोगे? मैं ही तुम्हारा जलपात्र हूँ, मैं ही तुम्हारी मदिरा हूँ। जब जलपात्र टूटकर बिखर जाएगा और मदिरा सूख जाएगी या स्वादहीन हो जाएगी तब प्रभु तुम क्या करोगे ? कवि अपने प्रभु से कहता है कि मैं तुम्हारा वेश हूँ, तुम्हारी वृत्ति हूँ। मैं ही तुम्हारे होने का कारण हूँ। तुम मुझे खोकर अपना अर्थ खो बैठोगे। मेरे अभाव में तुम गृहविहीन हो जाओगे। तब तुम निर्वासित-सा. अपना जीवन बिताओगे। तब तुम्हारा स्वागत कौन करेगा? प्रभु मैं तुम्हारे चरणों की पादुका हूँ। मेरे बिना तुम्हारे चरणों में छाले पड़ जाएँगे; तुम्हारे पैर लहूलुहान हो जाएँगे; तुम्हारे पैर मेरे बिना कहीं भ्रांत दिशा में भटक जाएँगे।
कवि अपने आराध्य से कहता कि जब मेरा अस्तित्व ही नहीं रहेगा, तब तुम्हारा शानदार लबादा गिर जाएगा। तुम्हारी सारी शान मेरे होने पर ही निर्भर है। मैं नहीं रहूँगा तो तुम्हारी कृपा दृष्टि को सुख कहाँ से नसीब होगा? दूर की चट्टानों की ठंढी गाद में सूर्यास्त के रंगों में घुलने का सुख तुम्हें मेरे नहीं रहने पर कैसे प्राप्त होगा? कवि अपनी आशंका व्यक्त करता हआ कहता है कि मेरे बिना प्रभु शायद ही 30 ही कर सकें।
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