CGBSE Board 12th Political Science Exam 2024 : Important Question with Answers
छत्तीसगढ़ बोर्ड 12वीं की राजनीति विज्ञान परीक्षा 14 मार्च, 2024 को निर्धारित है। तो यह आर्टिकल आपके लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण साबित होने वाला है क्योंकि इस आर्टिकल में आपको बोर्ड परीक्षा के लिए वो ही प्रश्न दिए गए है जो बोर्ड पेपर में आने जा रहे है।
इस पोस्ट में छत्तीसगढ़ बोर्ड 12th परीक्षा 2024 के लिए राजनीति विज्ञान के महत्वपूर्ण (CG Board 12th Political Science Important Question 2024) प्रश्न दिये गये है जो आपके पेपर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
छात्रों को इन (CG Board 12 Political Science Viral Question 2024) प्रश्नों को अच्छी तरह से याद रखना चाहिए, जिससे आपको तैयारी करने में आसानी होगी।
अब आपकी परीक्षा में कुछ ही घंटे बचे है I जिससे राजनीति विज्ञान के पेपर की तैयारी कर सकते हैं और अच्छे मार्क्स ला सकते है I
CGBSE Board 12th Exam 2024 Political Science Important Questions
Very Short Answers Question
प्रश्न 1. 'वीडियो गेम वार' क्या हैं?
Ans. परिभाषा: वीडियो गेम युद्ध एक प्रकार का वीडियो गेम है जो युद्ध या सैन्य संघर्ष पर केंद्रित होता है। इसमें खिलाड़ी अक्सर सैनिकों, टैंकों, विमानों या जहाजों को नियंत्रित करते हैं और दुश्मनों को हराने के लिए रणनीति और कौशल का उपयोग करते हैं।
प्रश्न 2. ब्रेटन वुड्स प्रणाली क्या हैं?
Ans. परिभाषा: ब्रेटन वुड्स प्रणाली द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली थी। इसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देना और मुद्रास्फीति और अवसाद को रोकना था।
प्रश्न 3. अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने नई विश्व व्यवस्था की संज्ञा किस कारण से दी?
Ans. अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश ने कहा था कि सोवियत संघ के विखंडन और सोवियत गुट के विघटन के बाद, पुरानी विश्व व्यवस्था के मलबे से एक नई विश्व व्यवस्था का जन्म हुआ. 1991 के खाड़ी युद्ध ने भी व्यवस्था परिवर्तन में योगदान दिया
प्रश्न 4. वर्तमान समय में मानव जाति को किससे खतरा है ?
Ans. वर्तमान समय में मानव जाति को खतरा है:
- पर्यावरण विनाश: जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, प्रदूषण, जैव विविधता का नुकसान, आदि।
- अत्यधिक जनसंख्या: संसाधनों पर दबाव, गरीबी, सामाजिक अशांति, आदि।
- परमाणु युद्ध: देशों के बीच तनाव, आतंकवाद, हथियारों का प्रसार, आदि।
प्रश्न 5. आतंकवादी संगठन किसे कहते है ?
Ans. आतंकवादी संगठन:
- राजनीतिक, धार्मिक या वैचारिक उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसा का उपयोग करते हैं।
- नागरिकों को डराने और सरकार को कमजोर करने का प्रयास करते हैं।
- बम विस्फोट, हत्या, अपहरण जैसी हिंसक गतिविधियों में शामिल होते हैं।
- अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं।
- सुरक्षा बलों के लिए खतरा बनते हैं।
प्रश्न 6. मानव अधिकार' क्या है?
Ans. मानव अधिकार:
- मूलभूत अधिकार और स्वतंत्रताएं जो सभी मनुष्यों के लिए समान हैं।
- जन्मजात अधिकार, किसी भी सरकार द्वारा नहीं दिए जाते।
- सार्वभौमिक और अविभाज्य - सभी के लिए समान, किसी से छीने नहीं जा सकते।
- आत्मसम्मान, समानता और न्याय के लिए आवश्यक।
प्रश्न 7. एल. पी. जी. (L.P.G) की नीति क्या है ?
Ans. एलपीजी (LPG) का मतलब है उदारीकरण (Liberalization), निजीकरण (Privatization), और वैश्वीकरण (Globalization). 1991 में भारत सरकार ने नई आर्थिक नीति (New Economic Policy) की घोषणा की थी. इसे आम तौर पर एलपीजी सुधार के नाम से जाना जाता है.
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प्रश्न 8. वैश्वीकरण के किन्हीं दो लाभ लिखिए ।
Ans. 1. आर्थिक विकास:
- व्यापार और निवेश में वृद्धि
- रोजगार सृजन
- गरीबी में कमी
- आर्थिक समृद्धि
2. तकनीकी प्रगति:
- नई तकनीकों का प्रसार
- उत्पादकता में वृद्धि
- जीवन स्तर में सुधार
- ज्ञान और शिक्षा का प्रसार
प्रश्न 9. भारत के प्रथम चुनाव आयुक्त का नाम लिखिए।
Ans. भारत के पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुकुमार सेन थे. उन्होंने 21 मार्च, 1950 से 19 दिसंबर, 1958 तक इस पद पर रहे. साल 1954 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया. सुकुमार सेन पश्चिम बंगाल से थे.
प्रश्न 10. भारत में किस प्रकार की अर्थव्यवस्था है ?
Ans. भारत में मिश्रित अर्थव्यवस्था है। इसका अर्थ है कि भारत में निजी और सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों का योगदान अर्थव्यवस्था में होता है।
प्रश्न 11. सार्वजनिक क्षेत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
Ans. सार्वजनिक क्षेत्र का मुख्य उद्देश्य जनहित की सेवा करना है। सार्वजनिक क्षेत्र में, सरकार अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
प्रश्न 12. जनता पार्टी के पतन का एक कारण लिखिए।
Ans. जनता पार्टी के पतन का एक मुख्य कारण आंतरिक कलह था।
प्रश्न 13. श्रीमती इंदिरा गाँधी द्वारा आपातकाल को जरूरी ठहराते हुए इसके क्या कारण बताए थे ?
Ans. श्रीमती इंदिरा गांधी ने 25 जून 1975 को देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा की थी।
उन्होंने इसके लिए निम्नलिखित कारण बताए थे:
1. आंतरिक सुरक्षा का खतरा:
2. आर्थिक संकट:
3. विदेशी खतरा:
प्रश्न 14. जगजीवन राम कौन थे ?
Ans. जगजीवन राम भारत के एक महान स्वतंत्रता सेनानी, राजनेता और दलित नेता थे।
प्रश्न 15. अटल बिहारी बाजपेयी किस गठबंधन के नेता के तौर पर प्रधानमंत्री बने थे ?
Ans. अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेता के तौर पर प्रधानमंत्री बने थे।एनडीए 1998 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अन्य क्षेत्रीय दलों के गठबंधन से बना था।
प्रश्न 16. RJD का पूरा नाम लिखिए।
Ans. राष्ट्रीय जनता दल
प्रश्न 17. अन्य पिछड़ी जाति (OBC) का क्या आशय है?
Ans. अन्य पिछड़ी जाति (OBC) का आशय:
- सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग: OBC भारत में उन जातियों का एक समूह है जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं।
- जाति आधारित वर्गीकरण: OBC जाति आधारित वर्गीकरण का हिस्सा है, जो भारत में आरक्षण नीति के लिए इस्तेमाल होता है।
- सरकारी सहायता: OBC को शिक्षा, रोजगार और सरकारी योजनाओं में आरक्षण के माध्यम से सहायता प्रदान की जाती है।
प्रश्न 18. मंडल आयोग की दो मुख्य सिफारिशें से कौन थी?
Ans. मंडल आयोग की दो मुख्य सिफारिशें:
-
आरक्षण:
- सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27% आरक्षण।
-
आर्थिक मानदंड:
- OBC की पहचान के लिए जाति के साथ-साथ आर्थिक मानदंड का भी उपयोग किया जाना चाहिए।
प्रश्न 19. गठबंधन सरकार की दो राजनीतिक समस्या का उल्लेख कीजिए।
Ans. 1. नीतिगत मतभेद:
- गठबंधन सरकार में शामिल विभिन्न दलों की अपनी-अपनी नीतियां और विचारधाराएं होती हैं।
2. राजनीतिक अस्थिरता:
- गठबंधन सरकार में शामिल दलों के बीच मतभेद और खींचतान के कारण सरकार गिर सकती है।
प्रश्न 20. न्यायपालिका की स्वतंत्रता क्यो आवश्यक है ?
Ans. 1. कानून के शासन को बनाए रखने के लिए:
2. नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए:
3. लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए:
4. न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए:
5. सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के लिए:
Short Answers Questions
प्रश्न 1. भारत द्वारा गुट निरपेक्षता की नीति को अपनायें जाने के चार कारण लिखिए ।
Ans. भारत द्वारा गुट निरपेक्षता की नीति को अपनाये जाने के चार कारण:
1. उपनिवेशवाद विरोधी भावना: भारत ने स्वतंत्रता प्राप्त करते ही उपनिवेशवाद का विरोध किया। गुट निरपेक्षता की नीति को अपनाकर भारत ने उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद के खिलाफ अपना रुख स्पष्ट किया।
2. शीत युद्ध से दूरी: शीत युद्ध के दौरान दुनिया दो गुटों में विभाजित हो गई थी - अमेरिका और सोवियत संघ। भारत ने दोनों गुटों से दूरी बनाए रखने का फैसला किया और गुट निरपेक्षता की नीति अपनाई।
3. राष्ट्रीय हित: भारत ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए गुट निरपेक्षता की नीति को अपनाया। इस नीति ने भारत को दोनों गुटों से सहायता प्राप्त करने की अनुमति दी।
4. अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा: भारत ने विश्व शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए गुट निरपेक्षता की नीति को अपनाया। इस नीति ने भारत को दोनों गुटों के बीच मध्यस्थता करने और विश्व शांति में योगदान करने की अनुमति दी।
प्रश्न 2. शीत युद्ध की प्रवृति लिखिए |
Ans. शीत युद्ध की प्रवृति:
शीत युद्ध, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक, राजनीतिक और सैन्य तनाव का दौर था। शीत युद्ध की कुछ प्रमुख प्रवृत्तियां निम्नलिखित हैं:
1. वैचारिक द्वंद्व: शीत युद्ध मुख्य रूप से दो महाशक्तियों, अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वैचारिक द्वंद्व था। अमेरिका पूंजीवाद और लोकतंत्र का समर्थन करता था, जबकि सोवियत संघ साम्यवाद और सर्वहारा वर्ग के शासन का समर्थन करता था।
2. सैन्य प्रतिस्पर्धा: दोनों महाशक्तियों ने अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन और विस्तार किया। उन्होंने परमाणु हथियारों की होड़, अंतरिक्ष की दौड़ और प्रॉक्सी युद्धों में भाग लिया।
3. राजनीतिक ध्रुवीकरण: दुनिया दो गुटों में विभाजित हो गई - अमेरिकी गुट और सोवियत गुट। दोनों गुटों ने अपने-अपने सहयोगी देशों का एक नेटवर्क बनाया।
4. गठबंधन: दोनों महाशक्तियों ने अपने-अपने हितों को बढ़ावा देने के लिए गठबंधन बनाए। अमेरिका ने नाटो और SEATO जैसे गठबंधन बनाए, जबकि सोवियत संघ ने वारसा पैक्ट बनाया।
5. प्रॉक्सी युद्ध: दोनों महाशक्तियों ने सीधे युद्ध में भाग लेने से बचते हुए, अन्य देशों में प्रॉक्सी युद्ध लड़े। इन युद्धों में कोरिया, वियतनाम और अफगानिस्तान शामिल थे।
6. तनाव और भय: शीत युद्ध के दौरान दुनिया में तनाव और भय का माहौल था। परमाणु युद्ध के खतरे ने लोगों को चिंतित कर दिया था।
8. अंत: शीत युद्ध 1991 में सोवियत संघ के विघटन के साथ समाप्त हुआ।
प्रश्न 3. सोवियत संघ के विघटन के परिणाम लिखिए |
Ans. सोवियत संघ के विघटन के परिणाम:
1. वैश्विक राजनीति में बदलाव: सोवियत संघ के विघटन ने वैश्विक राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लाए। अमेरिका एकमात्र महाशक्ति बन गया और दुनिया में एकध्रुवीय व्यवस्था स्थापित हुई।
2. पूर्वी यूरोप में बदलाव: सोवियत संघ के विघटन के बाद पूर्वी यूरोप के देशों में साम्यवाद का पतन हुआ और लोकतंत्र और पूंजीवाद की स्थापना हुई।
3. आर्थिक प्रभाव: सोवियत संघ के विघटन के बाद पूर्वी यूरोप और सोवियत संघ के देशों में आर्थिक संकट पैदा हुआ। इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं को पटरी पर लाने में कई साल लग गए।
4. सामाजिक प्रभाव: सोवियत संघ के विघटन के बाद पूर्वी यूरोप और सोवियत संघ के देशों में सामाजिक अशांति पैदा हुई। इन देशों में राष्ट्रवाद और जातीयतावाद का उदय हुआ।
5. रूस का उदय: सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस एक प्रमुख शक्ति के रूप में उभरा। रूस ने अपनी सैन्य शक्ति और राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करने का प्रयास किया।
प्रश्न 4. सोवियत प्रणाली की खामियाँ स्पष्ट कीजिए ।
Ans. सोवियत प्रणाली की खामियाँ:
1. राजनीतिक:
- कम्युनिस्ट पार्टी का एकाधिकार: सोवियत संघ में कम्युनिस्ट पार्टी का एकाधिकार था। अन्य राजनीतिक दलों को अनुमति नहीं थी।
- अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभाव: सोवियत संघ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अभाव था। लोगों को अपनी राय व्यक्त करने की अनुमति नहीं थी।
2. आर्थिक:
- केंद्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था: सोवियत संघ में केंद्रीकृत योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था थी। यह अर्थव्यवस्था अक्षम और भ्रष्ट थी।
- तकनीकी पिछड़ापन: सोवियत संघ तकनीकी रूप से पिछड़ा हुआ था।
3. सामाजिक:
- सामाजिक असमानता: सोवियत संघ में सामाजिक असमानता थी। पार्टी के सदस्यों और आम लोगों के बीच भेदभाव होता था।
- पर्यावरणीय क्षति: सोवियत संघ में पर्यावरणीय क्षति हुई।
4. वैदेशिक नीति:
- शीत युद्ध: सोवियत संघ शीत युद्ध में शामिल था। इस युद्ध ने दुनिया को दो गुटों में विभाजित कर दिया और वैश्विक तनाव और भय का माहौल पैदा किया।
- हथियारों की होड़: सोवियत संघ ने हथियारों की होड़ में भाग लिया। इस होड़ ने दुनिया भर में सैन्य खर्च में वृद्धि हुई।
प्रश्न 5. कांग्रेस के एक दलीय प्रभुत्व से भारतीय राजनीति पर क्या नकारात्मक प्रभाव पड़े ?
Ans. कांग्रेस के एक दलीय प्रभुत्व से भारतीय राजनीति पर नकारात्मक प्रभाव:
-
1947 से 1967 तक कांग्रेस प्रभुत्व काल:
- इस दौरान, कांग्रेस ने भारतीय राजनीति पर अपनी भूमिका को निभाया और विपक्ष की भी।
- चुनाव प्रक्रिया ने निष्पक्षता और लोकतांत्रिकता को बढ़ावा दिया.
- चुनावों में कांग्रेस को बहुमत मिला, लेकिन वोटों का स्पष्ट बहुमत नहीं था.
- इस दौरान दक्षिणपंथ की ओर झुकाव और कांग्रेस की छवि मलिन पड़ने लगी थी
-
1967 के चौथे आम चुनाव में बदलाव:
- इस चुनाव में कांग्रेस को यह अनुभव हुआ कि जनता पर से उसकी पकड़ ढीली हो रही है.
- इससे कांग्रेस को अपनी राजनीतिक दलीय प्रणाली में बदलाव करने की आवश्यकता महसूस हुई34.
इस दौरान कांग्रेस की छवि में बदलाव हुआ और विपक्ष के दलों को भी अधिक अवसर मिले।
प्रश्न 6. आजादी के बाद के प्रारंभिक वर्षों के चुनावों में कांग्रेस की अत्यधिक सफलता के कारण समझाइए |
Ans. 1- जनता की नब्ज टटोलकर उन्हें पक्ष में करने में सफल।
2- पार्टी गठित करने के तुरंत बाद से ही चुनाव की तैयारी में जुटना।
3- युवाओं को निचले तबके के लोगों को केंद्र में रखकर चलाया चुनाव अभियान।
4- हर स्तर पर पारदर्शिता ने भ्रष्टाचार विरोधियों को पाटी्र के पक्ष में एकजुट किया।
5- हमेशा पार्टी आगे रही न कि प्रत्याशी।
प्रश्न 7. भारतीय संविधान निर्माताओं ने संसदीय सरकार को क्यों अपनाया ?
Ans. भारतीय संविधान निर्माताओं ने संसदीय सरकार को अपनाया :
कारण:
1. विविधतापूर्ण समाज: भारत एक विविधतापूर्ण समाज वाला देश है। संसदीय प्रणाली सभी वर्गों और समुदायों के लोगों को प्रतिनिधित्व प्रदान करती है।
2. ब्रिटिश शासन का प्रभाव: भारत लंबे समय तक ब्रिटिश शासन के अधीन रहा था। ब्रिटिश शासन में भी संसदीय प्रणाली थी। संविधान निर्माताओं ने इस प्रणाली को अपनाना उचित समझा।
3. स्थिरता: संसदीय प्रणाली में सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है। यदि सरकार जनता का विश्वास खो देती है तो उसे हटाया जा सकता है।
4. लचीलापन: संसदीय प्रणाली में सरकार को बदलना आसान होता है। यदि कोई सरकार अच्छा काम नहीं कर रही है तो उसे बदलकर एक नई सरकार स्थापित की जा सकती है।
5. लोकतंत्र: संसदीय प्रणाली लोकतंत्र के लिए सबसे उपयुक्त प्रणाली मानी जाती है। इस प्रणाली में लोगों को अपनी सरकार चुनने का अधिकार होता है।
प्रश्न 8. ऐसा क्यों कहा जाता है कि देश में पहला आम चुनाव करवाना किसी चुनौती से काम नहीं था?
Ans. देश में पहला आम चुनाव करवाना किसी चुनौती से काम नहीं था:
कारण:
1. विशाल आबादी: भारत की आबादी बहुत बड़ी है। 1951-52 में, जब पहला आम चुनाव हुआ, तब भारत की आबादी 36 करोड़ थी। इतने बड़े देश में चुनाव करवाना एक बहुत बड़ी चुनौती थी।
2. निरक्षरता: 1951-52 में, भारत की 85% आबादी निरक्षर थी। लोगों को मतदान की प्रक्रिया समझाना और उन्हें मतदान के लिए प्रेरित करना एक बड़ा काम था।
3. गरीबी: भारत उस समय एक गरीब देश था। चुनाव करवाने के लिए बहुत सारे पैसे की आवश्यकता थी।
4. भौगोलिक विविधता: भारत एक भौगोलिक रूप से विविधतापूर्ण देश है। देश के कई हिस्सों में पहुंचना बहुत मुश्किल था।
5. राजनीतिक अस्थिरता: भारत उस समय एक राजनीतिक रूप से अस्थिर देश था। कई राजनीतिक दल और विचारधाराएं थीं। चुनावों को शांतिपूर्ण तरीके से करवाना एक बड़ी चुनौती थी।
प्रश्न 9. आन्ध्रप्रदेश में चले शराब विरोधी आन्दोलन ने देश का ध्यान कुछ गंभीर मुद्दों की तरफ खींचा है, ये मुद्दे क्या थे ?
Ans. आन्ध्रप्रदेश में चले शराब विरोधी आन्दोलन ने देश का ध्यान कुछ गंभीर मुद्दों की तरफ खींचा है, ये मुद्दे थे:
1. शराबबंदी: आन्ध्रप्रदेश में शराबबंदी लागू थी, लेकिन यह पूरी तरह से सफल नहीं थी। शराब की तस्करी और अवैध शराब का निर्माण बड़ी समस्याएं थीं।
2. महिलाओं की सुरक्षा: शराब के कारण घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई थी।
3. स्वास्थ्य: शराब के कारण स्वास्थ्य समस्याओं में वृद्धि हुई थी।
4. राजस्व: शराबबंदी के कारण सरकार का राजस्व कम हो गया था।
5. सामाजिक न्याय: शराबबंदी का गरीब और वंचित समुदायों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था।
प्रश्न 10. नये सामाजिक आन्दोलन किस प्रकार पुराने सामाजिक आन्दोलन से भिन्न है ?
Ans. नये सामाजिक आन्दोलन और पुराने सामाजिक आन्दोलन में अंतर:
1. मुद्दे: नये सामाजिक आन्दोलन पर्यावरण, नारीवादी, LGBTQIA+ अधिकार, आदि जैसे सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित होते हैं। पुराने सामाजिक आन्दोलन मुख्य रूप से आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर केंद्रित थे।
2. संगठन: नये सामाजिक आन्दोलन अक्सर विकेंद्रीकृत होते हैं और उनमें कोई औपचारिक नेतृत्व नहीं होता है। पुराने सामाजिक आन्दोलन अक्सर केंद्रीकृत होते थे और उनमें एक मजबूत नेतृत्व होता था।
3. रणनीति: नये सामाजिक आन्दोलन अक्सर अहिंसक प्रतिरोध और नागरिक अवज्ञा का उपयोग करते हैं। पुराने सामाजिक आन्दोलन अक्सर हड़ताल, विरोध प्रदर्शन और हिंसक प्रतिरोध का उपयोग करते थे।
4. प्रभाव: नये सामाजिक आन्दोलन ने सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पुराने सामाजिक आन्दोलन ने राजनीतिक और आर्थिक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
5. दर्शन: नये सामाजिक आन्दोलन अक्सर व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय पर केंद्रित होते हैं। पुराने सामाजिक आन्दोलन अक्सर सामूहिकता और सामाजिक समानता पर केंद्रित थे।
प्रश्न 11. नर्मदा बचाओ आन्दोलन का वर्णन कीजिए।
Ans. नर्मदा बचाओ आन्दोलन:
परिचय:
नर्मदा बचाओ आन्दोलन (एनबीए) भारत का एक पर्यावरणीय और सामाजिक आन्दोलन था जो 1980 के दशक में शुरू हुआ था। यह आन्दोलन नर्मदा नदी पर बांधों के निर्माण के खिलाफ था।
कारण:
एनबीए का मुख्य कारण नर्मदा नदी पर बांधों के निर्माण से होने वाले पर्यावरणीय और सामाजिक नुकसान को रोकना था। इन बांधों से बड़ी संख्या में लोगों का विस्थापन होता, वन क्षेत्रों का विनाश होता और नर्मदा नदी का पारिस्थितिकी तंत्र नष्ट होता।
आन्दोलन:
एनबीए ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों, धरनों, और भूख हड़तालों का उपयोग करके अपनी मांगों को आगे बढ़ाया। इस आन्दोलन में कई सामाजिक कार्यकर्ता, आदिवासी समुदाय, और किसान शामिल थे।
परिणाम:
एनबीए ने नर्मदा नदी पर बांधों के निर्माण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आन्दोलन ने भारत में पर्यावरणीय जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया।
महत्व:
एनबीए भारत का एक महत्वपूर्ण सामाजिक और पर्यावरणीय आन्दोलन था। इस आन्दोलन ने भारत में पर्यावरणीय मुद्दों को लेकर लोगों की जागरूकता बढ़ाने और सामाजिक परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रश्न 12. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ या क्षेत्रवाद के कारण लिखिए।
Ans. क्षेत्रीय आकांक्षाएँ या क्षेत्रवाद के कारण:
1. ऐतिहासिक कारण:
- विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और संस्कृति हो सकती है।
- कुछ क्षेत्रों में लंबे समय से उपेक्षा या भेदभाव की भावना हो सकती है।
2. भौगोलिक कारण:
- कुछ क्षेत्रों में भौगोलिक बाधाएं हो सकती हैं जो उन्हें मुख्यधारा से अलग करती हैं।
- कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की कमी हो सकती है।
3. आर्थिक कारण:
- कुछ क्षेत्रों में आर्थिक विकास की कमी हो सकती है।
- कुछ क्षेत्रों में गरीबी और बेरोजगारी की उच्च दर हो सकती है।
4. राजनीतिक कारण:
- कुछ क्षेत्रों में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी हो सकती है।
- कुछ क्षेत्रों में भ्रष्टाचार और कुशासन की समस्या हो सकती है।
प्रश्न 13. द्रविड़ आन्दोलन का वर्णन कीजिए।
Ans. द्रविड़ आंदोलन का वर्णन:
परिचय:
द्रविड़ आंदोलन दक्षिण भारत में एक सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन था जो 19वीं शताब्दी के अंत में शुरू हुआ था। इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य द्रविड़ लोगों को ब्राह्मणवाद और उत्तर भारतीय वर्चस्व से मुक्ति दिलाना था।
विचारधारा:
द्रविड़ आंदोलन का मानना था कि द्रविड़ लोग आर्यों से अलग एक अलग नस्ल हैं। उन्होंने द्रविड़ भाषाओं, संस्कृति और इतिहास को बढ़ावा दिया।
नेता:
द्रविड़ आंदोलन के कई प्रमुख नेता थे, जिनमें ई.वी. रामास्वामी "पेरियार", सी.एन. अन्नादुरै, और एम. करुणानिधि शामिल हैं।
कार्य:
द्रविड़ आंदोलन ने द्रविड़ लोगों के बीच सामाजिक जागरूकता बढ़ाने के लिए कई कार्य किए। इन कार्यों में शामिल हैं:
- जाति प्रथा का विरोध
- मंदिरों में प्रवेश का अधिकार
- शिक्षा और रोजगार में समान अवसर
- द्रविड़ भाषाओं का विकास
प्रभाव:
द्रविड़ आंदोलन का दक्षिण भारत की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा। इस आंदोलन ने द्रविड़ लोगों को सशक्त बनाया और उन्हें सामाजिक न्याय और समानता के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया।
प्रश्न 14. भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के किन्हीं दो अलगाववादी आन्दोलन का वर्णन कीजिए।
Ans. भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के दो अलगाववादी आंदोलन:
1. नगा विद्रोह:
- नगा विद्रोह भारत के नागालैंड राज्य में एक अलगाववादी आंदोलन है जो 1950 के दशक से चल रहा है।
- इस आंदोलन का नेतृत्व नगा नेशनल काउंसिल (एनएनसी) करता है।
- एनएनसी का मुख्य उद्देश्य नागालैंड के लिए एक स्वतंत्र देश की स्थापना करना है।
- इस आंदोलन में हिंसा और शांतिपूर्ण दोनों तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया गया है।
2. उल्फा आंदोलन:
- उल्फा आंदोलन भारत के असम राज्य में एक अलगाववादी आंदोलन है जो 1979 में शुरू हुआ था।
- इस आंदोलन का नेतृत्व यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) करता है।
- उल्फा का मुख्य उद्देश्य असम के लिए एक स्वतंत्र देश की स्थापना करना है।
- इस आंदोलन में हिंसा और शांतिपूर्ण दोनों तरह के तरीकों का इस्तेमाल किया गया है।
इन दो आंदोलनों के कुछ समान कारण:
- इन दोनों आंदोलनों का मुख्य कारण भारत सरकार द्वारा इन राज्यों की उपेक्षा और भेदभाव की भावना है।
- इन दोनों राज्यों में स्वायत्तता और स्वशासन की इच्छा भी एक महत्वपूर्ण कारण है।
इन दो आंदोलनों के कुछ महत्वपूर्ण अंतर:
- नगा विद्रोह मुख्य रूप से एक जातीय अलगाववादी आंदोलन है, जबकि उल्फा आंदोलन मुख्य रूप से एक राजनीतिक अलगाववादी आंदोलन है।
- नगा विद्रोह नागालैंड राज्य तक ही सीमित है, जबकि उल्फा आंदोलन असम राज्य के अलावा अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भी फैल गया है।
प्रश्न 15. भारतीय संविधान की कौन-कौन सी विशेषताएँ यह सुनिश्चित करती है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतांत्रिक ढाँचे में होगी ?
Ans. भारतीय संविधान की विशेषताएं जो राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लोकतांत्रिक ढांचे में सुनिश्चित करती हैं:
1. बहुदलीय प्रणाली:
- भारतीय संविधान बहुदलीय प्रणाली की स्थापना करता है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं वाले दल चुनावों में भाग ले सकते हैं।
- यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी एक दल या विचारधारा देश पर हावी न हो सके।
2. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव:
- भारतीय संविधान स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों का प्रावधान करता है, जिसमें सभी नागरिकों को वोट देने का अधिकार होता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष और उचित तरीके से हो।
3. शक्तियों का पृथक्करण:
- भारतीय संविधान सरकार की तीन शक्तियों - विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका - को अलग-अलग करता है।
- यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी एक शाखा बहुत अधिक शक्तिशाली न हो सके और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा निष्पक्ष हो सके।
4. मौलिक अधिकार और कर्तव्य:
- भारतीय संविधान नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान करता है, जैसे कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सभा की स्वतंत्रता और संगठन बनाने की स्वतंत्रता।
- यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में भाग ले सकें और अपनी राय व्यक्त कर सकें।
प्रश्न 16. मिजोरम में ऊपजी अलगाववादी मांग के पहलुओं को समझाइए ।
Ans. मिजोरम में अलगाववादी मांग के पहलू:
1. ऐतिहासिक पहलू:
- मिजोरम में अलगाववादी मांग का मुख्य कारण ब्रिटिश उपनिवेशवाद का दौर है।
- ब्रिटिश शासन के दौरान मिजोरम को 'लुशाई हिल्स' के नाम से जाना जाता था और इसे असम के एक जिले के रूप में प्रशासित किया जाता था।
- मिजो लोगों ने ब्रिटिश शासन का विरोध किया और अपनी स्वतंत्रता की मांग की।
2. जातीय पहलू:
- मिजोरम में अलगाववादी मांग का एक महत्वपूर्ण पहलू जातीयता है।
- मिजो लोग एक अलग जातीय समूह हैं जिनकी अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास है।
- मिजो लोगों का मानना है कि वे भारत के बाकी हिस्सों से अलग हैं और उन्हें अपनी स्वतंत्रता का अधिकार है।
3. धार्मिक पहलू:
- मिजोरम में अलगाववादी मांग का एक अन्य पहलू धर्म है।
- मिजोरम में अधिकांश लोग ईसाई हैं और उनका मानना है कि भारत में हिंदुओं का वर्चस्व है।
- मिजो ईसाइयों का मानना है कि वे एक धार्मिक अल्पसंख्यक समूह हैं और उन्हें अपनी स्वतंत्रता का अधिकार है।
4. राजनीतिक पहलू:
- मिजोरम में अलगाववादी मांग का एक महत्वपूर्ण पहलू राजनीति है।
- मिजो लोगों का मानना है कि भारत सरकार ने उन्हें उपेक्षित किया है और उन्हें अपनी स्वतंत्रता का अधिकार है।
- मिजो लोगों का मानना है कि वे भारत सरकार के शासन में समृद्ध नहीं हो सकते हैं।
प्रश्न 17. "असम आंदोलन सांस्कृतिक अभियान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली जुली अभिव्यक्ति थी" व्याख्या कीजिए।
Ans. असम आंदोलन: सांस्कृतिक अभियान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली जुली अभिव्यक्ति
1. सांस्कृतिक अभियान:
- असम आंदोलन का एक महत्वपूर्ण पहलू सांस्कृतिक अभियान था।
- इस आंदोलन के दौरान असमिया भाषा, संस्कृति और इतिहास को बढ़ावा दिया गया।
- इस आंदोलन ने असमिया पहचान को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
2. आर्थिक पिछड़ापन:
- असम आंदोलन का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू आर्थिक पिछड़ापन था।
- असम के लोगों का मानना था कि वे भारत के बाकी हिस्सों की तुलना में आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं।
- इस आंदोलन ने असम के विकास और समृद्धि के लिए लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. मिली जुली अभिव्यक्ति:
- असम आंदोलन सांस्कृतिक अभियान और आर्थिक पिछड़ेपन की मिली जुली अभिव्यक्ति थी।
- इस आंदोलन ने असमिया पहचान को मजबूत करने और असम के विकास और समृद्धि के लिए लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
4. आंदोलन के कारण:
- बांग्लादेशी घुसपैठ
- असमिया भाषा और संस्कृति को खतरा
- आर्थिक पिछड़ापन
- राजनीतिक उपेक्षा
प्रश्न 18. अलगाववादी आन्दोलन पर एक लेख लिखिए।
Ans. अलगाववादी आंदोलन: एक परिचय
अलगाववाद एक राजनीतिक विचारधारा है जो किसी क्षेत्र या समुदाय को किसी बड़े राज्य या राष्ट्र से अलग करने का समर्थन करती है। अलगाववादी आंदोलन विभिन्न कारणों से शुरू हो सकते हैं, जिनमें राजनीतिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, जातीय, या भाषाई भेदभाव शामिल हैं।
अलगाववादी आंदोलनों के कुछ सामान्य लक्षण:
- स्वतंत्रता की मांग: अलगाववादी आंदोलन आमतौर पर किसी क्षेत्र या समुदाय के लिए स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय की मांग करते हैं।
- राजनीतिक प्रतिनिधित्व की कमी: अलगाववादी आंदोलन अक्सर इस बात का दावा करते हैं कि उन्हें बड़े राज्य या राष्ट्र में पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता है।
- आर्थिक उपेक्षा: अलगाववादी आंदोलन अक्सर इस बात का दावा करते हैं कि उन्हें बड़े राज्य या राष्ट्र द्वारा आर्थिक रूप से उपेक्षित किया जाता है।
- सांस्कृतिक या धार्मिक भेदभाव: अलगाववादी आंदोलन अक्सर इस बात का दावा करते हैं कि उन्हें बड़े राज्य या राष्ट्र में अपनी संस्कृति या धर्म का अभ्यास करने की स्वतंत्रता नहीं है।
अलगाववादी आंदोलनों के कुछ उदाहरण:
- खालिस्तान आंदोलन: यह भारत में एक अलगाववादी आंदोलन है जो पंजाब राज्य के लिए एक अलग सिख राष्ट्र की मांग करता है।
- उल्फा आंदोलन: यह भारत में एक अलगाववादी आंदोलन है जो असम राज्य के लिए एक अलग स्वतंत्र राष्ट्र की मांग करता है।
- लिट्टे आंदोलन: यह श्रीलंका में एक अलगाववादी आंदोलन था जो श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी भागों में एक अलग तमिल राष्ट्र की मांग करता था।
अलगाववादी आंदोलनों के परिणाम:
- हिंसा और संघर्ष: अलगाववादी आंदोलन अक्सर हिंसा और संघर्ष का कारण बनते हैं।
- राजनीतिक अस्थिरता: अलगाववादी आंदोलन राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन सकते हैं।
- आर्थिक क्षति: अलगाववादी आंदोलन आर्थिक क्षति का कारण बन सकते हैं।
प्रश्न 19. अन्य पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए सरकार ने क्या-क्या कदम उठाए है ?
Ans. अन्य पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदम:
1. आरक्षण:
- सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण की व्यवस्था की गई है।
- यह आरक्षण 27% है, जो विभिन्न जातियों के बीच समान रूप से विभाजित है।
2. छात्रवृत्ति:
- अन्य पिछड़े वर्गों के छात्रों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
- यह छात्रवृत्ति विभिन्न स्तरों पर उपलब्ध है, जैसे कि प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा।
3. आर्थिक सहायता:
- अन्य पिछड़े वर्गों के लोगों को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है।
- यह सहायता विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उपलब्ध है, जैसे कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम।
4. कल्याणकारी योजनाएं:
- अन्य पिछड़े वर्गों के कल्याण के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं।
- इन योजनाओं में स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और रोजगार जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान की जाती है।
प्रश्न 20. गोर्वाचेव की उन नीतियों का उल्लेख कीजिए जिसनें सोवियत संघ के विघटन की नींव रखी।
Ans. गोर्बाचेव की नीतियां जिन्होंने सोवियत संघ के विघटन की नींव रखी:
1. ग्लास्नोस्त:
- ग्लास्नोस्त का अर्थ है "खुलापन"।
- यह नीति सोवियत संघ में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई थी।
- इस नीति ने सोवियत नागरिकों को सोवियत सरकार और समाज के बारे में खुलकर आलोचना करने की अनुमति दी।
2. पेरेस्त्रोइका:
- पेरेस्त्रोइका का अर्थ है "पुनर्गठन"।
- यह नीति सोवियत अर्थव्यवस्था को विकेंद्रीकृत करने और बाजार सुधारों को लागू करने के लिए शुरू की गई थी।
- इस नीति ने सोवियत अर्थव्यवस्था को कमजोर कर दिया और सोवियत संघ के विभिन्न गणराज्यों में स्वतंत्रता की भावना को बढ़ावा दिया।
3. राष्ट्रीयतावाद का उदय:
- ग्लास्नोस्त और पेरेस्त्रोइका की नीतियों ने सोवियत संघ के विभिन्न गणराज्यों में राष्ट्रवाद के उदय को बढ़ावा दिया।
- इन गणराज्यों के लोगों ने अपनी स्वतंत्रता और अपनी संस्कृति और भाषा को संरक्षित करने की मांग की।
4. शीत युद्ध का अंत:
- गोर्बाचेव ने शीत युद्ध को समाप्त करने के लिए अमेरिका के साथ कई समझौते किए।
- इन समझौतों ने सोवियत संघ को कमजोर कर दिया और सोवियत संघ के विभिन्न गणराज्यों में स्वतंत्रता की भावना को बढ़ावा दिया।
Long Answers Questions
प्रश्न 1. क्षेत्रीय संगठनो को बनाने के उद्देश्य क्या है?
Ans. क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के उद्देश्य:
क्षेत्रीय संगठनों को बनाने के अनेक उद्देश्य होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. क्षेत्रीय सहयोग:
- क्षेत्रीय संगठनों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है।
- यह सहयोग विभिन्न क्षेत्रों में हो सकता है, जैसे कि व्यापार, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, और संस्कृति।
- क्षेत्रीय सहयोग से क्षेत्रीय देशों के विकास और समृद्धि में मदद मिलती है।
2. शांति और सुरक्षा:
- क्षेत्रीय संगठनों का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य क्षेत्र में शांति और सुरक्षा को बनाए रखना है।
- यह संगठनों के बीच संघर्षों को हल करने और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरों का मुकाबला करने में मदद करते हैं।
- क्षेत्रीय संगठन क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जो क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
3. आर्थिक विकास:
- क्षेत्रीय संगठन क्षेत्रीय देशों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- वे व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग करने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को एकीकृत करने में मदद करते हैं।
- क्षेत्रीय संगठन क्षेत्रीय देशों के लिए एक मंच प्रदान करते हैं जहाँ वे अपने आर्थिक हितों को साझा कर सकते हैं और एक दूसरे से सीख सकते हैं।
4. सामाजिक और सांस्कृतिक विकास:
- क्षेत्रीय संगठन सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- वे शिक्षा, स्वास्थ्य, और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देते हैं।
- क्षेत्रीय संगठन क्षेत्रीय देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग को बढ़ावा देते हैं, जो सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
5. वैश्विक शासन में भागीदारी:
- क्षेत्रीय संगठन वैश्विक शासन में क्षेत्रीय देशों की भागीदारी को बढ़ावा देते हैं।
- वे वैश्विक मुद्दों पर क्षेत्रीय देशों की आवाज को मजबूत करते हैं और वैश्विक निर्णय लेने में उनकी भागीदारी को सुनिश्चित करते हैं।
- क्षेत्रीय संगठन वैश्विक शासन को अधिक लोकतांत्रिक और प्रतिनिधि बनाने में मदद करते हैं।
प्रश्न 2. आसियान का प्रमुख उद्देश्यों को लिखिए।
Ans. आसियान के प्रमुख उद्देश्य:
आसियान (दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है। इसकी स्थापना 8 अगस्त 1967 को हुई थी। आसियान के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
1. क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा:
- आसियान का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में शांति और स्थिरता को बनाए रखना है।
- यह संगठन सदस्य देशों के बीच संघर्षों को हल करने और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरों का मुकाबला करने में मदद करता है।
- आसियान सदस्य देशों के बीच विश्वास और सहयोग को बढ़ावा देता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
2. आर्थिक विकास:
- आसियान का एक अन्य महत्वपूर्ण उद्देश्य सदस्य देशों के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है।
- यह संगठन व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे के विकास में सहयोग करने और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को एकीकृत करने में मदद करता है।
- आसियान सदस्य देशों के लिए एक मंच प्रदान करता है जहाँ वे अपने आर्थिक हितों को साझा कर सकते हैं और एक दूसरे से सीख सकते हैं।
3. सामाजिक और सांस्कृतिक विकास:
- आसियान सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- यह संगठन शिक्षा, स्वास्थ्य, और संस्कृति जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है।
- आसियान सदस्य देशों के लोगों के बीच संपर्क और सहयोग को बढ़ावा देता है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
4. क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग:
- आसियान सदस्य देशों को क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग करने के लिए एक मंच प्रदान करता है।
- यह संगठन सदस्य देशों को अपनी आवाज को मजबूत करने और वैश्विक निर्णय लेने में भाग लेने में मदद करता है।
- आसियान क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
5. आसियान समुदाय का निर्माण:
- आसियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य आसियान समुदाय का निर्माण करना है।
- यह समुदाय राजनीतिक, सुरक्षा, आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक सहयोग पर आधारित होगा।
- आसियान समुदाय का निर्माण क्षेत्रीय एकता और समृद्धि को बढ़ावा देगा।
प्रश्न 3. चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार के बावजूद चीन की जनता पर पड़े। किन्ही पाँच नकारात्मक प्रभावो का उल्लेख कीजिए ।
Ans. चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार के बावजूद चीन की जनता पर पड़े नकारात्मक प्रभाव:
चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार के बावजूद, चीन की जनता पर कई नकारात्मक प्रभाव भी पड़े हैं। इनमें से कुछ प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं:
1. बढ़ती असमानता:
- चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार से धनवान और गरीब के बीच की खाई बढ़ गई है।
- शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच भी असमानता बढ़ी है।
- यह असमानता सामाजिक अशांति और राजनीतिक अस्थिरता का कारण बन सकती है।
2. पर्यावरणीय क्षति:
- चीन की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था ने पर्यावरण को काफी नुकसान पहुंचाया है।
- वायु और जल प्रदूषण, वनों की कटाई, और मिट्टी का क्षरण चीन में प्रमुख पर्यावरणीय समस्याएं हैं।
- ये समस्याएं लोगों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं।
3. सामाजिक समस्याएं:
- चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार से कई सामाजिक समस्याएं भी पैदा हुई हैं।
- इनमें बेरोजगारी, अपराध, और सामाजिक अलगाव शामिल हैं।
- ये समस्याएं लोगों के जीवन स्तर और जीवन की गुणवत्ता को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं।
4. मानवाधिकारों का हनन:
- चीन में मानवाधिकारों की स्थिति चिंताजनक है।
- सरकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सभा की स्वतंत्रता और धर्म की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाती है।
- यह सरकार के आलोचकों को भी दबाती है।
5. राजनीतिक दमन:
- चीन में राजनीतिक दमन भी एक बड़ी समस्या है।
- सरकार एक पार्टी शासन प्रणाली पर आधारित है और राजनीतिक विरोध को बर्दाश्त नहीं करती है।
- यह सरकार के आलोचकों को गिरफ्तार और कैद भी करती है।
प्रश्न 4. भारत-बांग्लादेश के मध्य तनाव के प्रमुख कारणों को लिखिए ।
Ans. भारत-बांग्लादेश के मध्य तनाव के प्रमुख कारण:
1. सीमा विवाद:
- भारत और बांग्लादेश के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसके कुछ हिस्सों में विवाद है।
- इन विवादित क्षेत्रों में लैंड एनक्लेव, नदी जल का बंटवारा, और समुद्री सीमा शामिल हैं।
- सीमा विवाद दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण है।
2. अवैध घुसपैठ:
- बांग्लादेश से भारत में अवैध घुसपैठ एक बड़ी समस्या है।
- यह घुसपैठ सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का कारण बनती है।
- अवैध घुसपैठ दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण है।
3. जल विवाद:
- भारत और बांग्लादेश 54 नदियों को साझा करते हैं।
- इन नदियों के जल का बंटवारा दोनों देशों के बीच एक विवादास्पद मुद्दा है।
- जल विवाद दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण है।
4. आतंकवाद:
- बांग्लादेश में आतंकवादी गतिविधियां भारत के लिए एक सुरक्षा चिंता का विषय हैं।
- भारत का आरोप है कि बांग्लादेश सरकार आतंकवादियों को पनाह दे रही है।
- आतंकवाद दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण है।
5. व्यापार और निवेश:
- भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार और निवेश का स्तर अपेक्षाकृत कम है।
- दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए कई मुद्दों को सुलझाना होगा।
- व्यापार और निवेश दोनों देशों के बीच तनाव का एक प्रमुख कारण है।
प्रश्न 5. दक्षिण एशिया में शांति एवं सहयोग के प्रयास व तरीकों का उल्लेख कीजिए।
Ans. दक्षिण एशिया में शांति एवं सहयोग के प्रयास व तरीके:
दक्षिण एशिया में शांति एवं सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए गए हैं। इनमें से कुछ प्रमुख प्रयास और तरीके निम्नलिखित हैं:
क्षेत्रीय संगठन:
- दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क): यह संगठन 1985 में स्थापित किया गया था और इसका उद्देश्य क्षेत्र में शांति एवं सहयोग को बढ़ावा देना है।
- दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय: यह विश्वविद्यालय 2010 में स्थापित किया गया था और इसका उद्देश्य क्षेत्र के छात्रों के बीच शिक्षा और सहयोग को बढ़ावा देना है।
द्विपक्षीय संबंध:
- भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रयास किए गए हैं।
- भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध मजबूत और मैत्रीपूर्ण हैं।
- श्रीलंका और मालदीव के बीच भी संबंध मजबूत हैं।
सांस्कृतिक सहयोग:
- दक्षिण एशियाई खेल: यह खेल प्रतियोगिता हर दो साल में आयोजित की जाती है और इसका उद्देश्य क्षेत्र के खिलाड़ियों के बीच खेलकूद और सहयोग को बढ़ावा देना है।
- दक्षिण एशियाई फिल्म महोत्सव: यह फिल्म महोत्सव हर साल आयोजित किया जाता है और इसका उद्देश्य क्षेत्र के फिल्म निर्माताओं और फिल्मों को बढ़ावा देना है।
अन्य प्रयास:
- आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए क्षेत्रीय सहयोग।
- जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग।
- शिक्षा, स्वास्थ्य, और सामाजिक विकास के क्षेत्र में क्षेत्रीय सहयोग।
प्रश्न 6. भारत व श्रीलंका के संबंध तथा मतभेद के कारण लिखिए।
Ans. भारत व श्रीलंका के संबंध तथा मतभेद के कारण:
संबंध:
- भारत और श्रीलंका के बीच संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक आधारों पर मजबूत हैं।
- दोनों देशों के बीच गहरे व्यापारिक और आर्थिक संबंध भी हैं।
- भारत श्रीलंका का सबसे बड़ा विकास भागीदार है।
- दोनों देश सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर भी सहयोग करते हैं।
मतभेद:
- तमिल मुद्दा: श्रीलंका में तमिल अल्पसंख्यक समुदाय के अधिकारों को लेकर भारत और श्रीलंका के बीच मतभेद रहे हैं।
- मछुआरों का मुद्दा: भारतीय और श्रीलंकाई मछुआरों के बीच अक्सर टकराव होता रहता है।
- समुद्री सीमा विवाद: दोनों देशों के बीच समुद्री सीमा को लेकर विवाद है।
- चीन का बढ़ता प्रभाव: श्रीलंका में चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर भारत चिंतित है।
प्रश्न 7. संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंगों को लिखिए ? (कोई 6 )
Ans. संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख अंग (6):
-
महासभा: यह संयुक्त राष्ट्र का मुख्य deliberative, policymaking और representative organ है। इसमें सभी 193 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व होता है। महासभा महत्वपूर्ण मुद्दों पर बहस करती है, नीतियां बनाती है, और बजट को मंजूरी देती है।
-
सुरक्षा परिषद: यह संयुक्त राष्ट्र का मुख्य peace and security organ है। इसमें 5 स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका) और 10 गैर-स्थायी सदस्य शामिल हैं जो महासभा द्वारा चुने जाते हैं। सुरक्षा परिषद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरे का सामना करने के लिए जिम्मेदार है।
-
आर्थिक और सामाजिक परिषद: यह संयुक्त राष्ट्र का मुख्य economic and social organ है। इसमें 54 सदस्य देश शामिल हैं जो महासभा द्वारा चुने जाते हैं। यह परिषद आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक मुद्दों पर नीतियां बनाती है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देती है।
-
सचिवालय: यह संयुक्त राष्ट्र का administrative organ है। इसका नेतृत्व महासचिव करते हैं जो महासभा द्वारा 5 साल के लिए चुने जाते हैं। सचिवालय संयुक्त राष्ट्र के अन्य अंगों का administrative support प्रदान करता है।
-
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय: यह संयुक्त राष्ट्र का principal judicial organ है। इसमें 15 न्यायाधीश शामिल हैं जो महासभा और सुरक्षा परिषद द्वारा चुने जाते हैं। यह न्यायालय अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर विवादों का निपटारा करता है।
-
न्यास परिषद: यह संयुक्त राष्ट्र का trusteeship organ था। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों का प्रशासन करना था जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्वतंत्र नहीं हुए थे। 1994 में, सभी न्यास क्षेत्रों को स्वतंत्रता प्रदान कर दी गई थी, और न्यास परिषद निष्क्रिय हो गई।
प्रश्न 8. यूनेस्कों की संरचना एवं कार्य लिखिए ?
Ans. यूनेस्को की संरचना एवं कार्य:
संरचना:
- महासभा: यह यूनेस्को का सर्वोच्च नीति निर्धारण निकाय है। इसमें सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
- कार्यकारी बोर्ड: यह महासभा के बीच में काम करता है और नीति क्रियान्वयन का पर्यवेक्षण करता है। इसमें 58 सदस्य देश शामिल होते हैं।
- सचिवालय: यह यूनेस्को का प्रशासनिक निकाय है। इसका नेतृत्व महानिदेशक करते हैं जो महासभा द्वारा 4 साल के लिए चुने जाते हैं।
कार्य:
- शिक्षा: शिक्षा के क्षेत्र में, यूनेस्को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, शिक्षा तक पहुंच को बढ़ावा देना, और शिक्षा के माध्यम से शांति और सतत विकास को बढ़ावा देना चाहता है।
- विज्ञान: विज्ञान के क्षेत्र में, यूनेस्को वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देना, वैज्ञानिक ज्ञान को साझा करना, और विज्ञान और प्रौद्योगिकी के माध्यम से सामाजिक विकास को बढ़ावा देना चाहता है।
- संस्कृति: संस्कृति के क्षेत्र में, यूनेस्को सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना, सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा देना, और संस्कृति के माध्यम से संवाद और समझ को बढ़ावा देना चाहता है।
- संचार और सूचना: संचार और सूचना के क्षेत्र में, यूनेस्को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ावा देना, मीडिया की स्वतंत्रता को मजबूत करना, और सूचना तक पहुंच को बढ़ावा देना चाहता है।
प्रश्न 9. संयुक्त राष्ट्र संघ की किन्ही छः विफलताओं की विवेचना कीजिए ।
Ans. संयुक्त राष्ट्र संघ की छः विफलताएं:
-
अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने में विफलता:
- संयुक्त राष्ट्र शीत युद्ध के दौरान कई संघर्षों को रोकने में विफल रहा, जैसे कि कोरियाई युद्ध और वियतनाम युद्ध।
- हाल के वर्षों में, संयुक्त राष्ट्र सीरिया, यमन और दक्षिण सूडान जैसे देशों में संघर्षों को रोकने में भी विफल रहा है।
-
मानवाधिकारों की रक्षा करने में विफलता:
- संयुक्त राष्ट्र कई मानवाधिकारों के उल्लंघनों को रोकने में विफल रहा है, जैसे कि 1994 में रवांडा नरसंहार और 2003 में दारफुर नरसंहार।
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकारों के उल्लंघन करने वाले देशों को जवाबदेह ठहराने में भी विफल रहा है।
-
आर्थिक विकास को बढ़ावा देने में विफलता:
- संयुक्त राष्ट्र वैश्विक असमानता को कम करने और विकासशील देशों में गरीबी को कम करने में विफल रहा है।
- संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय क्षति जैसी वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में भी विफल रहा है।
-
सुधार करने में विफलता:
- संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार करने में विफल रहा है, जो कि अधिक प्रतिनिधि और लोकतांत्रिक बनने की आवश्यकता है।
- संयुक्त राष्ट्र सचिवालय में भी सुधार करने की आवश्यकता है, ताकि यह अधिक कुशल और प्रभावी बन सके।
-
राजनीतिक हस्तक्षेप:
- संयुक्त राष्ट्र अक्सर शक्तिशाली देशों द्वारा राजनीतिक हस्तक्षेप का शिकार होता है।
- यह हस्तक्षेप संयुक्त राष्ट्र को प्रभावी ढंग से कार्य करने से रोक सकता है।
-
बजट कटौती:
- संयुक्त राष्ट्र को बजट कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उसकी कार्यक्षमता कम हो रही है।
- बजट कटौती संयुक्त राष्ट्र को महत्वपूर्ण कार्यक्रमों और गतिविधियों को करने से रोक सकती है।
प्रश्न 10. पर्यावरण विश्व की साझी सम्पदा परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ है। स्पष्ट कीजिए ।
Ans. पर्यावरण विश्व की साझी सम्पदा परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ:
पर्यावरण विश्व की साझी सम्पदा:
- वायु, जल, और भूमि जैसी प्राकृतिक संसाधन सभी देशों की साझी सम्पदा हैं।
- इन संसाधनों का उपयोग सभी देशों के लोगों द्वारा किया जाता है।
- इन संसाधनों की रक्षा करना सभी देशों की जिम्मेदारी है।
अलग-अलग जिम्मेदारियाँ:
- सभी देशों की पर्यावरण के प्रति अलग-अलग जिम्मेदारियाँ हैं।
- विकसित देशों की जिम्मेदारी है कि वे विकासशील देशों को पर्यावरण की रक्षा करने में मदद करें।
- विकासशील देशों की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को कम करें।
विकसित देशों की जिम्मेदारियाँ:
- विकसित देशों ने पर्यावरण को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।
- इन देशों की जिम्मेदारी है कि वे अपने कार्बन उत्सर्जन को कम करें।
- इन देशों को विकासशील देशों को पर्यावरण की रक्षा करने के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करनी चाहिए।
विकासशील देशों की जिम्मेदारियाँ:
- विकासशील देशों की जिम्मेदारी है कि वे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को कम करें।
- इन देशों को sustainable development की नीतियां अपनानी चाहिए।
- इन देशों को पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए।
प्रश्न 11. युनेप(UNEP) के मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए।
Ans. युनेप (UNEP) के मुख्य कार्य:
- पर्यावरण निगरानी और मूल्यांकन: UNEP दुनिया भर में पर्यावरणीय स्थितियों की निगरानी और मूल्यांकन करता है। यह डेटा वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं और आम जनता को उपलब्ध कराता है।
- पर्यावरण नीति विकास: UNEP देशों को पर्यावरण नीतियां विकसित करने में मदद करता है। यह नीतियां स्थायी विकास और पर्यावरणीय संरक्षण को बढ़ावा देती हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सहयोग: UNEP अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण सहयोग को बढ़ावा देता है। यह देशों को पर्यावरणीय समस्याओं को हल करने के लिए मिलकर काम करने में मदद करता है।
- क्षमता निर्माण: UNEP देशों को पर्यावरणीय क्षमता का निर्माण करने में मदद करता है। यह देशों को पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान करने के लिए आवश्यक ज्ञान और कौशल प्रदान करता है।
- जागरूकता और शिक्षा: UNEP पर्यावरण के बारे में जागरूकता और शिक्षा को बढ़ावा देता है। यह लोगों को पर्यावरणीय समस्याओं और उनके समाधानों के बारे में शिक्षित करता है।
प्रश्न 12. विभाजन के दौरान भारत को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा ?
Ans. विभाजन के दौरान भारत को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा ?
1. साम्प्रदायिक हिंसा: विभाजन के दौरान भारत में बड़े पैमाने पर साम्प्रदायिक हिंसा हुई। लाखों लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए।
2. शरणार्थियों का पुनर्वास: विभाजन के बाद, लाखों शरणार्थी भारत आए। उन्हें भोजन, आश्रय और चिकित्सा सहायता प्रदान करना भारत के लिए एक बड़ी चुनौती थी।
3. आर्थिक नुकसान: विभाजन से भारत को भारी आर्थिक नुकसान हुआ। कई महत्वपूर्ण उद्योग और बुनियादी ढांचे पाकिस्तान में चले गए।
4. राजनीतिक अस्थिरता: विभाजन के बाद भारत में राजनीतिक अस्थिरता का दौर रहा। कई हत्याएं और राजनीतिक उथल-पुथल हुई।
5. सामाजिक तनाव: विभाजन से भारत में सामाजिक तनाव पैदा हुआ। हिंदुओं और मुसलमानों के बीच अविश्वास और तनाव था।
प्रश्न 13. विस्थापन और पुनर्वास को परिभाषित कर स्पष्ट कीजिए।
Ans. विस्थापन और पुनर्वास: परिभाषा और स्पष्टीकरण
विस्थापन:
विस्थापन का अर्थ है किसी व्यक्ति या समूह को उनके घर या मूल स्थान से जबरदस्ती या अनिच्छा से हटाना। यह प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध, संघर्ष, विकास परियोजनाओं, या अन्य कारणों से हो सकता है।
पुनर्वास:
पुनर्वास का अर्थ है विस्थापित व्यक्तियों को नए स्थान पर स्थापित करने और उन्हें अपनी नई परिस्थितियों के अनुकूल होने में मदद करने की प्रक्रिया। इसमें उन्हें आवास, भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, और रोजगार के अवसर प्रदान करना शामिल है।
विस्थापन के प्रकार:
- अस्थायी विस्थापन: यह तब होता है जब लोग थोड़े समय के लिए अपने घरों से विस्थापित होते हैं, जैसे कि प्राकृतिक आपदा के बाद।
- स्थायी विस्थापन: यह तब होता है जब लोग स्थायी रूप से अपने घरों से विस्थापित होते हैं, जैसे कि युद्ध या संघर्ष के कारण।
पुनर्वास के प्रकार:
- स्थानीय पुनर्वास: यह तब होता है जब विस्थापित लोगों को उनके मूल स्थान के पास स्थापित किया जाता है।
- दूरस्थ पुनर्वास: यह तब होता है जब विस्थापित लोगों को उनके मूल स्थान से दूर स्थापित किया जाता है।
विस्थापन और पुनर्वास की चुनौतियां:
- आवास: विस्थापित लोगों को अक्सर नए स्थानों पर आवास ढूंढने में कठिनाई होती है।
- भोजन: विस्थापित लोगों को अक्सर भोजन की कमी का सामना करना पड़ता है।
- शिक्षा: विस्थापित बच्चों को अक्सर शिक्षा तक पहुंच नहीं मिलती है।
- स्वास्थ्य सेवा: विस्थापित लोगों को अक्सर स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच नहीं मिलती है।
- रोजगार: विस्थापित लोगों को अक्सर रोजगार ढूंढने में कठिनाई होती है।
प्रश्न 14. भारतीय विदेश नीति की किन्ही 6 बिन्दुओं में आलोचना कीजिए।
Ans. भारतीय विदेश नीति की 6 आलोचनाएं:
- अनिर्णय: भारत अक्सर महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अनिर्णय की स्थिति में रहता है। यह उसके प्रभाव को कम करता है।
- अप्रभावी: भारत की विदेश नीति अक्सर अप्रभावी होती है। यह अपनी नीतियों को लागू करने में कम सफल रहा है।
- अस्थिरता: भारत की विदेश नीति अक्सर अस्थिर होती है। यह सरकार बदलने के साथ बदलता रहता है।
- अस्पष्टता: भारत की विदेश नीति अक्सर अस्पष्ट होती है। यह उसकी नीतियों के लक्ष्यों और उद्देश्यों को समझना मुश्किल बनाता है।
- असंतुलित: भारत की विदेश नीति अक्सर असंतुलित होती है। यह कुछ देशों पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित करता है और दूसरों की उपेक्षा करता है।
- अप्रासंगिक: भारत की विदेश नीति अक्सर अप्रासंगिक होती है। यह बदलती हुई दुनिया की वास्तविकताओं को दर्शाता नहीं है।
प्रश्न 15. भारत के परमाणु कार्यक्रम की गतिविधियाँ के विकास पर प्रकाश डालिए।
Ans. भारत के परमाणु कार्यक्रम की गतिविधियाँ के विकास पर प्रकाश:
प्रारंभिक वर्ष (1940-1960):
- 1944: होमी जहाँगीर भाभा ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR) की स्थापना की।
- 1956: भारत का पहला परमाणु रिएक्टर, अप्सरा, TIFR में स्थापित किया गया।
- 1957: भारत का पहला परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) स्थापित किया गया।
विकास का दौर (1960-1980):
- 1963: भारत का पहला परमाणु ऊर्जा संयंत्र, तारापुर, महाराष्ट्र में स्थापित किया गया।
- 1974: भारत का पहला भूमिगत परमाणु परीक्षण, पोखरण में आयोजित किया गया।
- 1980: भारत का पहला स्वदेशी परमाणु ऊर्जा संयंत्र, कलपक्कम, तमिलनाडु में स्थापित किया गया।
विस्तार और आधुनिकीकरण (1980-2000):
- 1984: भारत का पहला परमाणु पनडुब्बी, INS चक्र, चालू किया गया।
- 1998: भारत ने पोखरण में दूसरी बार परमाणु परीक्षणों की श्रृंखला आयोजित की।
- 1999: भारत ने परमाणु अप्रसार संधि (NPT) पर हस्ताक्षर नहीं किए।
वर्तमान स्थिति (2000-वर्तमान):
- भारत के पास 22 परमाणु ऊर्जा संयंत्र हैं जो 6,780 मेगावाट बिजली का उत्पादन करते हैं।
- भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की कोशिश कर रहा है।
- भारत अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा सहयोग में भी भाग ले रहा है।
भविष्य की योजनाएं:
- भारत अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता का विस्तार करने की योजना बना रहा है।
- भारत थोरियम-आधारित परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी विकसित करने पर भी काम कर रहा है।
प्रश्न 16. भारत-चीन के मध्य हुए सन् 1962 के युद्ध के कारण बताइए।
Ans. भारत-चीन युद्ध 1962 के कारण:
सीमा विवाद:
- 1962 के युद्ध का मुख्य कारण सीमा विवाद था।
- भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है।
- चीन ने भारत के कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया था, जिन्हें भारत अपना मानता था।
राजनीतिक मतभेद:
- भारत और चीन के बीच राजनीतिक मतभेद भी युद्ध का कारण थे।
- भारत ने चीन के तिब्बत पर कब्जे का विरोध किया था।
- चीन ने भारत के गैर-संरेखित आंदोलन में नेतृत्व का विरोध किया था।
अन्य कारण:
- भारत की सेना की अपूर्ण तैयारी
- चीन की सेना की ताकत
- भारत की गलत रणनीति
परिणाम:
- युद्ध में भारत की हार हुई।
- चीन ने भारत के कुछ क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया।
- भारत और चीन के बीच संबंधों में खटास आ गई।
प्रश्न 17. भारत में सन् 1971 में कांग्रेस पार्टी के पुनरूत्थान के लिए उत्तरदायी कारक कौन-कौन से थे ?
Ans. 1971 में कांग्रेस पार्टी के पुनरूत्थान के लिए उत्तरदायी कारक:
-
1971 का युद्ध:
- 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध ने भारतीय जनता की भावनाओं को उत्साहित किया।
- इस युद्ध में भारत ने पाकिस्तान को हराया और बांगलादेश की स्थापना की।
- इससे कांग्रेस पार्टी की छवि में बदलाव हुआ और जनता ने इंदिरा गांधी को एक मजबूत नेता के रूप में मान्यता दी।
-
इंदिरा गांधी की नेतृत्व:
- इंदिरा गांधी ने अपने नेतृत्व में कांग्रेस को एक नई दिशा दिलाई।
- उन्होंने जनता के बीच अपनी नेतृत्व कौशल को साबित किया और भारतीय राजनीति में नया दौर शुरू किया।
प्रश्न 18. विश्व राजनीति के बदलते समीकरण से आज भारत के विदेशी संबंधों पर क्या असर पड़ा?
Ans. विश्व राजनीति के बदलते समीकरण से भारत के विदेशी संबंधों पर प्रभाव:
1. रणनीतिक महत्व:
- भारत की बढ़ती आर्थिक शक्ति और रणनीतिक महत्व ने उसे वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बना दिया है।
- भारत अब चीन और अमेरिका के बीच शक्ति संतुलन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
- भारत-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका ने उसे क्षेत्रीय शक्ति के रूप में स्थापित किया है।
2. बहुपक्षीय संबंधों में वृद्धि:
- भारत ने बहुपक्षीय संगठनों जैसे कि G20, BRICS, SCO और ASEAN में अपनी भागीदारी को मजबूत किया है।
- भारत ने क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों में नेतृत्व की भूमिका निभाई है।
- भारत ने वैश्विक मुद्दों जैसे कि जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और विकासशील देशों के हितों पर सक्रिय रूप से आवाज उठाई है।
3. रक्षा और सुरक्षा संबंधों में मजबूती:
- भारत ने अमेरिका, रूस, फ्रांस और इज़राइल जैसे देशों के साथ रक्षा और सुरक्षा संबंधों को मजबूत किया है।
- भारत ने 'क्वाड' (चतुष्कोणीय सुरक्षा संवाद) और 'ऑकस' (ऑस्ट्रेलिया, यूके और अमेरिका) जैसे रणनीतिक समूहों में अपनी भागीदारी बढ़ाई है।
- भारत ने 'हिंद-प्रशांत' क्षेत्र में अपनी रक्षा क्षमताओं और सैन्य उपस्थिति को मजबूत किया है।
4. आर्थिक और व्यापारिक संबंधों में विस्तार:
- भारत ने कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं।
- भारत ने 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' पहलों के माध्यम से विदेशी निवेश को आकर्षित किया है।
- भारत ने 'डिजिटल इंडिया' पहल के माध्यम से अपनी डिजिटल अर्थव्यवस्था को विकसित किया है।
5. सांस्कृतिक और लोगों से लोगों के संबंधों में वृद्धि:
- भारत ने विदेशी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति कार्यक्रमों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ाया है।
- भारत ने प्रवासी भारतीयों के साथ संबंधों को मजबूत किया है।
- भारत ने दुनिया भर में योग और आयुर्वेद जैसे भारतीय संस्कृति के पहलुओं को बढ़ावा दिया है।
6. चुनौतियां:
- चीन के बढ़ते प्रभाव से भारत की सुरक्षा और रणनीतिक हितों को खतरा है।
- आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और वैश्विक महामारी जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना करना।
- विकसित देशों के साथ व्यापार और निवेश में असमानता।
प्रश्न 19. विदेश नीति प्रायः राष्ट्रीय हितों से प्रभावित होती है ? क्या आप इस विचार से सहमत है ? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।
Ans. विदेश नीति और राष्ट्रीय हित:
हाँ, मैं इस विचार से सहमत हूँ कि विदेश नीति प्रायः राष्ट्रीय हितों से प्रभावित होती है।
तर्क:
- राष्ट्रीय सुरक्षा:
- किसी भी देश की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना होता है।
- इसके लिए देश अन्य देशों के साथ संबंध बनाता है, रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर करता है, और अपनी सेना को मजबूत बनाता है।
- आर्थिक हित:
- देश अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए व्यापार समझौतों पर हस्ताक्षर करते हैं, विदेशी निवेश को आकर्षित करते हैं, और अपने नागरिकों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करते हैं।
- राजनीतिक हित:
- देश अपनी राजनीतिक शक्ति और प्रभाव को बढ़ाने के लिए अन्य देशों के साथ गठबंधन बनाते हैं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों में भाग लेते हैं, और वैश्विक मुद्दों पर अपनी आवाज उठाते हैं।
- सांस्कृतिक हित:
- देश अपनी संस्कृति और मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए अन्य देशों के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं।
उदाहरण:
- भारत की विदेश नीति में 'पड़ोसी पहले' नीति, 'पूर्व की ओर देखो' नीति, और 'एक्ट ईस्ट' नीति भारत के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।
- अमेरिका की विदेश नीति में 'अमेरिका प्रथम' नीति और 'रणनीतिक प्रतिस्पर्धा' नीति अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई हैं।
प्रश्न 20. हरित क्रांति की शुरुआत किस परिस्थिति में की गई थी?
Ans. हरित क्रांति की शुरुआत:
हरित क्रांति की शुरुआत 1960 के दशक में भारत में खाद्य संकट के कारण हुई थी।
परिस्थितियां:
- खाद्य संकट: 1960 के दशक में भारत में खाद्य पदार्थों की भारी कमी थी।
- जनसंख्या वृद्धि: भारत की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही थी, जिससे खाद्य पदार्थों की मांग में भी वृद्धि हुई।
- अकाल: 1965-66 में भारत में भयंकर अकाल पड़ा, जिसमें लाखों लोग भूख से मर गए।
- कृषि उत्पादन में कमी: भारत की कृषि प्रणाली पुरानी और अप्रभावी थी, जिसके कारण कृषि उत्पादन कम था।
हरित क्रांति के उद्देश्य:
- खाद्य उत्पादन में वृद्धि: भारत को खाद्य आत्मनिर्भर बनाने के लिए।
- गरीबी और भूख को कम करना: भारत के लोगों को पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराना।
- कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण: कृषि प्रणाली को अधिक कुशल और प्रभावी बनाना।
हरित क्रांति के प्रभाव:
- खाद्य उत्पादन में वृद्धि: हरित क्रांति के कारण भारत में खाद्य उत्पादन में भारी वृद्धि हुई।
- गरीबी और भूख में कमी: भारत में गरीबी और भूख में कमी आई।
- कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण: भारत की कृषि प्रणाली अधिक कुशल और प्रभावी बन गई।
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