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CBSE 12th Hindi Core Board Exam 2025-26: Most Important Questions with Answers for Last Minute Revision

CBSE 12th Hindi Core Board Exam 2025-26: Most Important Questions with Answers for Last Minute Revision

The CBSE Class 12 Hindi Core exam is scheduled for 16th March 2026, and with only a few hours left, it’s crucial to focus on high-scoring topics and important questions.To assist students with their last-minute preparations, we have compiled a set of important questions along with their answers.

Covers important topics. Includes basic subjective & marks wise questions. Provides sample practice paper question for better understanding. Contains quick revision notes, grammar questions, and short & long answer questions.

CBSE Class 12 Hindi Core is a 3-hour, 80-mark theory paper with 20 marks for internal assessment. CBSE also states that there is no chapter-wise weightage, so revise each chapter.

CBSE 12 Hindi Most Important Questions with Answers 2026

For the CBSE Class 12 Board Examination 2026, study the important English questions and make sure to utilize these key questions to secure 95% marks in the exam.

CBSE 12 Hindi Most Important Questions 2026 (2 Marks)

प्रश्न 1: डेडलाइन से क्या अभिप्राय है तथा यह क्यों आवश्यक होती है?

उत्तर: अखबार 24 घंटे में एक बार या साप्ताहिक पत्रिका सप्ताह में एक बार प्रकाशित होती है। अखबार या पत्रिका में समाचारों या रिपोर्ट को प्रकाशन के लिए स्वीकार करने की एक निश्चित समय-सीमा होती है, जिसे डेडलाइन कहते हैं।

प्रश्न 2:  रेडियो समाचार की भाषा के विषय में अपने विचार व्यक्त करें।

उत्तर: • जिसमें आम बोलचाल के शब्दों का प्रयोग हो।

• जो समाचारवाचक आसानी से पढ़ सके।

• जिसमें आम बोलचाल की भाषा के साथ-साथ सटीक मुहावरों का इस्तेमाल हो। 

• जिसमें सामासिक और तत्सम शब्दों की बहुलता न हो। 

प्रश्न 3: संपादकीय लेखन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: • संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाले संपादकीय को अखबार की आवाज़ मा ना जाता है।

• संपादकीय के ज़रिये अखबार किसी घटना, समस्या या मुद्दे के प्रति अपनी राय प्रकट करते हैं।

• संपादकीय किसी व्यक्ति विशेष का विचार नहीं होता इसलिए उसे किसी के नाम के साथ नहीं छापा जाता।

• संपादकीय लिखने का दायित्व उस अखबार में काम करने वाले संपादक और उनके सहयोगियों पर होता है।

• आमतौर पर अखबारों में सहायक संपादक, संपादकीय लिखते हैं।

• कोई बाहरी लेखक या पत्रकार संपादकीय नहीं लिख सकता है।

प्रश्न 4: फीचर क्या है?

उत्तर: • अखबारों में समाचारों के अलावा भी अन्य कई तरह का पत्रकारीय लेखन छप ता है।

• इनमें फीचर प्रमुख है।

• फीचर एक सुव्यवस्थित, सृजनात्मक और आत्मनिष्ठ लेखन है जिसका उद्देश्य पा ठकों को सूचना देने, शिक्षित करने के साथ मुख्य रूप से उनका मनोरंजन कर ना होता है।

प्रश्न 5: बीट किसे कहते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: खबरें भी कई तरह की होती हैं-

राजनीतिक, आर्थिक, अपराध, खेल, फ़िल्म, कृषि, कानून, विज्ञान या किसी भी और वि य से जुड़ी हुई ।

संवाददाताओं के बीच काम का विभाजन आमतौर पर उनकी दिलचस्पी और ज्ञान को ध्यान में रखते हुए किया जाता है।

मीडिया की भाषा में इसे बीट कहते हैं।

एक संवाददाता की बीट अगर अपराध है तो इसका अर्थ यह है कि उसका कार्यक्षेत्र अपने शहर या क्षेत्र में घटनेवाली आपराधिक घटनाओं की रिपोर्टिंग करना है।

अखबार की ओर से वह इनकी रिपोर्टिंग के लिए जिम्मेदार और जवाबदेह भी है।

प्रश्न 6: जीजी ने इंदर सेना पर पानी फेंके जाने को किस तरह सही ठहराया? काले मेघा पानी दे पाठ के आधार पर स्पष्ट करें।

उत्तर:  किन्हीं दो प्रश्नों के लगभग 40 शब्दों में उत्तर :- के अनुसार मनुष्य के पास जो चीज़ ना हो और वह उसका त्याग करके किसी और को देता है, तो उसका बहुत अच्छा फल मिलता है। इंदर सेना ऐसे समय में पानी की माँग करती थी, जब लोगों के पास स्वयं पानी नहीं हुआ करता था। लोग अपने घरों से निकाल- निकालकर पानी देते थे। लेखक को पानी की यह बर्बादी पसंद नहीं थी। 

प्रश्न 7: महादेवी जी भक्तिन के आने जाने से अधिक देहाती कैसे हो गईं?

उत्तर: भक्तिन के आ जाने के बाद महादेवी को देहात की संस्कृति, खान-पान, रहन-सहन, वेश- भूषा आदि का ज्ञान हो गया क्योंकि भक्तिन के अंदर दूसरों को बदल देने के गुण भरपूर मात्रा में विद्यमान थे। भक्तिन भोजन में मीठा बनाना बंद कर दिया। वह गाढ़ी दाल, मोटी रोटी, मकई की लपसी, ज्वार के भुने हुए, भुट्टे के हरे-हरे दाने की खिचड़ी, बाजरे के तिल वाले ठंढे पु आदि बनाती। महादेवी वर्मा बार-बार प्रयास करके भी उसके स्वभाव को परिवर्तित नहीं कर पायीं और धीरे-धीरे उनका स्वाद बदल गया। इसलिए भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती हो गई।

प्रश्न 8: अवधूत से क्या अभिप्राय है? शिरीष के फूल पाठ के आधार पर स्पष्ट करें कि शिरीष कालजयी अवधूत कैसे है?

उत्तर: 'अवधूत' वह है जो सांसारिक मोह माया से ऊपर होता है। वह संन्यासी होता है। लेखक ने शिरीष को कालजयी अवधूत कहा है क्योंकि वह कठिन परिस्थितियों में भी फलता- फूलता रहता है। भयंकर गर्मी, लू, उमस आदि में भी शिरीष का पेड़ फलों से लदा हुआ मिलता है।

प्रश्न 9: "हम समर्थ शक्तिवान और हम एक दुर्बल को लाएँगे" - कविता - कैमरे में बंद अपाहिज की प्रस्तुत पंक्ति में कवि ने क्या व्यंग्य किया है?

उत्तर: 'हम समर्थ शक्तिमान' पंक्ति के माध्यम से मीडिया की ताकत व कार्यक्रम संचालकों की मानसिकता का पता चलता है। मीडिया कमी या मीडिया-संचालक अपने प्रचार-प्रसार की ताकत के कारण किसी का भी मजाक बना सकते हैं तथा किसी को भी नीचे गिरा सकते हैं। चैनल के मुनाफ़े के लिए संचालक किसी की करुणा को भी बेच सकते हैं। कार्यक्रम का निर्माण व प्रस्तुति संचालकों की मर्जी से होता है।

प्रश्न 10: उषा कविता के प्रस्तुत काव्यांश का भाव - सौंदर्य बताइए- "बहुत काली सिल ज़रा से लाल केसर से कि जैसे धुल गई हो।"

उत्तर: कवि कहता है कि जिस प्रकार ज्यादा काली सिर अर्थात् पत्थर पर थोड़ा-सा केसर डाल देने से वह धुल जाती है अर्थात् उसका कालापन खत्म हो जाता है, ठीक उसी प्रकार काली सिर को किरण रूपी केसर धो देता है अर्थात् सूर्योदय होते ही हर वस्तु चमकने लगती है।

प्रश्न 11: लक्ष्मण मूर्छित थे और संपूर्ण वातावरण में शोक छाया हुआ था। तब हनुमान का आना करुण रस में वीर रस के आने जैसा क्यों प्रतीत होता है? लक्ष्मण मूर्छा और राम का विलाप कविता के आधार पर उत्तर दीजिए ।

उत्तर: हनुमान लक्ष्मण के इलाज के लिए संजीवनी बूटी लाने हिमालय पर्वत गए थे। उन्हें आने में देर हो रही थी। लक्ष्मण मूर्छा के बाद पूरा माहौल शोक-ग्रस्त हो गया था। समस्त भालू- वानर सेना राम को देख अत्यंत दुखी थे। जैसे ही हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर शोक- ग्रस्त माहौल में पहुँचे तो वे पूरा का पूरा पर्वत ही अपने हाथ पर उठा लाए थे। हनुमान को देख राम तथा समस्त जन थोड़े खुश हुए तथा शीघ्र ही वैद्य जी ने लक्ष्मण को संजीवनी बूटी पिलाई तो लक्ष्मण उठ खड़े हुए। राम सहित पूरी वानर सेना खुश हो गई। इस प्रकार शोक-ग्रस्त माहौल में हनुमान के अवतरण को वीर रस का आविर्भाव कहा गया है।

CBSE 12 Hindi Most Important Questions 2026 (3 Marks)

प्रश्न 12: आत्मपरिचय कविता में कवि एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करता है और दूसरी ओर मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ- विपरीत से लगते इन कथनों पर आपका क्या मत है?

उत्तर:  कविता में एक ओर जग-जीवन का भार लिए घूमने की बात करता है इसका आशय मनुष्य की सामजिकता से है| मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है इसलिए उसे सांसारिक दायित्वों का निर्वाह करना पड़ता है जैसे कवि कर रहे हैं। जीवन में दुख-सुख दोनों ही आते हैं। मनुष्य को अनेक कष्टों का सामना करना पड़ता है परन्तु वह इस जीवन से अलग नहीं हो सकता। दूसरी ओर मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ का आशय अन्य लोगों द्वारा किए गए आलोचना से है| कवि इसे हृदयहीन और स्वार्थी मानते हैं| वह अपनी मस्ती में रहते हैं और जहाँ तक हो सके प्रेम बाँटने की कोशिश करते हैं।

प्रश्न 13: सावन और भादो के महीने बीत जाने के बाद प्रकृति में जो परिवर्तन कवि ने पतंग कविता में बताए हैं, उनका वर्णन अपने शब्दों में करें।

उत्तर:  सबसे तेज़ बौछारें तथा भादों के जाने के बाद सवेरा हुआ जो अत्यंत लालिमा और सुंदरता से परिपूर्ण था। वह सवेरा खरगोश की आँखों के समान लाल रंग का था। वातावरण स्वच्छ व धुला हुआ दिखाई देता है। धूप चमकीली होने लगी और फूलों पर तितलियाँ मंडराने लगीं। जब बच्चे के रंग-बिरंगे पतंग आकाश में उड़ाने लगे तो चारों ओर सीटियों और किलकारियों की आवाज़ गूंज उठी तथा तितलियों ने मधुर गुंजार शुरू कर दिया।

प्रश्न 14:  कविता के बहाने पाठ में कवि के अनुसार 'बिना मुरझाए महकने के माने क्या होते हैं?

उत्तर:  कवि कहता है कि फूल एक निश्चित समय पर खिलते हैं। उनका जीवन भी निश्चित होता है, परंतु कविता के खिलने का कोई निश्चित समय नहीं होता है। उसकी जीवन अवधि असीमित है। वे कभी नहीं मुरझाती । उनकी कविताओं की महक सदैव फैलती रहती है।

प्रश्न 15: जाति प्रथा को श्रम विभाजन का आधार क्यों नहीं माना जा सकता? पाठ से उदाहरण देकर समझाइए ।

उत्तर:  जातिप्रथा को श्रम विभाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आंबेडकर के निम्नलिखित तर्क हैं -

• जाति प्रथा श्रम विभाजन के साथ-साथ श्रमिक विभाजन भी कराती है। सभ्य समाज में श्रमिकों का विभिन्न वर्गों में विभाजन अस्वाभाविक है।

• जाति प्रथा में श्रम विभाजन मनुष्य की रुचि पर आधारित नहीं है। इसमें मनुष्य के प्रशिक्षण अथवा निजी क्षमता का विचार किए बिना किसी दूसरे के द्वारा उसके लिए पेशा निर्धारित कर दिया जाता है। यह जन्म पर आधारित होता है।

• भारत में जाति प्रथा मनुष्य को जीवन भर के लिए एक पेशे में बाँध देती है, भले ही वह पेशा उसके लिए अनुपयुक्त या अपर्याप्त क्यों न हो। इससे उसके भूखों मरने की नौबत आ जाती है।

प्रश्न 16: आशय स्पष्ट कीजिए - "बाज़ार किसी का लिंग, जाति, धर्म या क्षेत्र नहीं देखता, वह देखता है सिर्फ उसकी क्रय शक्ति को । इस तरह वह एक प्रकार से सामाजिक समता की भी रचना कर रहा है। "

उत्तर: यह बात बिलकुल सत्य है कि बाजारवाद ने कभी किसी को लिंग, जाति, धर्म या क्षेत्र के आधार पर नहीं देखा। उसने केवल व्यक्ति के खरीदने की शक्ति को देखा है। जो व्यक्ति सामान खरीद सकता है वह बाजार में सर्वश्रेष्ठ है। कहने का आशय यही है कि उपभोक्तावादी संस्कृति ने सामाजिक समता स्थापित की है। यही आज का बाजारवाद है।

प्रश्न 17: ढोलक की आवाज़ का गाँव के निवासियों पर क्या प्रभाव पड़ता था? पहलवान की ढोलक पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: महामारी की त्रासदी से जूझते हुए ग्रामीणों को ढोलक की आवाज संजीवनी शक्ति की तरह मौत से लड़ने की प्रेरणा देती थी। यह आवाज बूढ़े- बच्चों व जवानों की शक्तिहीन आँखों के आगे दंगल का दृश्य उपस्थित कर देती थी। उनकी स्पंदन शक्ति से शून्य स्नायुओं में भी बिजली दौड़ जाती थी। ठीक है कि ढोलक की आवाज में बुखार को दूर करने की ताकत न थी, पर उसे सुनकर मरते हुए प्राणियों को अपनी आँखें मूंदते समय कोई तकलीफ़ नहीं होती थी। उस समय वे मृत्यु से नहीं डरते थे। इस प्रकार ढोलक की आवाज गाँव वालों को मृत्यु से लड़ने की प्रेरणा देती थी।

CBSE 12 Hindi Most Important Questions 2026 (4 Marks)

प्रश्न 18: नाटक और कहानी में क्या अंतर है? कहानी की तुलना में नाटक को लंबे समय तक लोग क्यों याद रखते हैं?

उत्तर: • जहाँ कहानी का संबंध लेखक और पाठक से जुड़ता है वहीं नाटक लेखक, निर्देशक, पात्र, दर्शक, श्रोता एवं अन्य लोगों को एक-दूसरे से जोड़ता है।

• चूँकि दृश्य का स्मृतियों से गहरा संबंध होता है इसलिए नाटक एवं फ़िल्म को लोग देर तक याद रखते हैं।

• यही कारण है कि गोदान, देवदास, उसने कहा था, सद्गति आदि के नाट्य रूपांतरण कई बार हुए हैं और कई तरह से हुए हैं।

प्रश्न 19: रेडियो नाटक में संवाद की क्या विशेषताएँ हैं?

उत्तर: •  रेडियो नाटक में संवाद की विशेषताएँ -

• रेडियो नाटक में पात्रों संबधी तमाम जानकारी हमें संवादों के माध्यम से ही मिलती हैं। उनके नाम, आपसी संबंध, चारित्रिक विशेषताएँ, ये सभी हमें संवादों द्वारा ही उजागर करना होता है।

• भाषा पर भी विशेष ध्यान रखना होगा। वो पढ़ा-लिखा है कि अनपढ़, शहर का है कि गाँव का, क्या वो किसी विशेष प्रांत का है, उसकी उम्र क्या है, वो क्या रोज़गार- धंधा करता है। इस तरह की तमाम जानकारियाँ उस चरित्र की भाषा को निर्धारित करेंगी।

• फिर पात्रों का आपसी संबंध भी संवाद की बनावट पर असर डालता है। एक ही व्यक्ति अपनी पत्नी से अलग ढंग से बात करेगा, अपने नौकर से अलग ढंग से, आपने बॉस के प्रति सम्मानपूर्वक रवैया अपनाएगा, तो अपने मित्र के प्रति उसका बराबरी और गरम- जोशी का व्यवहार होगा।

• रेडियो क्योंकि मूलतः संवाद प्रधान माध्यम है, इसलिए यहाँ इसका खास ध्यान रखना होता है।

• रेडियो में कौन किससे बात कर रहा है, हम देख नहीं पाते इसलिए संवाद जिस चरित्र को संबोधित है, उसका नाम लेना ज़रूरी होता है, खासतौर पर जब दृश्यों में दो से अधिक पात्र हों। इसके अलावा रेडियो नाटक में कई बार कोई पात्र विशेष जब कोई हरकत, कोई एक्शन करता है तो उसे भी संवाद का हिस्सा बन पड़ता है।

प्रश्न 20: अप्रत्याशित विषयों को लेख का नाम क्यों दिया जाता है?

उत्तर: अप्रत्याशित विषयों हम जो कुछ लिखेंगे, वह कभी निबंध बन पड़ेगा, कभी संस्मरण, कभी

रेखाचित्र की शक्ल लेगा, तो इसीलिए हम उसे एक सामान्य नाम देंगे- कभी यात्रावृत्तांत की। लेख, ताकि ऐसा न लगे कि किसी विधा विशेष के भीतर ही लेखन करने का दबाव बन रहा है। 

CBSE 12 Hindi Most Important Questions 2026 (5 Marks)

प्रश्न 21: समय के साथ यशोधर बाबू की पत्नी स्वयं को ढाल सकने में सफल होती है लेकिन यशोधर बाबू असफल रहते हैं। ऐसा क्यों हुआ होगा? कहानी सिल्वर वैडिंग के आधार पर तार्किक टिप्पणी करें।

उत्तर: यशोधर बाबू के माता पिता का देहांत बचपन में ही हो गया था, इसलिए वह बचपन से ही ज़िम्मेदारियों के बोझ तले दबे थे। वह बचपन में अपनी उम्र के बच्चों के साथ नहीं बल्कि बड़े बुजुर्गों के साथ रहते थे। पले बढ़े अत: वह उन परंपराओं को छोड़ नहीं सकते थे। यशोधर बाबू अपने आदर्श किशन दा से अधिक प्रभावित है और आधुनिक परिवेश में बदलते हुए जीवन मूल्यों और संस्कारों के विरुद्ध है।

जबकि उनकी पत्नी अपने बच्चों के साथ खड़ी दिखाई देती है वह अपने बच्चों के आधुनिक दृष्टिकोण से प्रभावित है। वे बेटी के कहे अनुसार नए कपड़े पहनती है। वह अपने बेटों की जीवन में कोई ताँक-झाँक नहीं करती। यशोधर बाबू की पत्नी आज की आधुनिकता के हिसाब से रहती है और समय में परिवर्तन होता देख खुद में भी परिवर्तन लाने का प्रयास करती है परंतु यशोधर बाबू भी पुराने रीति रिवाज़ों में बंधकर रहते हैं।

प्रश्न 22: जूझ कहानी के आधार पर तर्क सहित उत्तर दें कि पढ़ाई-लिखाई के संबंध में लेखक और दत्ता जी राव का रवैया सही था या लेखक के पिता का?

उत्तर: इस पाठ के सन्दर्भ में हम अगर लेखक के पिता जी और दत्ता जी राव का पढ़ाई-लिखाई के सम्बन्ध में रवैया देखें तो पता चलता है कि दत्ता जी राव का रवैया लेखक के पिता जी से बेहतर था। वह पढ़ाई-लिखाई के महत्त्व को भली-भांति जानते थे इसलिए जब दत्ता जी को पता चला कि लेखक के पिता उसे पढ़ने के लिए पाठशाला नहीं जाने देते तो उन्होंने लेखक के पिता को बहुत भला- बुरा सुनाया और कहा की बेटे और पत्नी को खेतो में काम में लगा कर तू पूरा दिन क्या करता हैं, तू कल से बेटे को पढ़ने भेजेगा अगर तेरे पास फीस के पैसे नहीं है तो मैं उसकी फीस दूंगा। दत्ता जी के सामने लेखक के पिता ने 'हां' तो के दी पपर बाद में वे आनंद को स्कूल भेजने के पक्ष में नहीं थे। जिससे ज्ञात होता है कि पिता जी का रवैया पढ़ाई-लिखाई के प्रति ठीक नहीं था। मूर्तियाँ,

प्रश्न 23: पुरातत्व के किन चिहनों के आधार पर यह कहा जा सकता है कि-"सिंधु सभ्यता ताकत से शासित होने की अपेक्षा समझ से अनुशासित सभ्यता थी?" अतीत में दबे पाँव पाठ के अनुसार स्पष्ट करें।

उत्तर: पुरातत्ववेत्ताओं ने जो भी खुदाई की और खोज की। उसमें उन्हें मिट्टी के बर्तन, सिक्के, पत्थर और लकड़ी के उपकरण मिले। इन चित्रों के फलस्वरूप यही बात सामने आई कि लोग समय के अनुरूप इन वस्तुओं का उपभोग करते थे। दूसरा उनकी नगर योजना भी उनकी समझ का पुख्ता प्रमाण है। आज की नगर योजना भी उनकी योजना के समकक्ष नहीं ठहरती। जो कुछ उन्होंने नगरों, गलियों, सड़कों को साफ़-सुथरा रखने की विधि अपनाई, वह उनकी समझ को ही दर्शाती है। यहाँ के अजायबघर में प्रदर्शित चीज़ों में औजार तो हैं, लेकिन हथियार नहीं। उपरिलिखित बिंदु सांकेतिक हैं। अन्य बिंदु विचारणीय व स्वीकार्य हो सकते हैं।

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